अनंत चतुर्दशी पर निकलेगा आस्था, परंपरा और देशभक्ति का भव्य कारवां
KHULASA FIRST
संवाददाता

झांकियों की तैयारी अंतिम दौर में, कहीं सुदामा-कृष्ण मिलन तो कहीं शिव बरात जगन्नाथ रथयात्रा से लेकर कारगिल के रण तक के नजर आएंगे दृश्य
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गणेशोत्सव के समापन पर शहर की पहचान बन चुके अनंत चतुर्दशी पर झिलमिलाती झांकियों के पारंपरिक समारोह की तैयारियां अब अंतिम दौर में हैं। इस ऐतिहासिक चल समारोह को देखने के लिए न सिर्फ इंदौर, बल्कि प्रदेश और देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं।
विदेशों में रहने वाले लोग भी ऑनलाइन माध्यमों से इंदौर की इस अनूठी परंपरा और रोशनी से सजी झांकियों के कारवां का आनंद लेते हैं।
इस बार भी झांकियों में धार्मिक आस्था के साथ नारी शक्ति, देशभक्ति, भारतीय संस्कृति, पौराणिक प्रसंग और बच्चों के मनोरंजन को जगह दी गई है। 20 से अधिक झांकियां अपने अंतिम स्वरूप में पहुंच रही हैं।
कहीं कलाकार भगवान के पौराणिक प्रसंगों को जीवंत करने में जुटे हैं, तो कहीं देश की वीरता और नई पीढ़ी के सपनों को झांकी का रूप दिया जा रहा है। अनंत चतुर्दशी के इस भव्य चल समारोह में खजराना गणेश मंदिर की पारंपरिक झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी और समारोह की धार्मिक भव्यता को आगे बढ़ाएगी।
103 साल से निकल रही हुकुमचंद मिल की झांकियां
इंदौर की बंद हो चुकी कपड़ा मिलों की झांकी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हुकुमचंद मिल मजदूर कर्मचारी-अधिकारी समिति की ओर से इस बार तीन झांकियां तैयार की जा रही हैं। समिति के 103 वर्षों के इतिहास की झांकी परंपरा में इस बार भी धार्मिक और पौराणिक प्रसंगों को जगह दी गई है।
पहली झांकी : बाली और सुग्रीव का प्रसंग...पहली झांकी में रामायण के किष्किंधा कांड में बाली और सुग्रीव के प्रसंग को दिखाया जा रहा है। दृश्य में बाली और सुग्रीव के बीच युद्ध, सुग्रीव का राज्य से निष्कासन और इसके बाद भगवान श्रीराम से उनकी मित्रता को दर्शाया गया है।
कथा के अनुसार, हनुमानजी के माध्यम से सुग्रीव की भगवान श्रीराम से मुलाकात होती है और श्रीराम सुग्रीव को न्याय दिलाने का संकल्प लेते हैं। इसी प्रसंग को झांकी के दृश्यों में उतारा जा रहा है।
दूसरी झांकी : सावित्री और सत्यवान...दूसरी झांकी में सावित्री-सत्यवान और वट सावित्री पूजन के प्रसंग को दर्शाया गया है। झांकी में उस भावुक दृश्य को दिखाया गया है, जब सत्यवान की मृत्यु का समय आता है और सावित्री अपने पति के प्राण बचाने के लिए यमराज के सामने अपने संकल्प और बुद्धिमत्ता का परिचय देती हैं। झांकी के माध्यम से त्याग, समर्पण, साहस और वैवाहिक निष्ठा का संदेश देने का प्रयास किया गया है।
तीसरी झांकी : भगवान गणेश का सिंदूरी स्वरूप...तीसरी झांकी भगवान गणेश और सिंदूरासुर के प्रसंग पर आधारित है। पौराणिक कथा के अनुसार, सिंदूरासुर नामक शक्तिशाली असुर का भगवान गणेश ने वध किया था। इन झांकियों को निर्माता दीपक लवागे और रिशु आर्ट की टीम द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है।
राजकुमार मिल की तीन झांकियां भी तैयार
राजकुमार मिल गणेश उत्सव समिति की ओर से तीन झांकियां तैयार की जा रही हैं।
पहली झांकी : भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा पर आधारित है। इसमें भगवान जगन्नाथ को नृत्य लीला करते हुए दर्शाया गया है। धार्मिक वातावरण, भव्य सजावट और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के जरिये झांकी को जीवंत स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
दूसरी झांकी : भगवान विष्णु और असुर मधु-कैटभ के युद्ध का प्रसंग वाली इस झांकी में महामाया की तपस्या करने वाले शक्तिशाली असुरों और भगवान विष्णु के बीच हुए संघर्ष को दृश्य रूप दिया जा रहा है।
तीसरी झांकी : रामायण की अशोक वाटिका के प्रसंग पर आधारित है। इसमें माता जानकी और हनुमानजी के संवाद और मुलाकात को प्रमुख दृश्य के रूप में दिखाया गया है।
राजकुमार मिल की झांकियों का निर्माण कलाकार प्रवीण हरगांवकर और उनकी टीम द्वारा किया जा रहा है। वेल्डिंग, पेंटिंग, लाइट डेकोरेशन और अन्य सजावट का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है।
कल्याणमल मिल : जगन्नाथ रथयात्रा से कारगिल तक...
कल्याणमल मिल गणेश उत्सव समिति द्वारा इस बार दो प्रमुख झांकियां तैयार की जा रही हैं। पहली झांकी में ओडिशा के पुरी की विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का दृश्य तैयार किया गया है।
झांकी में भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा को रथ पर विराजमान दिखाया गया है। भक्तों की भीड़ रथ को खींचती हुई नजर आएगी। पुरी की रथयात्रा के धार्मिक और भव्य वातावरण को इंदौर की झांकी में उतारने का प्रयास किया गया है।
दूसरी झांकी में भारत की नारी शक्ति, प्रगति और देशभक्ति को केंद्र में रखा गया है। इसमें अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के संघर्ष, दृढ़ संकल्प और उपलब्धियों को दर्शाया जा रहा है। झांकी के माध्यम से देश की बेटियों के सपनों और उनकी उपलब्धियों को सामने रखने का प्रयास किया गया है।
इसी झांकी के अगले हिस्से में कारगिल युद्ध, पर्वतीय क्षेत्र और भारतीय सेना के जवान दिखाए गए हैं।
रातभर रोशन रहेगा परंपरा का झिलमिलाता कारवां...
अनंत चतुर्दशी के दिन जब शहर की सड़कों पर ये झांकियां निकलेंगी तो धार्मिक कथाओं से लेकर देशभक्ति, नारी शक्ति और बच्चों के मनोरंजन तक अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे।
कहीं कृष्ण-सुदामा की दोस्ती नजर आएगी, कहीं शिव बारात निकलेगी, कहीं भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का दृश्य होगा तो कहीं रामायण के प्रसंग जीवंत होंगे। कल्पना चावला के संघर्ष से लेकर कारगिल के रण और भारतीय सेना के शौर्य तक को झांकियों में स्थान दिया गया है।
खास बात यह है कि इन झांकियों को केवल मशीनों से तैयार नहीं किया जा रहा, बल्कि शहर के कलाकार, पेंटर, वेल्डर, लाइटिंग विशेषज्ञ और कारीगर कई सप्ताह से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
गणेश उत्सव समापन पर अनंत चतुर्दशी की रात इंदौर एक बार फिर रोशनी, आस्था, कला और परंपरा के ऐसे कारवां का गवाह बनेगा, जिसे देखने देश-दुनिया की निगाहें इंदौर की ओर रहेंगी।
निगम निगम : सुदामा-कृष्ण मिलन व नई पीढ़ी का गणेश उत्सव
नगर निगम द्वारा इस बार दो झांकियां तैयार की जा रही हैं। पहली झांकी में भगवान श्रीकृष्ण और उनके बालसखा सुदामा के मिलन का भावुक प्रसंग है। दोस्ती, प्रेम, अपनत्व और समानता का यह प्रसंग झांकी के माध्यम से जीवंत किया जा रहा है।
नगर निगम की दूसरी झांकी में गणेश उत्सव और नई पीढ़ी के जुड़ाव को दिखाया गया है। इसमें स्कूली बच्चे पीठ पर बैग लिए गणेश उत्सव के माहौल में नजर आएंगे। इन झांकियों को अंतिम स्वरूप देने में झांकी निर्माता पप्पू बैरबा की टीम जुटी हुई है।
दीपक बेंडवाल, सुशील जीनवाल सहित करीब 10 लोगों की टीम पिछले एक सप्ताह से दिन-रात काम कर रही है। सोमवार को झांकियों का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा कर अंतिम सजावट और फिनिशिंग का काम किया जा रहा है।
77वें वर्ष में होप टेक्सटाइल्स की झांकी, शिव बरात और गणेश आराधना बनेगी आकर्षण
होप टेक्सटाइल्स लिमिटेड श्री गणेश उत्सव समिति इस वर्ष अपने आयोजन के 77वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। समिति की ओर से दो झांकियां तैयार की जा रही हैं, जिनमें शिव बरात और गणेश आराधना को प्रमुखता दी गई है।
झांकी कलाकार उदय जरिया के मुताबिक, शिव बारात की झांकी का प्रसंग शिव महापुराण की रुद्र संहिता के पार्वती खंड से लिया गया है। धार्मिक प्रसंग को झांकी के स्वरूप में उतारने के लिए कलाकारों की टीम पिछले करीब एक माह से जुटी हुई है।
झांकी में आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के लिए करीब 3,000 रंग-बिरंगे बल्ब लगाए गए हैं, जो रात में झिलमिलाएंगे।
मालवा मिल : शिव बरात और चंद्र-रोहिणी विवाह प्रसंग...
मालवा मिल गणेश उत्सव समिति की ओर से इस बार दो धार्मिक और एक बच्चों की झांकी तैयार की जा रही है। समिति के कैलाश कुशवाहा के मुताबिक, धार्मिक झांकियों में भगवान भोलेनाथ की बरात और चंद्रदेव तथा रोहिणी के विवाह का प्रसंग शामिल है।
वहीं, बच्चों को आकर्षित करने के लिए खास झांकी तैयार की जा रही है। इसमें लोकप्रिय बाल कविता ‘मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है...’ को दृश्य रूप दिया गया है। झांकी निर्माता राकेश वर्मा और उनकी टीम अंतिम स्वरूप देने में जुटी है।
समिति के उपाध्यक्ष विकास जाटवा और मुकेश वर्मा के मुताबिक, बच्चों से जुड़ी झांकियों में हर वर्ष बड़ी संख्या में दर्शक जुटते हैं, इसलिए बच्चों की पसंद और आकर्षण को ध्यान में रखते हुए इस बार यह विषय चुना गया है।
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