कैबिनेट विस्तार की तैयारी में सरकार: इतने नए विधायकों को मिल सकता है मंत्री पद; कई विभागों में फेरबदल के संकेत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार अपने पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में जुट गई है। विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी संकेत दिए हैं कि मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक सरकार में 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है। इसके साथ ही तीन से चार वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया जा सकता है। भाजपा संगठन आगामी नगरीय निकाय चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नए राजनीतिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रहा है।
प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल में बदलाव का प्रमुख आधार मंत्रियों का कार्य प्रदर्शन रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार केंद्र और प्रदेश स्तर पर मंत्रियों एवं विधायकों के कामकाज की नियमित समीक्षा होती है और उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाती है।
महिला नेताओं को मिल सकता है बड़ा मौका
भाजपा महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार सांसद से विधायक बनीं रीति पाठक, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस और वरिष्ठ भाजपा नेता मालिनी गौड़ को मंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। इनमें से एक या दो महिला नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
बुंदेलखंड पर विशेष फोकस
पार्टी नेतृत्व बुंदेलखंड क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। वर्तमान मंत्रिमंडल में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम माना जाता है। ऐसे में सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ जिलों से किसी विधायक को मंत्री पद देकर क्षेत्रीय असंतोष दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।
ओबीसी और चुनावी गणित पर नजर
भाजपा की रणनीति ओबीसी वर्ग में अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करने की भी है। प्रदेश में ओबीसी मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है और 2028 विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी सामाजिक संतुलन साधने की तैयारी में है। मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है।
सिंधिया समर्थक और संगठन के बीच संतुलन की चुनौती
मौजूदा मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक नेताओं की अच्छी-खासी भागीदारी है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि सिंधिया खेमे का प्रतिनिधित्व बनाए रखते हुए मूल संगठन से जुड़े नेताओं को भी पर्याप्त अवसर दिया जाए। माना जा रहा है कि फेरबदल के दौरान इसी संतुलन को साधने की कोशिश होगी।
निकाय चुनाव से पहले फीडबैक अभियान
अगले वर्ष संभावित नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन लगातार जमीनी फीडबैक जुटा रहा है। सीटों की स्थिति, संभावित उम्मीदवारों, बूथ प्रबंधन और स्थानीय मुद्दों पर संगठन की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसी फीडबैक का असर मंत्रिमंडल विस्तार में भी दिखाई दे सकता है। मंत्रियों के प्रदर्शन और हाल के विवादों को देखते हुए कुछ नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।
विजय शाह- कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद विजय शाह लगातार विपक्ष और पार्टी के भीतर आलोचना का सामना कर रहे हैं। मामले में न्यायिक टिप्पणियों और संगठन की नाराजगी की चर्चा भी रही है।
दिलीप अहिरवार- पहली बार विधायक बनने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान मिला था, लेकिन कार्य प्रदर्शन को लेकर मिली समीक्षा रिपोर्टों के बाद उनकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है।
प्रतिमा बागरी- जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद और उससे संबंधित न्यायालयीन प्रक्रिया के कारण उनका नाम चर्चा में रहा है। इसके अलावा उनके परिवार से जुड़े कुछ मामलों ने भी राजनीतिक हलकों में बहस को जन्म दिया है।
राधा सिंह- विभागीय कार्यों की समीक्षा में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने की चर्चा के बाद उनके मंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।
एदल सिंह कंषाना- रेत खनन और माफिया से जुड़े बयानों के अलावा विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे हैं। हाल के कुछ विवादों के बाद उनकी भूमिका पर भी राजनीतिक नजर बनी हुई है।
कौन बन सकता है नया मंत्री?
राजनीतिक गलियारों में जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा है, उनमें रीति पाठक, मालिनी गौड़, अर्चना चिटनीस के अलावा बुंदेलखंड और ओबीसी वर्ग से आने वाले कुछ विधायकों के नाम शामिल हैं। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और संगठन की सहमति के बाद ही होगा।
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