नशामुक्त स्वप्न से सशक्त राष्ट्र के शिल्प तक
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. दीपक गोस्वामी मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नशा केवल शराब या सिगरेट नहीं, गांजा, अफीम, हेरोइन के साथ ही इसने नए-नए रूप धारण कर लिए हैं, जैसे मोबाइल की लत, सोशल मीडिया की निर्भरता, ऑनलाइन जुआ, गेमिंग की अति, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन, ई-सिगरेट, सिंथेटिक ड्रग्स, रात-रातभर स्क्रीन के सामने जागना, लाइक्स और फॉलोअर्स की भूख, ये सभी आधुनिक व्यसन हैं।
पहले नशा शरीर को बांधता था, आज वह मन, समय, सोच और व्यक्तित्व को भी बांध रहा है। इसका सबसे आसान शिकार हमारे बच्चे और युवा बन रहे हैं। कोई दोस्ती निभाने के दबाव में पहली बार सिगरेट पी लेता है। कोई परीक्षा के तनाव में नींद की गोली लेने लगता है।
भा रत आज केवल आर्थिक प्रगति की यात्रा पर नहीं है, बल्कि चरित्र, संस्कृति, स्वास्थ्य और मानवता के पुनर्जागरण की यात्रा पर भी अग्रसर है। वर्ष 2047 का विकसित भारत केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों, तेज रफ़्तार ट्रेनों और आधुनिक तकनीक का सपना नहीं है।
यह उस भारत का स्वप्न है, जहां हर घर में मुस्कान हो, हर युवा के भीतर उद्देश्य हो, हर परिवार में विश्वास हो और हर नागरिक के जीवन में आत्मसम्मान हो। लेकिन, इस स्वप्न के सामने एक ऐसा शत्रु खड़ा है, जो बिना शोर किए घरों को उजाड़ देता है, परिवारों को तोड़ देता है, प्रतिभाओं को निगल जाता है और राष्ट्र की शक्ति को भीतर ही भीतर खोखला कर देता है। वह है नशा।
नशा केवल शराब या सिगरेट नहीं, गांजा, अफीम, हेरोइन के साथ ही इसने नए-नए रूप धारण कर लिए हैं, जैसे मोबाइल की लत, सोशल मीडिया की निर्भरता, ऑनलाइन जुआ, गेमिंग की अति, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन, ई-सिगरेट, सिंथेटिक ड्रग्स, रात-रातभर स्क्रीन के सामने जागना, लाइक्स और फॉलोअर्स की भूख, ये सभी आधुनिक व्यसन हैं।
पहले नशा शरीर को बांधता था, आज वह मन, समय, सोच और व्यक्तित्व को भी बांध रहा है। इसका सबसे आसान शिकार हमारे बच्चे और युवा बन रहे हैं। कोई दोस्ती निभाने के दबाव में पहली बार सिगरेट पी लेता है। कोई परीक्षा के तनाव में नींद की गोली लेने लगता है। कोई नौकरी न मिलने की निराशा में शराब का सहारा ढूंढ़ता है। कोई अकेलेपन को मोबाइल में डुबो देता है।
शुरुआत हमेशा छोटी होती है। कोई भी व्यक्ति पहले दिन नशेड़ी नहीं बनता। पहले उत्सुकता होती है, फिर आदत, फिर निर्भरता और अंततः पूरा जीवन उसी के इर्द-गिर्द घूमने लगता है। जब एक युवक नशे में डूबता है, तो केवल वही नहीं टूटता। उसके साथ उसके माता-पिता की उम्मीदें टूटती हैं, बहन का विश्वास टूटता है, पत्नी की मुस्कान खो जाती है, बच्चों का भविष्य डगमगा जाता है, घर की जमा-पूंजी इलाज में खर्च होती है, रिश्तों में कटुता आ जाती है, परिवार का वातावरण भय, झगड़े और तनाव से भर जाता है।
समाज पर भी इसका भारी प्रभाव पड़ता है। सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती हैं, अपराध बढ़ते हैं, घरेलू हिंसा बढ़ती है, कार्यस्थलों पर उत्पादकता घटती है, अस्पतालों का बोझ बढ़ता है, न्यायालयों और जेलों पर दबाव बढ़ता है, राष्ट्र की ऊर्जा विकास से हटकर समस्याओं के समाधान में खर्च होने लगती है, इस तरह नशा केवल व्यक्तिगत कमजोरी नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती है।
भारत विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। यही युवा यदि स्वस्थ, शिक्षित, अनुशासित और नशामुक्त रहेगा तो आने वाले वर्षों में भारत विज्ञान, तकनीक, कृषि, उद्योग, शिक्षा और नवाचार का वैश्विक नेतृत्व कर सकता है, लेकिन यदि यही युवा व्यसनों में उलझ गया तो जनसंख्या हमारा सबसे बड़ा संसाधन नहीं, सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी।
हमारी संस्कृति ने सदियों पहले सिखाया था कि सबसे बड़ा विजेता वह है, जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर ले। वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, जैन और बौद्ध दर्शन सभी आत्मसंयम, विवेक और संतुलन को जीवन की वास्तविक शक्ति मानते हैं। आज आवश्यकता है कि इन मूल्यों को आधुनिक जीवन की भाषा में फिर से जीवित किया जाए। नशामुक्ति केवल कानून का विषय नहीं है। केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। अस्पतालों का कार्य भी नहीं है। यह पूरे समाज का सामूहिक उत्तरदायित्व है। पहली जिम्मेदारी परिवार की है।
जिस घर में प्रतिदिन कुछ समय साथ बैठकर बातचीत होती है, जहां माता-पिता बच्चों की बात सुनते हैं, जहां गलती पर अपमान नहीं, बल्कि मार्गदर्शन मिलता है, वहां बच्चों के गलत रास्ते पर जाने की संभावना बहुत कम होती है। बच्चों को केवल अंक नहीं, अपनापन भी चाहिए। केवल सुविधाएं नहीं, उन्हें समय चाहिए।
विद्यालय और महाविद्यालयों को भी अपनी भूमिका बदलनी होगी। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं, बल्कि जीवन जीना सिखाना है। यदि विद्यालयों में जीवन-कौशल, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, योग, ध्यान, खेल, कला, नैतिक शिक्षा और नशे के वैज्ञानिक दुष्परिणामों पर नियमित कार्यक्रम हों, तो अनेक युवाओं को व्यसन की ओर जाने से रोका जा सकता है।
खेल का मैदान, पुस्तकालय, संगीत, नाटक, विज्ञान प्रयोगशाला, योग केंद्र, स्काउट-गाइड, राष्ट्रीय सेवा योजना, स्वयंसेवा और स्टार्टअप जैसी सकारात्मक गतिविधियां युवाओं को उद्देश्य देती हैं। जिस जीवन में उद्देश्य होता है, वहां नशे के लिए जगह बहुत कम बचती है।
आज आवश्यकता यह भी है कि हम नशा करने वाले व्यक्ति को अपराधी समझने के बजाय एक ऐसे इंसान के रूप में देखें, जिसे सहायता की आवश्यकता है। यदि समाज केवल तिरस्कार करेगा तो वह और अधिक छिपेगा। यदि समाज सहयोग करेगा तो उसके लौटने की संभावना बढ़ेगी।
चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुनर्वास, परिवार का सहयोग और समाज की स्वीकार्यता, ये पांचों मिलकर ही किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से व्यसन से बाहर ला सकते हैं। केवल दवा पर्याप्त नहीं है। केवल प्रवचन भी पर्याप्त नहीं है। केवल कानून भी पर्याप्त नहीं है। इन सभी का संतुलित समन्वय ही सफलता का मार्ग है।
आध्यात्मिकता भी इस यात्रा की एक महत्वपूर्ण शक्ति है। जब मनुष्य अपने भीतर शांति, प्रेम, आत्मसम्मान और उद्देश्य का अनुभव करता है, तब बाहरी कृत्रिम सुख आकर्षित नहीं करते। योग, ध्यान, प्रार्थना, आत्मचिंतन, सेवा और सकारात्मक संगति मन को भीतर से इतना मजबूत बना देती है कि व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी टूटता नहीं।
व्यक्तिगत जीवन में हमें कुछ छोटे-छोटे संकल्प लेने होंगे। नियमित व्यायाम करें। समय पर सोएं। पौष्टिक भोजन करें। स्क्रीन समय सीमित रखें। अच्छे मित्र चुनें। परिवार के साथ भोजन करें। प्रतिदिन कुछ समय पढ़ने, ध्यान करने और आत्मचिंतन के लिए निकालें। तनाव हो, तो उसे भीतर दबाने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करें। किसी जरूरतमंद की सहायता करें। सेवा का आनंद किसी भी नशे से कहीं अधिक गहरा और स्थायी होता है।
समाज स्तर पर मोहल्लों, गांवों और शहरों में जनजागरण अभियान, नुक्कड़ नाटक, खेल प्रतियोगिताएं, युवा क्लब, माता-पिता संवाद, विद्यालयीन कार्यशालाएं और नशामुक्ति शपथ कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए। मीडिया और मनोरंजन जगत को भी यह समझना होगा कि नशे को आधुनिकता और स्टाइल के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय है।
सरकार की नीतियां, समाज की भागीदारी, परिवार का स्नेह, विद्यालय का मार्गदर्शन, चिकित्सा का सहयोग और व्यक्ति का आत्मसंकल्प, जब ये सभी एक सूत्र में बंधेंगे, तभी नशामुक्त भारत का स्वप्न साकार होगा।
आइए, आज हम स्वयं से एक सरल व शक्तिशाली वचन लें...
मैं अपने शरीर का सम्मान करूंगा।
मैं अपने मन को स्वस्थ रखूंगा।
मैं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहूंगा।
मैं अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करूंगा।
मैं अपनी ऊर्जा, समय और प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण में समर्पित करूंगा।
याद रखिए, नशा कभी किसी का मित्र नहीं होता। वह पहले सुख का भ्रम देता है, फिर स्वतंत्रता छीन लेता है। इसके विपरीत संयम, अनुशासन और सकारात्मक जीवन पहले कठिन लगते हैं, पर अंततः वही सम्मान, सफलता, स्वास्थ्य और सच्चा आनंद देते हैं।
जिस दिन भारत का प्रत्येक युवा यह समझ जाएगा कि उसका सबसे बड़ा नशा लक्ष्य होना चाहिए, उसका सबसे बड़ा उत्साह कर्म होना चाहिए और उसका सबसे बड़ा गौरव उसका चरित्र होना चाहिए, उसी दिन विकसित भारत की वास्तविक यात्रा प्रारंभ हो जाएगी। नशामुक्त नागरिक ही सशक्त परिवार बनाते हैं।
सशक्त परिवार ही समृद्ध समाज बनाते हैं। समृद्ध समाज ही विकसित राष्ट्र का निर्माण करते हैं। आइए, स्वयं बदलें, परिवार बदलें, समाज बदलें और 2047 के भारत को केवल विकसित ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, संस्कारित, आत्मनिर्भर और चरित्रवान भारत बनाएं। (ये लेखक के निजी विचार हैं।)
संबंधित समाचार

सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज:मुख्यमंत्री ने किया मार्ग का औचक निरीक्षण; कहा- जनता के सहयोग से आसान हो रहा विकास का काम

आरएसएस का शाखा संगम:लाल परेड ग्राउंड में जुटे 30 हजार स्वयंसेवक; शारीरिक प्रदर्शन और घोष वादन भी

एमडी ड्रग्स के साथ तस्कर गिरफ्तार:घेराबंदी कर पकड़ा; बड़ी मात्रा में नशा किया जब्त

कार्यक्रम खत्म, सड़कों पर जाम

अतिथि शिक्षकों का दर्द छलका:गिटार पर गाया; ‘लाखों डॉक्टर-इंजीनियर बनाए, आज हम ही फटेहाल’

‘अंधभक्त' शब्द के पीछे राहुल गांधी का असली निशाना क्या:छात्र और अंधभक्त में फर्क सिर्फ राजनीति नहीं; राहुल का तर्क कितना ठोस

गणेशजी संग विराजे पांच हनुमान मंदिर:शहर की वायरल प्रतिमा

छात्रों की गूंज के बाद बयानबाजी का दौर शुरू:भाजपा-कांग्रेस ने एक-दूसरे पर किए आक्रामक वार

पानी से भरे गड्ढे में डूबने से बच्चे की मौत:स्कूल की छुट्टी पर घर से खेलने निकला था; कपड़े मिलने के बाद चला पता

शहर का बड़ा गणपति:जहां हर दर्शन में बसती है सवा सौ साल पुरानी परंपरा

मरीज की मौत के बाद एमवायएच में हंगामा:परिजन ने सर्जरी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर से की हाथापाई; विरोध में डॉक्टरों ने कुछ देर रोका काम

देखिए वीडियो:मुख्यमंत्री बोले; करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा हमारी जिम्मेदारी, नागरिकों के सहयोग से आसान हुआ सड़क चौड़ीकरण, नागरिकों ने फूल बरसाकर किया स्वागत

सीनियर्स से प्रताड़ित महिला डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाकर किया आत्महत्या का प्रयास:एमजीएम मेडिकल कॉलेज का मामला

फ्लाईओवर से 75 फीट नीचे गिरी तेज रफ्तार BMW:3 युवकों की मौत; एक गंभीर

212 दुकानें बंद, व्यापारियों का प्रदर्शन जताया आक्रोश:फुटपाथ माफियाओं का जुलूस निकालो

गणेश उत्सव का पोस्टर फाड़ने को लेकर विवाद:दो पक्षों में मारपीट; चार लोगों पर केस दर्ज, छह थानों का पुलिस बल तैनात, चार लोगों के घायल होने की सूचना

सबूत देने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रही पुलिस:फर्जी स्टाम्प मामले में पीड़ित का आरोप

देखिये वीडियो, छात्रों की गूंज में पुलिस से नोकझोंक पर सियासत:पूर्व मंत्री बोले- तेरे बाप का कार्यक्रम नहीं है; राहुल गांधी का कार्यक्रम है, कई सिंघम आए और चले गए, ये इंदौर है प्यारे

मंत्री और नगर अध्यक्ष का कांग्रेस पर निशाना:‘छात्रों के बीच कार्यकर्ताओं को खड़ा करने की जरूरत क्यों पड़ी?’

छात्र को फर्जी बैंक कॉल का झांसा देकर साइबर ठगी:फर्जी वेबसाइट पर कराया लॉगिन; ओटीपी डालते ही ट्रांसफर हो गई रकम
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!