उद्योग और शैक्षणिक समूह के संस्थापक का निधन: 95 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रेस्टीज उद्योग एवं शैक्षणिक समूह के संस्थापक और पद्मश्री से सम्मानित नेम नाथ जैन का बुधवार सुबह निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे।
उनके निधन की खबर से इंदौर के उद्योग, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को मेघदूत मुक्तिधाम में किया जाएगा।
नेम नाथ जैन ने संघर्ष और मेहनत के दम पर इंदौर में अपनी अलग पहचान बनाई। भारत-विभाजन के बाद किशोरावस्था में इंदौर पहुंचे नेम नाथ जैन ने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी और आगे चलकर उद्योग जगत में एक बड़े समूह की नींव रखी।
रावलपिंडी में जन्म, विभाजन के बाद इंदौर आए
नेम नाथ जैन का जन्म रावलपिंडी में हुआ था। भारत-विभाजन के बाद करीब 16 वर्ष की उम्र में वे इंदौर आ गए। शुरुआती दौर में उन्होंने एक मिल में काम किया और नौकरी के साथ पढ़ाई भी जारी रखी।
उन्होंने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वे SGSITS इंदौर के शुरुआती बैच के विद्यार्थियों में शामिल थे और अपने बैच में प्रथम स्थान हासिल किया था।
नौकरी के शुरुआती दौर में जिस कंपनी से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की, आगे चलकर उसी कंपनी में वे CEO के पद तक पहुंचे।
तीन दशक की नौकरी के बाद 1977 में शुरू किया उद्योग
करीब तीन दशक तक नौकरी करने के बाद नेम नाथ जैन ने वर्ष 1977 में प्रेस्टीज समूह की नींव रखी। समूह की शुरुआत कैटल फीड प्लांट से हुई थी। इसके बाद कारोबार का विस्तार कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सोया उत्पाद और एग्री-बिजनेस के क्षेत्रों में हुआ।
समूह के आधिकारिक विवरण के अनुसार, समय के साथ प्रेस्टीज का कारोबार देश से बाहर भी विस्तारित हुआ और करीब 40 देशों तक पहुंचा।
उद्योग के साथ शिक्षा को भी बनाया अपना क्षेत्र
नेम नाथ जैन ने औद्योगिक गतिविधियों के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थानों के निर्माण और विस्तार पर जोर दिया।
प्रेस्टीज समूह के शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार इंदौर, देवास और ग्वालियर तक हुआ। बाद में प्रेस्टीज यूनिवर्सिटी की स्थापना भी इसी शैक्षणिक दृष्टि का हिस्सा बनी।
उनके निधन की खबर के बाद शिक्षाविदों, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और शहर के अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
2021 में राष्ट्रपति भवन में मिला पद्मश्री सम्मान
व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में नेम नाथ जैन को पद्मश्री देने की घोषणा की थी।
वर्ष 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
नेम नाथ जैन के निधन के साथ इंदौर ने उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया, जिन्होंने अपने संस्थानों के माध्यम से शहर की औद्योगिक और शैक्षणिक पहचान को विस्तार देने में भूमिका निभाई।
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