पूर्व इंजीनियर अभय राठौर ने 125.75 करोड़ रुपए के फर्जी बिल किए पास: नगर निगम के फर्जी बिल घोटाले में ईडी ने किया गिरफ्तार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले में ईडी द्वारा गिरफ्तार नगर निगम के पूर्व इंजीनियर अभय राठौर ने 2018 से लेकर अभी तक कुल 125.75 करोड़ के बिल पास किए।
इनमें से 92.76 करोड़ रुपए के बिल ऐसे थे जिनका भुगतान बिना काम किया गया। बताते हैं कि उसने कई निगम अधिकारियों का नाम लिया है और अब वे भी ईडी की रडार पर हैं।
विश्वस्तों ने जमीनों में लगाया पैसा
उधर, ये भी खबर मिली है कि राठौर का पैसा उनके विश्वस्त निगमकर्मियों ने जमीनों में लगाया है। राठौर ने अपने काले पैसों से बहुत सी जमीनें खरीदी हैं। ईडी अब तक राठौर की 34 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क करने के अलावा, बड़ी मात्रा में नकदी भी जब्त कर चुका है। उल्लेखनीय है कि ईडी ने 2024 में सामने आए फर्जी बिल घोटाले में पहली बार गिरफ्तारी ली है।
ईडी इसमें डेढ़ साल पहले ही मनी लॉन्ड्रिग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज कर चुका था। अब इसमें ईडी ने मुख्य आरोपी राठौर के साथ ही ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को गिरफ्तार किया है। ये तीनों आज तक की रिमांड पर हैं।
सूत्रों का कहना है कि ईडी सामान्य तौर पर गिरफ्तारी नहीं लेता, लेकिन इस केस में ईडी ने चिह्नित कर तीन की गिरफ्तारी ली है, जबकि आरोपी कई हैं। इसकी मुख्य वजह है कि राठौर इसमें लगातार सीवरेज/ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों के नाम ले रहा है।
खुद को बचाने अन्य अधिकारियों को फंसा रहा
इन अधिकारियों की भी डिटेल निकाली जा रही है। अभय ने बताया है कि यह सब आला अधिकारियों की मंजूरी, हस्ताक्षर से हुआ है। ईडी मान रही है कि खुद को बचाने के लिए राठौर अन्य अधिकारियों को फंसा रहा है, फिर भी जिनके नाम लिए हैं उनकी जानकारी निकाली जा रही है।
राठौर ने शपथपत्र देते हुए कोर्ट में आला अधिकारियों पर संगीन आरोप लगाए हैं, और जांच की मांग कर डाली है। ईडी ये भी देख रहा है कि यह फर्जीवाड़ा कितने सालों से चल रहा था। क्योंकि यह मामला केवल अभी का नहीं है, जिसमें केवल कुछ फाइल और उनका भुगतान आया है।
घोटाला सालों से और अभी तक 125.75 करोड़ का
ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला है कि साल 2018 से 2023 की अवधि के दौरान लगभग 119.53 करोड़ रुपए के फर्जी बिल नगर निगम में लगे। यह उन कामों के थे, जो कभी मैदान पर हुए ही नहीं।
इस फर्जी बिल के बदले में आरोपियों ने 86.54 करोड़ की राशि का भुगतान भी ले लिया। वहीं जांच में आया कि साल 2018 के पहले भी इस तरह के फर्जी बिल पेश हुए हैं, जिसके बदले में 6.22 करोड़ की राशि का भुगतान हुआ है।
ईडी की जांच में आया है कि अभी तक निगम में 125.75 करोड़ के फर्जी बिल लगे हैं और इसमें 92 करोड़ रुपए को भुगतान भी हो चुका है। ऐसे में ईडी को आशंका है कि सालों से चल रहे इस खेल में निगम के कई और अधिकारी-कर्मचारियों की लिप्तता होगी। इन सभी की जानकारी के लिए राठौर व ठेकेदारों को हिरासत में लिया है।
भोपाल की कमेटी ने कुछ नहीं किया: यह मामला तत्कालीन निगमायुक्त हर्षिका सिंह के फरवरी-मार्च 2024 के समय सामने आया और उन्होंने जांच शुरू कराई। बाद में निगमायुक्त शिवम वर्मा बने, उन्होंने इसमें बड़ी सख्ती दिखाते हुए 16 अप्रैल 2024 को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर कराई और मामला पुलिस को सौंपा।
फिर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इसमें जांच के लिए शासन स्तर पर पत्र लिखा। उच्च स्तरीय जांच कमेटी भी बनी और पीएस अमित राठौर भी 16 मई 2024 को इंदौर आए, लेकिन इसके बाद कमेटी की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई। जबकि कमेटी को 15 दिन में रिपोर्ट देना थी।
राठौर की अहम भूमिका : ईडी को जांच में यह भी पता चला कि अभय सिंह राठौर, जो उस समय सहायक अभियंता थे, इस घोटाले के प्रमुख षड्यंत्रकारियों में से एक थे। उन्होंने फर्जी कार्य आदेशों को तैयार करने और उन पर कार्रवाई करने में अहम भूमिका निभाई थी।
ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा ने अपनी कंपनियों के माध्यम से इंदौर नगर निगम के खजाने से फर्जी बिलों के बदले लगभग 71.78 करोड़ रुपए प्राप्त किए। उन्होंने धोखाधड़ी की रकम को षड्यंत्र में शामिल विभिन्न लोगों के बीच में बांटने में भूमिका निभाई।
693 बिलों में से केवल 204 ही सही
वहीं निगम की जांच में 13 एजेंसियों के साल 2010 से 2022 तक के 693 बिलों की पड़ताल की गई थी। इनमें से केवल 204 बिल सही पाए गए, जबकि 489 बिल फर्जी निकले।
20 करोड़ से शुरू हुआ था मामला
अप्रैल 2024 में यह पूरा सीवरेज/ ड्रेनेज घोटाला सामने आया था। इसमें शुरुआत में पांच ठेकेदार फर्म के 20 करोड़ के फर्जी बिल भुगतान का मुद्दा था। जांच में फिर 13 फर्मों को किए गए भुगतान की 693 फाइलें आई।
ये हैं आरोपी कंपनियां
आरोपी कंपनियों में ग्रीन कंस्ट्रक्शन, नींव कंस्ट्रक्शन, किंग कंस्ट्रक्शन, जाह्नवी एंटरप्राइजेस, क्षितिज एंटरप्राइजेस, क्रिस्टल एंटरप्राइजेस, ईश्वर एंटरप्राइजेस, कॉस्मो इंजीनियरिंग, डायमंड एसोसिएट्स, आरएस कंस्ट्रक्शन, एवन इंटरप्राइजेस आदि के नाम आए।
ये भी घोटाले में शामिल
इंजीनियर राठौर के साथ ही निगम के उपयंत्री उदय भदौरिया, कम्प्यूटर ऑपरेटर चेतन भदौरिया, बाबू मुरलीधर सहित आडिट विभाग व लेखा विभाग के कई लोगों के नाम भी सामने आए हैं।
आरोप-घोटाला 2 हजार करोड़ का
मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का आरोप है कि ये घोटाल कम से कम 2 हजार करोड़ का है। निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे भी यहीं कह रहे हैं। उनका ये भी आरोप है कि छोटा घोटाला बताकर इसे दबाने की कोशिश चल रही है।
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