50 साल से रजिस्ट्री को तरसते परिवार: जर्जर इमारतें डरा रहीं; हाउसिंग बोर्ड की अनदेखी प्रशासनिक फाइलों में कैद मालिकाना हक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) की कार्यप्रणाली पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंडल अध्यक्ष ओम जैन द्वारा आयोजित जनसुनवाई में कॉलोनियों और बहुमंजिला इमारतों की जो बदहाल स्थिति सामने आई, उसने बोर्ड के दावों की पोल खोल दी है।
सबसे चिंताजनक मामला विधानसभा क्षेत्र-5 के जगजीवन रामनगर का है, जहां करीब 50 वर्षों से 60 से 70 परिवार अपने घरों में निवासरत हैं, लेकिन उन्हें आज तक मालिकाना हक की रजिस्ट्री नहीं हो सकी है।
वर्ष 2018 में तत्कालीन अध्यक्ष कृष्णमुरारी मोघे द्वारा जारी परिपत्र भी इंदौर वृत्त कार्यालय और संपदा विभाग की फाइलों में दबकर रह गया है।
कॉलोनी के 12 भूखंडों पर अतिक्रमण की पुष्टि के बावजूद मंडल ने अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की है। जनप्रतिनिधियों का स्पष्ट मत है कि यदि समय रहते रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कर दी जाए, तो न केवल हजारों परिवारों को न्याय मिलेगा, बल्कि बोर्ड के खाली खजाने में भी करोड़ों का राजस्व जमा होगा।
नामांतरण की जटिल प्रक्रिया और भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी व्यवस्था
हाउसिंग बोर्ड की नामांतरण नीति गरीब और श्रमिक परिवारों के लिए बुरी सपना बन गई है। वर्ष 2012 से नामांतरण प्रक्रिया पर लगी रोक ने हजारों परिवारों को अपने ही घरों के मालिकाना हक से दूर कर दिया है। आज बढ़ते परिवारों के कारण कई लोगों को अपनी संपत्ति का आधा हिस्सा बेचना पड़ा, लेकिन खरीदार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
नामांतरण में मिलीभगत और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप
जनसुनवाई में प्रकाश शाही ने नेहरू नगर में नामांतरण में मिलीभगत और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए। वहीं, उमेश भाटिया ने बताया कि डी-4 एचआईजी कॉलोनी में 15 साल पहले पूर्ण भुगतान करने के बावजूद वे आज भी एनओसी के लिए भटक रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि सुनवाई के दौरान अध्यक्ष ओम जैन पूरे समय उपस्थित रहने के बजाय, इसे बीच में ही अपर आयुक्त एसके सुमन के भरोसे छोड़कर निजी कार्यक्रम में शामिल होने चले गए। इस दौरान अपर आयुक्त एस.के सुमन, उपायुक्त प्रबोध पराते, संपत्ति अधिकारी राजकुमार बसमेया और कार्यपालन यंत्री राजेश गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे, लेकिन समाधान के नाम पर केवल कोरे आश्वासन मिले।
स्थानांतरण की मांग, भ्रष्ट अधिकारियों की साठ-गांठ पर फूटा जनता का गुस्सा
जनसुनवाई में स्थानीय रहवासियों ने बोर्ड में जमे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के तत्काल स्थानांतरण की मांग उठाई है। रहवासियों का आरोप है कि एक ही स्थान पर सालों से जमे रहने के कारण अधिकारियों में मिलीभगत और भ्रष्टाचार पनप गया है, जिससे फाइलें अनावश्यक अटकी रहती हैं।
जनसुनवाई में 103 आवेदनों में से अधिकांश पर कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया। पीथमपुर के रहवासियों ने भी अपनी व्यथा सुनाई कि आवासीय क्षेत्र में दुकान संचालन करने पर उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं, जबकि वे नगर परिषद का टैक्स और हाउसिंग बोर्ड की लीज नियमित जमा कर रहे हैं।
बोर्ड की यह जनसुनवाई समस्याओं के निराकरण के बजाय केवल एक औपचारिक प्रक्रिया साबित हुई, जिससे पीड़ित आवेदकों का भरोसा लेकर आए थे आश्वासन लेकर गए है।
समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन
इस मामले में पूर्व पार्षद चंदू शिंदे ने कहा कि नेहरू नगर में 17 बहुमंजिला इमारतें स्थित हैं, जो वर्तमान में बेहद जर्जर अवस्था में हैं। इन इमारतों की स्थिति ऐसी है कि कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मैंने मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन से मुलाकात की है।
उन्होंने इस समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है। इस संबंध में एक समझौता भी तैयार हुआ है, जिसके अनुसार जब तक इन इमारतों में रहने वाले निवासियों को दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं किया जाता, तब तक उन्हें कलेक्टर गाइडलाइन के अनुरूप मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल द्वारा किराया प्रदान किया जाएगा।
यह किराया तब तक दिया जाएगा, जब तक उनके नए मकान बनकर तैयार नहीं हो जाते। अध्यक्ष ओम जैन ने शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने, जर्जर इमारतों को ध्वस्त करने और निर्माण कार्य प्रारंभ करने का आश्वासन दिया है। इस क्षेत्र में लगभग 408 परिवार निवासरत हैं, जो इन निर्माण कार्यों से सीधे प्रभावित होंगे।
इन निवासियों के लिए मैंने वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर ली है। परियोजना के लिए तीन साल की समय सीमा निर्धारित की गई है। कार्य पूर्ण होने के पश्चात, जो परिवार वहां पहले से रह रहे थे, उन्हें ही नई इमारतों में रहने के लिए पहली प्राथमिकता दी जाएगी।
मौत का जाल बने घर, टेंडर के बाद भी काम शुरू करने में बोर्ड नाकाम
नेहरू नगर, एलआईजी, खजरानी की बहुमंजिला इमारतें अब काल का ग्रास बनती जा रही हैं। विगत 10 वर्षों से इन इमारतों को तोड़कर नई हाईराइज बिल्डिंग बनाने की कवायद चल रही है, जिसमें 75 प्रतिशत रहवासियों की सहमति और शासन का अनुमोदन भी प्राप्त हो चुका है, फिर भी निर्माण कार्य ठप पड़ा है।
नगर निगम द्वारा जर्जर घोषित किए जाने के बावजूद बोर्ड की निष्क्रियता हजारों लोगों की जान जोखिम में डाल रही है। इमारत नंबर-11 की रहवासी पूजा तावड़े ने बताया कि 13 मार्च 2023 से लेकर अब तक बोर्ड, निगम और कलेक्टर कार्यालय में अनगिनत गुहार लगाई जा चुकी है। दिसंबर 2023 में टेंडर पास होने के बाद भी काम शुरू न करना प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है।
हादसे की जिम्मेदारी हाउसिंग बोर्ड की होगी
जनसुनवाई में जब सवाल उठे, तो अध्यक्ष ओम जैन ने स्वीकार किया कि यदि कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी हाउसिंग बोर्ड की होगी। इस स्थिति को सुधारने के लिए चंदूराव शिंदे, अनिल सोनवणे और मुकेश वक्ते जैसे जनप्रतिनिधियों ने अध्यक्ष से तत्काल मौका मुआयना कर निर्माण कार्य शुरू करवाने की मांग की है।
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