आय से अधिक संपत्ति मामले में वन विभाग के इस पूर्व अधिकारी को राहत: लोकायुक्त ने जांच के बाद कोर्ट में पेश किया खात्मा; जांच प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों में वर्षों तक जांच के दायरे में रहे वन विभाग के तत्कालीन एसडीओ आर.एन. सक्सेना को लोकायुक्त ने राहत दे दी है। विस्तृत जांच के बाद लोकायुक्त ने विशेष न्यायालय में खात्मा (क्लोजर रिपोर्ट) पेश किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही सक्सेना के खिलाफ चल रहा आय से अधिक संपत्ति का मामला समाप्त हो गया।
हालांकि इस फैसले के बाद लोकायुक्त की जांच प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इससे पहले रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी संजय चौधरी को भी इसी तरह के मामले में क्लीन चिट मिल चुकी है।
2018 में पड़ा था लोकायुक्त का छापा
आर.एन. सक्सेना के खिलाफ जून 2018 में अधिवक्ता यूएस वर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सक्सेना लंबे समय से इंदौर में पदस्थ रहते हुए भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि सक्सेना मार्च 2018 में शहर में घुसे तेंदुए को पकड़ने के दौरान हमले में घायल हो गए थे।
प्रारंभिक जांच में शिकायत के तथ्यों को सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त ने दिसंबर 2018 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और एक साथ कई स्थानों पर छापेमार कार्रवाई की थी।
छापे में मिली थी करोड़ों की संपत्ति
तत्कालीन लोकायुक्त अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई में सक्सेना से जुड़े कई दस्तावेज और संपत्तियों की जानकारी सामने आई थी। जांच के दौरान दो छात्रावासों के दस्तावेज, सात भूखंडों के कागजात, एक फैक्ट्री से जुड़े रिकॉर्ड, नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, बैंक खातों का विवरण तथा अन्य मूल्यवान संपत्तियां मिली थीं।
उस समय लोकायुक्त ने दावा किया था कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सक्सेना के पास आय से अधिक संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक मूल्यांकन में यह संपत्ति तीन करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी।
रिश्तेदारों की संपत्ति अलग होने से बदला आकलन
बाद की विस्तृत जांच में लोकायुक्त ने पाया कि प्रारंभिक गणना में सक्सेना के ससुराल पक्ष और अन्य रिश्तेदारों के नाम दर्ज संपत्तियों को भी उनकी संपत्ति मानकर जोड़ लिया गया था। लोकायुक्त की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार जांच में यह सामने आया कि संबंधित संपत्तियां उनके रिश्तेदारों की थीं और वैध आय स्रोतों से अर्जित की गई थीं। इसके बाद संपत्तियों का दोबारा मूल्यांकन किया गया।
जांच रिपोर्ट में बताया गया कि दिसंबर 1982 से दिसंबर 2018 तक की सेवा अवधि में सक्सेना की कुल वैध आय लगभग 3.27 करोड़ रुपये रही, जबकि इसी अवधि में उनका कुल व्यय लगभग 3.03 करोड़ रुपये पाया गया। इस प्रकार आय की तुलना में खर्च कम पाया गया और आय से अधिक संपत्ति का मामला नहीं बन सका।
शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल
मामले के शिकायतकर्ता अधिवक्ता यूएस वर्मा ने लोकायुक्त की क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने अदालत में कहा कि जांच के दौरान कुछ संपत्तियों का विक्रय किया गया और कई वित्तीय लेन-देन की गहराई से पड़ताल नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि लोकायुक्त की प्रारंभिक कार्रवाई और अंतिम निष्कर्षों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
अदालत ने मंजूर किया खात्मा
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश डॉ. अकबर शेख ने लोकायुक्त की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इसके साथ ही आर.एन. सक्सेना के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला समाप्त हो गया।
पहले संजय चौधरी को भी मिली थी राहत
गौरतलब है कि इससे पहले रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी संजय चौधरी को भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त द्वारा क्लीन चिट दी जा चुकी है। उस मामले में भी जांच के बाद लोकायुक्त ने अदालत को बताया था कि संबंधित संपत्तियां और आय वैध स्रोतों से अर्जित की गई थीं तथा खर्च आय से कम पाया गया था। आर.एन. सक्सेना मामले में अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर लोकायुक्त की जांच पद्धति और प्रारंभिक कार्रवाई बनाम अंतिम निष्कर्षों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
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