बुजुर्ग महिला से 17 लाख की ठगी: मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी देकर की; पांच माह बाद रिपोर्ट दर्ज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को ऑनलाइन ठगी का गंभीर मामला दर्ज किया है, जिसमें ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर एक 61 वर्षीय महिला से करीब 17 लाख रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। यह घटना जुलाई 2025 की है, लेकिन बदनामी और डर के कारण महिला लंबे समय तक पुलिस के पास नहीं पहुंच सकी।
महिला को डराया और भ्रमित किया
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि महिला को तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन कॉल आए थे। ठगों ने खुद को पहले टेलीकॉम अधिकारी, फिर पुलिस और बाद में सीबीआई अधिकारी बताकर महिला को डराया और भ्रमित किया।
पहले कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम ब्रजेश कुमार बताया और खुद को एक टेलीकॉम कंपनी का अधिकारी बताया। उसने कहा कि महिला के नाम से दूसरी सिम जारी हुई है, जिसका उपयोग संदिग्ध लेन-देन में किया जा रहा है।
फर्जी इंस्पेक्टर बनकर डराया
जब महिला ने इन आरोपों से इनकार किया, तो आरोपी ने कहा कि मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज है और उसे तुरंत मुंबई आना होगा। इसके कुछ ही देर बाद महिला को व्हाट्सऐप कॉल आया।
इस बार कॉल करने वाली महिला ने खुद को कोलाबा थाने की इंस्पेक्टर आरती बताया। उसने कहा कि कथित सिम कार्ड से मनी लॉन्ड्रिंग और तस्करी से जुड़ा पैसा बैंक खातों में जमा कराया गया है। आरोपी ने वारंट जारी होने की बात कहकर महिला को भयभीत किया और खाते की जांच के नाम पर कॉल काट दिया।
सीबीआई इंस्पेक्टर ‘दया नायक’ बनकर की ठगी
कुछ देर बाद तीसरा कॉल आया। कॉलर ने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर दया नायक बताया और कहा कि महिला मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गंभीर रूप से फंस चुकी है। उसने यह भी कहा कि यदि वह जांच में सहयोग करेगी, तो उसे बचा लिया जाएगा।
ठग ने महिला को परिवार को कुछ भी न बताने की सख्त हिदायत दी और बैंक खातों, संपत्ति व जमा राशि की पूरी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद जांच प्रक्रिया का हवाला देकर अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया।
पांच दिन में पांच ट्रांजेक्शन
ठगों के झांसे में आकर महिला ने पांच बार में कुल 17 लाख रुपये उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि 48 से 72 घंटे के भीतर पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
जुलाई 2025 में की गई ट्रांसफर राशि
4 जुलाई: 3 लाख
5 जुलाई: 4 लाख
10 जुलाई: 5 लाख
15 जुलाई: 2 लाख
17 जुलाई: 3 लाख
नंबर बंद होने पर हुआ शक
कुछ दिनों बाद जब महिला ने संबंधित मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी नंबर बंद मिले। इसके बाद महिला को ठगी का अहसास हुआ, लेकिन बदनामी और डर के चलते उसने किसी को कुछ नहीं बताया।
दर्ज हुई एफआईआर
बाद में परिजनों ने जब महिला के बैंक खातों की जांच की, तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद परिजनों ने महिला को समझाया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए तैयार किया। मंगलवार को महिला परिजनों के साथ इंदौर क्राइम ब्रांच पहुंची, जहां मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
एडिशनल डीसीपी बोले-“डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं”
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि पुलिस पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती और न ही पुलिस या जांच एजेंसियां फोन पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
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