कचरे से होगी कमाई: शहरों में लगेंगे प्लांट; रोज इतनी टन गैस बनेगी, स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा स्रोत बनेगा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट,भोपाल।
मध्यप्रदेश में अब कचरा सिर्फ निपटान की समस्या नहीं रहेगा, बल्कि कमाई और स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा स्रोत बनेगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
प्रतिदिन 1055 टन ठोस कचरे का होगा प्रसंस्करण
करीब 282.44 करोड़ रुपए से बनने वाले प्लांटों में प्रतिदिन 1055 टन ठोस कचरे का प्रसंस्करण होगा, जिससे लगभग 40 टन बायोगैस तैयार होगी। यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी ) मॉडल पर विकसित की जा रही है।
8 शहरों में लगेंगे अत्याधुनिक प्लांट
योजना के तहत देवास, रतलाम, मुरैना, बुरहानपुर, खंडवा, उज्जैन, ग्वालियर और सागर में CBG प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इनमें ग्वालियर का प्लांट सबसे बड़ा होगा, जिसकी क्षमता 350 टन प्रतिदिन कचरा प्रोसेस करने की होगी।
प्लांटों की प्रस्तावित क्षमता के अनुसार देवास 100 टीडीपी, रतलाम 90 टीडीपी, मुरैना-बानमोर 75 टीडीपी, बुरहानपुर-शाहपुर 75 टीडीपी, खंडवा-छनेरा 75 टीडीपी, उज्जैन 175 टीडीपी, ग्वालियर 350 टीडीपी, सागर 115 टीडीपी है।
क्लस्टर और स्वतंत्र मॉडल पर होंगे प्रोजेक्ट
परियोजना के तहत चार प्लांट क्लस्टर मॉडल पर संचालित होंगे, जहां आसपास के कई नगरीय निकायों का कचरा एक ही प्लांट में प्रोसेस किया जाएगा। इनमें मुरैना, बुरहानपुर, खंडवा और सागर शामिल हैं।
वहीं देवास, रतलाम, उज्जैन और ग्वालियर में स्वतंत्र परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जहां केवल संबंधित शहर का कचरा उपयोग किया जाएगा।
पीपीपी मॉडल पर होगा संचालन
सभी परियोजनाएं डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल पर विकसित होंगी। इसमें निजी कंपनियां प्लांट का निर्माण, वित्तपोषण और संचालन करेंगी, जबकि नगरीय निकाय कचरा संग्रहण और परिवहन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इस मॉडल से सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा और आधुनिक तकनीक का लाभ भी मिलेगा।
कचरे से बनेगी गैस, घटेगा लैंडफिल का दबाव
इन प्लांटों के शुरू होने से शहरों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत होगी। लैंडफिल साइटों पर दबाव कम होगा और जैविक कचरे से स्वच्छ ऊर्जा तैयार की जा सकेगी।
सीबीजी का उपयोग सीएनजीकी तरह वाहनों में ईंधन के रूप में किया जा सकेगा। इसके अलावा प्लांट से निकलने वाले कंपोस्ट और RDF (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) का व्यावसायिक उपयोग कर अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।
पांच परियोजनाओं पर शुरू हो चुका काम
देवास, रतलाम, मुरैना, बुरहानपुर और खंडवा के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और परियोजनाओं पर काम शुरू किया जा रहा है। वहीं उज्जैन, ग्वालियर और सागर में टेंडर दस्तावेजों में संशोधन के बाद प्रक्रिया जारी है।
टेंडर स्वीकृत होने के बाद निर्माण के लिए लगभग 8 महीने और कमीशनिंग के लिए 12 महीने का समय निर्धारित किया गया है। सफल परीक्षण के बाद दो महीने में प्लांटों का संचालन शुरू हो सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच तेज हुआ कचरा प्रबंधन अभियान
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने भी कचरा निपटान की योजनाओं को गति दी है। कोर्ट ने निगरानी के लिए छह सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी गठित की है और राज्यों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों को भी कचरा प्रबंधन, निगरानी और अवैध डंपिंग स्थलों की पहचान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
स्वच्छता के साथ रोजगार और राजस्व का नया मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीजी प्लांट न केवल कचरा प्रबंधन की समस्या का समाधान करेंगे, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, रोजगार सृजन और नगरीय निकायों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। प्रदेश में पहली बार कचरे को बड़े पैमाने पर आर्थिक संसाधन में बदलने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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