डॉग स्टरलाइजेशन घोटाला: सैकड़ों कुत्तों की नसबंदी में फर्जी एफिडेविट का खेल; इस अधिकारी पर केस दर्ज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
ग्वालियर नगर निगम के आवारा श्वान नसबंदी (डॉग स्टरलाइजेशन) प्रोजेक्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। वर्ष 2022 में संचालित एबीसी ( एनिमल बर्थ कंट्रोल) प्रोजेक्ट के दौरान 656 कुत्तों की नसबंदी से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर फर्जी शपथ-पत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत किए जाने के मामले का खुलासा हुआ है। जांच के बाद पड़ाव थाना पुलिस ने पशु चिकित्सक डॉ. रविरमन शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का मामला दर्ज कर लिया है।
नोडल अधिकारी की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर
पड़ाव थाने में पदस्थ उप निरीक्षक रोहित चौधरी के अनुसार, नगर निगम के एबीसी प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी केशव सिंह चौहान ने 12 जून 2026 को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में शासकीय रिकॉर्ड में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर नगर निगम को गुमराह करने का आरोप लगाया गया।प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
656 श्वानों की नसबंदी से जुड़ा मामला
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2022 में आवारा श्वानों की नसबंदी का कार्य छत्तीसगढ़ स्थित संस्था एनिमल केयर फाउंडेशन को सौंपा गया था।संस्था ने दावा किया था कि 1 मार्च 2022 से 30 अप्रैल 2022 के बीच कुल 656 श्वानों की नसबंदी की गई।
नियमों का उल्लंघन
नियमों के अनुसार नसबंदी के बाद श्वानों को उसी स्थान पर छोड़ा जाना अनिवार्य होता है, जिसकी पुष्टि के लिए संबंधित पशु चिकित्सक को शपथ-पत्र प्रस्तुत करना पड़ता है।
जांच में खुला फर्जीवाड़े का राज
नगर निगम को प्राप्त शिकायत के बाद संस्था से स्पष्टीकरण मांगा गया। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया। संस्था ने स्वीकार किया कि उस समय एबीसी सेंटर में नियुक्त पशु चिकित्सक डॉ. रविरमन शर्मा थे।
शपथ-पत्र में दूसरे का नाम
स्टाम्प पेपर भी उन्होंने ही खरीदा था और उस पर हस्ताक्षर भी उन्हीं के थे। लेकिन नगर निगम में जमा किए गए शपथ-पत्र में पशु चिकित्सक के रूप में डॉ. राघव पाराशर का नाम दर्ज था। यहीं से पूरे मामले का खुलासा हुआ और यह सामने आया कि एक डॉक्टर के नाम का इस्तेमाल कर दूसरे व्यक्ति द्वारा शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया।
नगर निगम को गुमराह करने का आरोप
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि दस्तावेजों में नाम और हस्ताक्षर संबंधी विसंगतियां जानबूझकर की गई प्रतीत होती हैं। इससे नगर निगम प्रशासन को गुमराह करने और सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी प्रस्तुत करने की आशंका बनी। मामले को गंभीर मानते हुए नगर निगम ने पुलिस कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में केस
नोडल अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी पशु चिकित्सक के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका उपयोग करने और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
अन्य लोगों की भूमिका की भी होगी जांच
पड़ाव थाना प्रभारी शैलेंद्र भार्गव ने बताया कि नगर निगम में जमा मूल स्टाम्प पेपर और अन्य दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं। आरोपी से पूछताछ के बाद मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
जांच के दायरे में पूरी प्रक्रिया
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी एफिडेविट सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए बनाया गया था या फिर इसके पीछे किसी बड़े वित्तीय या प्रशासनिक लाभ का उद्देश्य था। यदि जांच में अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो मामले में और भी लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
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