इस स्कीम से मुक्ति की मांग तेज: 20 साल से इंतजार; इतने करोड़ जमा करने के बाद भी नहीं मिली राहत, रहवासियों ने कॉलोनी में लगाए विरोध के पोस्टर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण ( आईडीए) की स्कीम-171 से मुक्ति की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। करीब 20 वर्षों से इस योजना में फंसे हजारों प्लॉटधारकों और दर्जनभर गृह निर्माण सहकारी समितियों के सदस्यों ने कॉलोनी में विरोध स्वरूप पोस्टर लगाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।
रहवासियों का कहना है कि विकास शुल्क के रूप में 5.84 करोड़ रुपए जमा करने के बावजूद उन्हें अब तक स्कीम से मुक्त नहीं किया गया है, जिससे वे अपने प्लॉट पर निर्माण भी नहीं कर पा रहे हैं।
पोस्टरों के जरिए जताया विरोध
रहवासियों ने कॉलोनी में पोस्टर लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। पोस्टरों पर लिखा है- 'हे राम! इंतजार के 20 साल... हमारा कसूर क्या है? निर्माण की अनुमति कब मिलेगी?' रहवासियों का कहना है कि शासन के नियमों का पालन करने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 1993 में हुई, जब आईडीए ने 13 गृह निर्माण सहकारी समितियों की जमीन और आसपास की सरकारी भूमि को मिलाकर स्कीम-132 घोषित की थी। इस योजना का विरोध हुआ और बाद में 2007 में हाईकोर्ट ने इसे निरस्त (लैप्स) कर दिया।
इसके बाद 2009 में उसी क्षेत्र के लिए स्कीम-171 लागू की गई। हालांकि, इस योजना में भी विकास कार्य आगे नहीं बढ़ सके। न तो प्रभावित लोगों को मुआवजा मिला और न ही उन्हें अपने प्लॉट पर निर्माण की अनुमति मिल सकी।
विकास शुल्क जमा, फिर भी राहत नहीं
राज्य सरकार ने बाद में निर्णय लिया था कि जिन योजनाओं में 10 प्रतिशत से कम विकास कार्य हुए हैं, उन्हें निर्धारित विकास शुल्क लेकर मुक्त किया जा सकता है। इसी के तहत जुलाई 2021 में आईडीए बोर्ड ने प्रस्ताव पारित किया और विकास शुल्क तय किया गया।
रहवासियों के अनुसार उन्होंने अक्टूबर 2024 में करीब 5.84 करोड़ रुपये विकास शुल्क के रूप में जमा भी कर दिए, लेकिन इसके बाद भी स्कीम को मुक्त नहीं किया गया।
भू-माफियाओं की गतिविधियां भी बनीं चिंता
रहवासियों का कहना है कि वर्षों तक योजना लंबित रहने के कारण क्षेत्र में भू-माफियाओं ने भी सक्रियता दिखाई। तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह के कार्यकाल में कई अवैध कब्जे हटाए गए और कार्रवाई की गई, लेकिन स्कीम का समाधान अब तक नहीं हो पाया।
सीएम ने दिया था समाधान का भरोसा
20 जून को इंदौर दौरे पर आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने विधायक महेंद्र हार्डिया ने स्कीम-171 का मुद्दा उठाया था। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से आश्वासन दिया था कि रहवासियों की समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।
15 दिन बाद भी नहीं बढ़ी प्रक्रिया
रहवासियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद अब तक आईडीए स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई है। न कोई बैठक हुई और न ही स्कीम को मुक्त करने की दिशा में कोई आधिकारिक निर्णय सामने आया है।
रहवासियों का कहना है कि उन्होंने शासन द्वारा निर्धारित सभी शर्तें पूरी कर दी हैं। अब वे केवल अपने प्लॉट पर निर्माण की अनुमति और स्कीम-171 से स्थायी मुक्ति चाहते हैं। उनके मुताबिक, यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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