पटवारी को पांच करोड़ का मानहानि नोटिस: शिकारी खुद शिकार हो गया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
उज्जैन भूमिकांड को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को घेरने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बड़ी जतन, मेहनत और ताकत से जो जाल बिछाया, उसमें वह खुद फंसते नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री को राजनीतिक शिकार बनाने के लिए हाका लगाकर मचान बनाया और आरोपों के कारतूस दागे। हालांकि, उनका निशाना मुख्यमंत्री नहीं बने, बल्कि पटवारी खुद ही शिकार हो गए। उनके सारे कारतूस खाली, यानी बिना बारूद वाले निकले।
इसी कारण कहा जा रहा है कि पटवारी अपने ही बनाए जाल में बुरी तरह उलझ गए हैं। पटवारी ने अपने वॉर रूम से राजनीतिक आरोपों की "ड्रोन मिसाइल" मुख्यमंत्री पर दागी थी, लेकिन वह निशाने पर लगने के बजाय खुद पटवारी के वॉर रूम पर ही आ गिरी।
पटवारी ने मीडिया, कांग्रेस हाईकमान और भाजपा के असंतुष्ट नेताओं के समक्ष पूरी ताकत से जो प्रमुख आरोप लगाए थे, वे अब मुख्यमंत्री की राजनीति के कारण उन्हीं पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं। वह अपनी ही पार्टी में घिरते नजर आ रहे हैं।
पहले दिग्विजय सिंह, फिर अरुण यादव और अन्य नेताओं ने भी उन्हें खुलकर समर्थन देने के बजाय परोक्ष रूप से घेरने की कोशिश की, ऐसा माना जा रहा है। इसके बाद अब मुख्यमंत्री खेमे ने पटवारी को मानहानि का नोटिस भेजते हुए सार्वजनिक माफी मांगने को कहा है।
पटवारी पर मुख्यमंत्री खेमे की ओर से लगातार जवाबी हमले किए जा रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री पर किए जा रहे राजनीतिक हमले अब लगभग शून्य होते नजर आ रहे हैं।
कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने ऐसी राजनीतिक बिसात बिछाई कि पटवारी शिकार करने के बजाय स्वयं ही शिकार हो गए। पूरे घटनाक्रम पर यह फिल्मी गीत सटीक बैठता नजर आता है क्या गजब हुआ... क्या सितम हुआ... न जाने तू, न जाने हम...शिकारी खुद यहां शिकार हो गया... प्रदेश की राजनीति में इन दिनों राजनीतिक घटनाक्रम कुछ इसी फिल्मी गीत के भाव जैसा दिखाई दे रहा है।
जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को घेरने के लिए वीर भारत न्यास को करीब 500 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन एक रुपए की लीज पर देने का आरोप लगाया।
राजनीतिक निशाना साफ था मुख्यमंत्री को भूमि विवाद में घेरना। लेकिन कुछ ही दिनों में राजनीतिक पटकथा पलटती दिखाई दी।
वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से जीतू पटवारी को पांच करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेज दिया गया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई।
अब चर्चा इस बात की है कि जो हमला मुख्यमंत्री पर केंद्रित था, उसका जवाब सीधे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंच गया।
मानहानि नोटिस : आरोप और मांग
वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी ने जीतू पटवारी को पांच करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने दिल्ली की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना पर्याप्त तथ्य और प्रमाण के वीर भारत न्यास तथा श्रीराम तिवारी की व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने वाले गंभीर आरोप लगाए।
नोटिस में कहा गया है कि पटवारी ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यास में 500 करोड़ रुपए के कथित घोटाले और एक रुपए की लीज से जुड़ी भ्रामक एवं मानहानिकारक बातें सार्वजनिक रूप से कही हैं।
तिवारी का दावा है वीर भारत न्यास विधिवत पंजीकृत सार्वजनिक न्यास है और उसके सभी कार्य कानून के अनुसार किए गए हैं। नोटिस के माध्यम से जीतू पटवारी से तीन दिन में अपने बयानों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने और मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।
ऐसा नहीं करने पर पांच करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी गई है।
मुख्यमंत्री खेमे का प्रभावी पलटवार... राजनीतिक गलियारों में इसे मुख्यमंत्री खेमे के प्रभावी पलटवार के रूप में भी देखा जा रहा है। चर्चा है कि कांग्रेस के भीतर पहले से चल रही खींचतान के बीच यह घटनाक्रम जीतू पटवारी के लिए नई राजनीतिक असहजता लेकर आया है।
अब विपक्ष के हमले से ज्यादा मानहानि नोटिस और उसके संभावित कानूनी परिणाम चर्चा का विषय बन गए हैं। फिलहाल यह मामला अदालत और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में जा सकता है।
ऐसे में आरोप और जवाब दोनों की सत्यता का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इतना जरूर कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री को घेरने निकले जीतू पटवारी फिलहाल खुद बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं।
यानी राजनीति के इस दौर में कहानी कुछ ऐसी बन गई है कि शिकारी खुद शिकार हो गया!
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