मौत की झपकी: राजस्थान के दौसा में ऋषिकेश से इंदौर आ रही हंस ट्रेवल्स की बस ट्रेलर से भिड़ी
KHULASA FIRST
संवाददाता

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर तड़के हुआ दर्दनाक हादसा, छह जिंदा जल मरे, तो सिर में चोट आने से दो की मौत
बड़ी मात्रा में सिगरेट से भरे कार्टन रखे थे, सामान से ओवरलोड थी बस
नहीं खुला इमरजेंसी गेट, देर से पहुंचा रेस्क्यू या सुरक्षा में बड़ी चूक...आखिर आठ मौतों का जिम्मेदार कौन?
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजस्थान के दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर तड़के दर्दनाक हादसा हो गया। ड्राइवर को झपकी लगने से ऋषिकेश से इंदौर आ रही हंस ट्रेवल्स की एसी स्लीपर बस आगे चल रहे ट्रेलर में जा घुसी और कुछ ही सेकंड में आग की लपटों ने पूरी बस को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
बस के भीतर सो रहे यात्री चीखते रहे, मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन आग उनसे कहीं ज्यादा तेज निकली। आठ लोगों की मौत हो गई, जिनमें छह यात्री जिंदा जल गए, जबकि दो ने गंभीर सिर की चोटों के कारण दम तोड़ दिया। कई यात्री गंभीर रूप से झुलसे हैं और कुछ यात्रियों का देर तक पता नहीं चल सका।
बताते हैं बस में बड़ी मात्रा में सिगरेट से भरे कार्टन रखे थे। सामान भी ओवरलोड था। ये बस हादसा महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का भयावह चेहरा बनकर सामने आया है।
हादसे का सबसे दुखद पहलू ये कि घायल होकर गिरे यात्रियों पर चढ़कर कई यात्रियों ने अपनी जान बचाई। चूंकि बस का इमरजेंसी गेट नहीं खुला था और रेस्क्यू दल देर से मौके पर पहुंचा था। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि आखिर आठ मौतों का जिम्मेदार कौन है?
बस चालक को झपकी आने से हादसा- जानकारी के अनुसार हादसा रात करीब ढाई बजे दौसा जिले के कोलवा थाना क्षेत्र स्थित तनावड़ जीरो पॉइंट पर हुआ। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि बस चालक को झपकी आने से तेज रफ्तार बस सीधे ट्रेलर में जा टकराई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि बस और ट्रेलर दोनों आग के गोले में बदल गए। आग बुझने में करीब एक घंटा लगा और तीन घंटे बाद तक बस के भीतर जांच संभव नहीं हो सकी। जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक अंदर सब्रकुछ राख हो चुका था।
लेकिन इस हादसे ने सबसे बड़ा सवाल राहत और बचाव व्यवस्था पर खड़ा कर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों और बचे यात्रियों का दावा है कि हादसे की सूचना तुरंत पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग और एक्सप्रेसवे प्रबंधन को दे दी गई थी, फिर भी फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस काफी देर से मौके पर पहुंचीं।
नशे में थे, ड्राइवर-कंडक्टर
स्कीम 78 निवासी ईशा सिंह, भाई प्रदीप सिंह पंवार, महक मोहाने, कनक मोहाने और मुस्कान गोसर के साथ 18 जून को चार धाम यात्रा पर निकले थे। यात्रा पूरी होने पर कल ऋषिकेश से इंदौर आ रहे थे। हंस ट्रैवल्स की बस में बैठे। रास्ते में बस का चालक और कंडक्टर ने बस में शराब पी।
यह देखकर हम लोगों ने उन्हें टोका, लेकिन वह नहीं माने और आखिरकार वही हुआ जिसका डर था। सौभाग्य से हम लोग हादसे में सकुशल बच गए। हालांकि हमारे मोबाइल फोन और सामान आग की भेंट चढ़ गया। सुबह हमने दौसा से प्राइवेट चार पहिया वाहन किया और इंदौर के लिए निकल गए। मृत लोगों के साथ हमारी सांत्वना है।
13 घायलों की हालत गंभीर
कई लोगों का कहना है कि यदि राहत दल समय पर पहुंच जाता तो मौत का आंकड़ा बड़ा नहीं होता। दौसा जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार 13 घायल गंभीर हैं। ट्रेलर चालक और खलासी भी गंभीर हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बस की डिक्की में सिगरेट के पैकेटों से भरे बॉक्स रखे थे, जिससे आग तेजी से फैल गई। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों दावों की जांच की जा रही है।
रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ होगी। दौसा की जिला कलेक्टर सौम्या झा ने पूरे हादसे की जांच के लिए आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी है। टीम को जल्द से जल्द जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं। टीम ड्राइवर की भूमिका, बस की फिटनेस, इमरजेंसी गेट, आग लगने की वजह, रेस्क्यू में हुई देरी और एक्सप्रेसवे की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जांच करेगी।
सांसद-विधायक ने खड़े किए सवाल... हादसे के बाद बस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा ने कहा कि हादसे में 8 लोगों की मौत हुई है और 11 लोग गंभीर हैं। तेज रफ्तार के कारण ऐसे हादसे हो रहे हैं।
एसी बसों में इस तरह की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। सरकार को इस दिशा में काम करना चाहिए। दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने दावा किया कि आग लगने के बाद बस का इमरजेंसी गेट नहीं खुला, जिसके कारण कई यात्री बाहर नहीं आ सके।
राज्यपाल ने भी शोक व्यक्त किया... राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस पर हुए भीषण सड़क हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
सबसे बड़ा सवाल
आठ लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन हादसा अब सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का मामला बन गया है। जांच रिपोर्ट आने में समय लगेगा, मगर जलती बस और मदद का इंतजार करते यात्रियों की चीखें कई ऐसे सवाल छोड़ गई हैं, जिनका जवाब अब प्रशासन, परिवहन विभाग और एक्सप्रेसवे प्रबंधन तीनों को देना होगा।
आग का गोला बन गई बस
धार के सुवासरा निवासी योगिनी ने खुलासा फर्स्ट को बताया कि वह हरिद्वार से लौट रही थी। हादसे के समय गहरी नींद में थी। अचानक जोरदार धमाके की आवाज से नींद खुली। आंख खुलते ही देखा तो बस में चीख-पुकार मची थी और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था।
मैं किसी तरह लोगों के ऊपर चढ़ते हुए बस से बाहर निकली। इसके कुछ ही सेकंड बाद जोरदार धमाका हुआ और पूरी बस आग का गोला बन गई। अगर थोड़ी देर और हो जाती तो शायद मैं भी जिंदा नहीं बचती।
कौन देगा इन सवालों के जवाब?
क्या चालक की झपकी ने आठ लोगों की जान ली?
क्या इमरजेंसी गेट ने काम किया होता तो लोग बच सकते थे?
क्या फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस समय पर पहुंचतीं तो मौत का आंकड़ा कम होता?
क्या एक्सप्रेसवे की इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्यवस्था सिर्फ कागजों में है?
अगर बस में ज्वलनशील सामान था तो उसकी जांच पहले क्यों नहीं हुई?
और सबसे बड़ा सवाल... आधुनिक कहलाने वाले एक्सप्रेसवे पर आखिर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
दो बहनें गंभीर, एक अभी भी लापता
पिछले शनिवार को ही तीन बहनें भूमि भोर (20) मेघदूत नगर, ममेरी बहन दिशा पिता संजय केसरी (21) निवासी अंबे नगर, चचेरी बहन लीजा पिता महेश भोर (25) निवासी सांई श्रद्धा कॉलोनी (बर्फानी धाम) अपने दोस्तों के साथ मसूरी, हरिद्वार और ऋषिकेश घूमने गए थे।
प्राइवेट नौकरी करने वाले पिता भारत भोर को अलसुबह जैसे ही हादसे की सूचना मिली वे दौसा के लिए निकल गए। वहीं, हादसे की सूचना लगने के बाद से ही भूमि के दादा प्रदीप भोर और दादी गंगा भोर का रो-रोकर बुरा हाल है। छोटे भाई दक्ष भोर ने बताया कि एलएनसीटी कॉलेज में पढ़ाई करने वाली बहन भूमि का पता नहीं चला है, लीजा और दिशा गंभीर घायल हैं।
ये 13 यात्री गंभीर घायल
1. याचिका (7), पिता दीपक तंवर, निवासी ओंकारेश्वर के पास, इंदौर
2. नेहा (26), निवासी ओंकारेश्वर के पास, इंदौर
3. दिशा (19), पिता संजय, निवासी नंदा नगर, इंदौर
4. सुवानंद (25), पिता राजेश, निवासी सुदामा नगर, इंदौर
5. प्रदीप (26), पिता नरेंद्र, निवासी इंदौर
6. महक (22), पिता महेश, निवासी इंदौर
7. योगानी (21), पिता सेलेन्द्र, निवासी इंदौर
8. जितेंद्र पांडे (45), निवासी दशहरा मैदान, पटेल कॉलोनी
9. अभिनव पांडे (13), पिता जितेंद्र पांडे, निवासी दशहरा मैदान, पटेल कॉलोनी
10. विशुलाल (65), पिता बलवंत सिंह, निवासी भिलसेड़ी, मध्य प्रदेश
11. शिखा (31), निवासी नीम का थाना, सीकर (राजस्थान)
12. चंद्रप्रकाश (66), पिता हीरालाल, निवासी डबरा, मध्य प्रदेश
13. दिव्या (25), पिता दीपक, निवासी बड़वाह, मध्य प्रदेश
चार यात्री अब भी लापता
निर्मला पति चंद्रप्रकाश, निवासी इंदौर
प्रियंका (33) पति जितेंद्र पांडे, निवासी बड़वाह
भूमि (20) पिता भारत भोर, निवासी बजरंग नगर, इंदौर
दीपू (60) पिता नरवत सिंह, निवासी रामपुरा कला, सीहोर (मध्य प्रदेश)
मैं बच गया, लेकिन पत्नी का पैर सीट में फंस गया
पत्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता निवासी गोपुर चौराहा भी पत्नी निर्मला के साथ चारधाम यात्रा पर गए थे। आग लगने के बाद बस धुएं से भर गई। उनकी पत्नी का पैर सीट में फंस गया था। वह बेहोश हो गई थी। करीब एक घंटे तक कोई सरकारी सहायता मौके पर नहीं पहुंची।
लोग बस के अंदर तड़पते रहे और बाहर खड़े लोग बेबसी से सब कुछ देखते रहे। पुणे में प्रालि कंपनी में काम करने वाले बेटे मयंक गुप्ता ने खुलासा फर्स्ट को बताया कि हम तीन भाई-बहन है। बड़ी बहन प्रियंका डॉक्टर है। छोटी बहन दीपांशी विदिशा में डिप्टी कलेक्टर है।
देर रात पिता चंद्रप्रकाश ने फोन कर मुझे हादसे की सूचना दी। मां के न मिलने की बात भी उन्होंने बताई। मैं इंदौर आ गया हूं। वहीं, बड़ी बहन डॉ. प्रियंका भी दौसा पहुंच गई है।
छोटी बहन दीपांशी जाने वाली है। बस में कई लोग पूरी तरह जल गए हैं। जयपुर से डॉक्टरों की टीम दौसा के लिए निकल गई है, अब जो नहीं मिल रहे हैं डीएनए रिपोर्ट के आधार पर उनकी पहचान होगी।
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