आस्था पर प्रहार: वैष्णो देवी, अंबाजी और बुटाटी धाम में चढ़ावे पर ‘गंदी नजर’
KHULASA FIRST
संवाददाता

देश के तीन बड़े शक्तिपीठों और धार्मिक स्थलों में करोड़ों के गबन, कथित मिलावट और नकदी चोरी का खुलासा; जांच के घेरे में मंदिर प्रशासन
खुलासा फर्स्ट...नई दिल्ली/जम्मू
देश के तीन अत्यंत प्रतिष्ठित और आस्था के बड़े केंद्रों से एक के बाद एक ऐसी खबरें सामने आई हैं जिन्होंने श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है। जम्मू के विश्व प्रसिद्ध श्री माता वैष्णो देवी दरबार में चढ़ावे की चांदी में कथित रूप से 95 प्रतिशत मिलावट का सनसनीखेज दावा किया गया है, जिसकी न्यायिक जांच अब तेज हो गई है। वहीं, गुजरात के प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर में दानपेटी की नकदी पर हाथ साफ करते हुए एक कर्मचारी का वीडियो वायरल हुआ है। दूसरी ओर, राजस्थान के नागौर स्थित ऐतिहासिक बुटाटी धाम में देवस्थान निधि के 22.74 करोड़ रुपये के सुनियोजित वित्तीय गबन का खुलासा हुआ है। इन तीनों गंभीर मामलों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है, बल्कि मंदिर प्रशासनों की पारदर्शिता पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
श्री माता वैष्णो देवी दरबार
550 करोड़ की चांदी में ‘महामिलावट’ की गूंज, अदालत सख्त...
अंबाजी मंदिर (गुजरात)
दानपेटी के नोटों पर ‘पैर’ रखकर चोरी, सीसीटीवी ने खोली पोल...
बुटाटी धाम (राजस्थान)
देवस्थान निधि में 22.74 करोड़ का गबन, राजस्व की तरह होगी वसूली
जम्मू: विश्व प्रसिद्ध श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाई गई चांदी की गुणवत्ता को लेकर उपजा विवाद अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है। जम्मू के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने इस कथित घोटाले को लेकर पुलिस की ढुलमुल कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे 29 जुलाई 2026 को मामले से जुड़े सभी मूल दस्तावेजों और जांच रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर हों।
यह पूरा मामला मंदिर में चढ़ाए गए करीब 20 टन चांदी के बर्तनों और सामग्रियों से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 550 करोड़ रुपये बताई जा रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब चढ़ावे की इस चांदी को गलाने की प्रक्रिया शुरू की गई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। गलाने पर कुल सामग्री में केवल 5 से 6 प्रतिशत ही शुद्ध चांदी पाई गई, जबकि शेष 94 से 95 प्रतिशत हिस्से में कैडमियम, लोहा और अन्य अवांछित धातुएं मिली हुई थीं। हालांकि, इन दावों की अंतिम सत्यता आधिकारिक जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही तय होगी। इस पूरे मामले को कानूनी पटल पर लाने वाले जम्मू के एडवोकेट दीपक शर्मा ने 9 मई को क्राइम ब्रांच के महानिरीक्षक और आर्थिक अपराध शाखा जम्मू के एसएसपी को औपचारिक शिकायत सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगाई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस स्तर पर उचित कदम नहीं उठाए गए, जिसके चलते उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। क्राइम ब्रांच द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर भी पीड़ित पक्ष ने तीखी आपत्ति जताई है, क्योंकि रिपोर्ट में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और सबूतों से छेड़छाड़ रोकने के स्पष्ट उपायों का कोई उल्लेख नहीं है। अब सबकी निगाहें 29 जुलाई को होने वाली अदालती कार्रवाई पर टिकी हैं।
अंबाजी: गुजरात के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर के सुरक्षित माने जाने वाले भंडार कक्ष से चोरी का एक बेहद शर्मनाक मामला उजागर हुआ है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक सीसीटीवी फुटेज ने मंदिर प्रशासन की चौकसी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। फुटेज में भंडार कक्ष के भीतर दान की नकदी गिनने के काम में तैनात एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी नोटों के एक बड़े बंडल को बड़ी चालाकी से अपने पैरों के नीचे दबाकर छिपाता हुआ नजर आ रहा है।
मंदिर प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह वायरल सीसीटीवी फुटेज 15 अप्रैल का है। आरोपी कर्मचारी की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि वह इसके बाद 5 मई को फिर से चढ़ावे की नकदी चुराते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। हालांकि, उस दिन केबिन का सीसीटीवी कैमरा रहस्यमयी ढंग से बंद होने के कारण घटना का वीडियो रिकॉर्ड नहीं हो सका।
इस गंभीर चूक के बाद मंदिर प्रशासन ने आंतरिक जांच का दायरा बढ़ाया, जिसमें तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की संलिप्तता पूरी तरह उजागर हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से तीनों आरोपी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है और उनके खिलाफ पुलिस में नामजद आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब बारीकी से जांच कर रही है कि इन आरोपियों ने अब तक कुल कितनी बड़ी राशि पर हाथ साफ किया है और क्या इस साजिश में मंदिर प्रशासन के कुछ अन्य लोग भी शामिल थे।
नागौर: राजस्थान के नागौर स्थित प्रसिद्ध बुटाटी धाम (संत चतुरदास महाराज मंदिर) की विकास समिति में चल रहे गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार का खुलासा हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया करीब 22.74 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि की गई है। जांच समिति ने इसे केवल एक प्रशासनिक लापरवाही मानने से साफ इनकार किया है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर दर्ज किया है- यह मामला महज मानवीय भूल या लेखा-जोखा की लापरवाही का नहीं है।
यह देवस्थान निधि के पैसों का दुरुपयोग कर अंजाम दिया गया एक अत्यंत सुनियोजित वित्तीय गबन का गंभीर मामला प्रतीत होता है। इस बड़े खुलासे की पृष्ठभूमि 10 फरवरी 2026 से शुरू हुई थी, जब जिला कलेक्टर ने मंदिर समिति के विवादों को देखते हुए एक विशेष जांच दल का गठन किया था। लगभग 4 महीने और 13 दिन की गहन पड़ताल और दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद समिति ने 23 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी।
जांच के दौरान जो मुख्य विसंगतियां पाई गईं, उनमें बही-खातों और वास्तविक नकद आय में करोड़ों का अंतर, बिना किसी वैध बिल या वाउचर के बड़े भुगतान करना, मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्यों के नाम पर संदिग्ध खर्च दिखाना, ग्राम विकास मद के पैसों का अपारदर्शी इस्तेमाल और मंदिर के पुराने कबाड़ की बिक्री से प्राप्त हुई लाखों की राशि को खातों से गायब करना शामिल है। जांच समिति ने अब आरोपी कार्यकारिणी सदस्यों के खिलाफ तुरंत आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की सख्त सिफारिश की है। इसके साथ ही, गबन की गई इस भारी-भरकम राशि को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषियों की व्यक्तिगत संपत्तियों से भू-राजस्व बकाया की तरह कड़ाई से वसूलने का सुझाव दिया गया है।
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