निगम में भ्रष्टाचार, रसीद में चार हजार रुपए, खाते में तीन हजार: कमिश्नर के आदेश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के राजस्व विभाग में वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े के एक ऐसे बड़े खेल का खुलासा हुआ है जिसने निगम प्रशासन की साख और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां आम करदाता अपनी गाढ़ी कमाई का टैक्स निगम के खजाने में जमा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निगम में काबिज भ्रष्ट कर्मचारी फर्जी दस्तावेजों और गबन के सहारे निगम को चूना लगा रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि तत्कालीन निगम कमिश्नर शिवम वर्मा द्वारा पुलिस प्रकरण दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद साठगांठ के बल पर न केवल पुलिस कार्रवाई रोक दी गई, बल्कि आरोपी की बहाली भी करा दी गई।
पूरा मामला जोन क्रमांक 4 और वार्ड 12 के राजस्व विभाग में पदस्थ बिल कलेक्टर हेमराज मुन्नालाल जारवाल से जुड़ा है। सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार करदाताओं को जो रसीद काटकर दी जाती थी उसमें वसूल की गई पूरी राशि दर्ज होती थी, लेकिन जब उसी राशि को नगर निगम के मुख्य लेजर खाते एसडब्ल्यूएम चार्जेस रिपोर्ट में चढ़ाया जाता था तो राशि को काफी कम करके दिखाया जाता था।
उदाहरण के तौर पर करदाता द्वारका प्रसाद निवासी गोविंद नगर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शुल्क के रूप में रसीद क्रमांक 92 बुक नं. 5629 के जरिए 4520 रुपए नकद वसूले गए। इस रसीद पर बिल कलेक्टर हेमराज जारवाल के बकायदा हस्ताक्षर हैं, लेकिन जब निगम के ऑनलाइन लेजर रिकॉर्ड कनेक्शन नंबर 1000288915 की पड़ताल की गई तो जमा राशि में केवल 3020 रुपए दर्शाए गए। यानी एक ही रसीद में 1500 रुपये का सीधा गबन कर लिया गया।
नियुक्ति प्रक्रिया और सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका
अनियमितताओं का यह सिलसिला केवल टैक्स वसूली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया और विभागीय रिकॉर्ड में भी साठगांठ की गंभीर आशंका जताई जा रही है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार हेमराज की प्रथम नियुक्ति 2004 है एम्प्लॉई नंबर 230645, अकुशल श्रेणी, स्वा. विभाग है।
इसके बावजूद विभागीय मिलीभगत से 1998 से लाभ हासिल करने के आरोप लग रहे हैं। वर्तमान में हेमराज को निगम मुख्यालय के पुराने रिकॉर्ड कक्ष में पदस्थापित किया गया है, जिससे यह आशंका है कि वहां मौजूद पुराने सरकारी दस्तावेजों में भी हेराफेरी और रिकॉर्ड मिटाने का खेल खेला जा सकता है।
भारतीय मजदूर संघ की ली आड़...
टैक्स चोरी और धोखाधड़ी की शिकायतें सही पाए जाने पर उपायुक्त स्थापना डॉ. केएस सागर ने आदेश जारी कर हेमराज जारवाल को काम से मुक्त करते हुए उसकी एम्प्लॉय आईडी लॉक कर दी गई थी, साथ ही तत्कालीन निगम आयुक्त शिवम वर्मा के निर्देशानुसार एमजी रोड या संबंधित थाने में पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आरोप है कि पर्दे के पीछे हुई भारी सौदेबाजी के बाद पुलिस प्रकरण रोक दिया गया और आरोपी को वापस नौकरी पर बहाल कर दिया गया। विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए हेमराज ने भारतीय मजदूर संघ का जिला मंत्री पद का चोला ओढ़ लिया, ताकि संगठन की आड़ लेकर निगम प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।
23 कर्मचारियों पर गाज, लेकिन चहेते को राहत
निगम प्रशासन का दोहरा रवैया तब खुलकर सामने आता है जब इसकी तुलना अन्य मामलों से की जाती है। पूर्व में एमजी रोड थाने में संपत्ति कर मामलों में गलत छूट देकर राजस्व हानि पहुंचाने के आरोप में निगम के 23 कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें निलंबित किया गया था।
इनमें 8 मस्टरकर्मी भी शामिल थे, जिन्हें निगम ने कभी वापस नौकरी पर नहीं लिया और इस मानसिक प्रताड़ना व तंगहाली के चलते उनमें से 2 कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर, हेमराज जारवाल जैसे स्थायी/विनियमित कर्मचारी के खिलाफ स्पष्ट साक्ष्य और तत्कालीन कमिश्नर शिवम वर्मा के आदेश होने के बावजूद न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही सेवा से बाहर किया गया।
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