यूपीआई पर विपक्ष के नेता और सरकार आमने-सामने: इस देश के दबाव का आरोप; वित्त मंत्रालय ने किया फैसले का बचाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
यूपीआई पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को नए शुल्क ढांचे की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस फैसले से अमेरिका को फायदा होगा और सरकार पर विदेशी दबाव है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सरकार से फैसले को वापस लेने की मांग की। इसके जवाब में वित्त मंत्रालय ने विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया।
मंत्रालय के मुताबिक, भारत की डिजिटल पेमेंट नीति देश की घरेलू जरूरतों के आधार पर स्वतंत्र रूप से तय की गई है।
15 अक्टूबर से किन यूपीआई पेमेंट पर लगेगा एमडीआर?
एनपीसीआई की नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपए से अधिक के चुनिंदा पर्सन टू मर्चेंट (P2M) यूपीआई पेमेंट पर 0.4% एमडीआर लागू होगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
इसका मतलब है कि 75,000 रुपए या उससे ज्यादा के पात्र मर्चेंट पेमेंट पर भी MDR 300 रुपए से अधिक नहीं होगा। यह शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लागू होगा।
2,000 रुपए तक के पेमेंट और पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन इस सामान्य एमडीआर से बाहर रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96% मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर भी इस नए शुल्क का असर नहीं पड़ेगा।
छोटे कारोबारियों को भी राहत
नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को भी छूट दी गई है। एनीसीआई के अनुसार, जिन छोटे मर्चेंट्स को यूपीआई क्यूआर के जरिए महीने में 1 लाख रुपए तक का भुगतान प्राप्त होता है, वे इस एमडीआर से बाहर रहेंगे।
इसके अलावा रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपए से अधिक के पात्र भुगतान पर 5 रुपए का फ्लैट एमडीआर रखा गया है।
शेयर और म्यूचुअल फंड से जुड़े यूपीआई पेमेंट पर अलग दर
कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान के लिए सामान्य 0.4% एमडीआर की जगह 0.02% एमडीआर का प्रावधान किया गया है। इसमें म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतान शामिल हैं।
इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। यही प्रावधान ब्रोकिंग कंपनियों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
जिरोधा के नितिन कामथ ने उठाया ब्रोकर्स का मुद्दा
जिरोधा के फाउंडर और सीईओ नितिन कामथ ने कहा कि यूपीआई का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर होने के बाद एमडीआर की जरूरत समझ में आती है, लेकिन निवेश और ब्रोकिंग से जुड़े लेन-देन के लिए सामान्य मर्चेंट मॉडल अलग तरह से काम करता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि कोई ग्राहक 2 लाख रुपए अपने ट्रेडिंग अकाउंट में यूपीआई से जमा कर सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसी दिन वह शेयर खरीदे।
ऐसे में ब्रोकर को उस पेमेंट से तत्काल ट्रेडिंग रेवेन्यू नहीं मिलता, लेकिन यूपीआई से जुड़ी लागत आ सकती है। कामथ ने इसी वजह से ब्रोकिंग सेक्टर के लिए अलग और कम दर वाले MDR मॉडल की जरूरत पर बात की है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
यूपीआई के नए शुल्क ढांचे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि इसका असर छोटे कारोबारियों और आगे चलकर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
RJD सांसद मनोज झा ने भी इस फैसले को लेकर सरकार की आलोचना की और इसे अमेरिकी दबाव से जोड़कर सवाल उठाए। हालांकि, विदेशी दबाव के इस दावे को केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
सरकार ने कहा- ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा
वित्त मंत्रालय के मुताबिक नए MDR का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और सेवाओं को टिकाऊ बनाए रखने में मदद करना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से सीधे वसूल नहीं किया जाएगा।
बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि नए शुल्क का सीधा बोझ ग्राहक पर न डाला जाए।
यूपीआई को फ्री रखने के लिए सरकार पहले देती रही इंसेंटिव
यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए सरकार पहले भी प्रोत्साहन योजनाएं चला चुकी है। छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए इंसेंटिव दिए जाते रहे हैं।
अब नए एमडीआर ढांचे के जरिए यूपीआई इकोसिस्टम की लागत को अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटने की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम की स्थिरता और विस्तार में मदद मिलेगी।
आसान भाषा में समझें
आपने दुकान पर 1,500 रुपए का यूपीआई पेमेंट किया तो सामान्य एमडीआर नहीं लगेगा। आपने दुकान पर 10,000 रुपए का पात्र यूपीआई पेमेंट किया तो 0.4% एमडीआर यानी 40 रुपए लागू होगा, लेकिन यह ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाना है।
75,000 रुपए के पात्र मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% के हिसाब से 300 रुपए एमडीआर लगेगा।
1 लाख रुपए के पात्र पेमेंट पर 0.4% के हिसाब से 400 रुपए बनता है, लेकिन अधिकतम सीमा के कारण एमडीआर 300 रुपए ही रहेगा। दोस्त या परिवार के खाते में यूपीआई से पैसे भेजने पर यह सामान्य एमडीआर लागू नहीं होगा।
यूपीआई शुल्क पर असली विवाद क्या है?
एक तरफ सरकार का कहना है कि एमडीआर से यूपीआई इकोसिस्टम को टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी और ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिया जाएगा।
दूसरी तरफ राहुल गांधी और विपक्षी दल इसे लेकर विदेशी दबाव और संभावित आर्थिक असर के सवाल उठा रहे हैं। विदेशी दबाव के आरोप को केंद्र सरकार ने खारिज किया है।
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