70 विदेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने का खुलासा: इतने जिलों में फैला नेटवर्क; दलालों से लेकर सरकारी सत्यापन तक जांच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट बनवाने के मामले में एसटीएफ की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं।
पूछताछ में सामने आया है कि ग्वालियर, भोपाल, पांढुर्ना, छिंदवाड़ा और बैतूल से करीब 70 बांग्लादेशी नागरिकों के दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार कराने के लिए लगभग 17.50 लाख रुपए खर्च किए गए।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क में कथित तौर पर सीमा पार कराने से लेकर आधार, पैन, शैक्षणिक दस्तावेज, मूल निवास प्रमाण-पत्र तैयार कराने, पुलिस सत्यापन और सरकारी कार्यालयों से दस्तावेजों पर मुहर लगवाने तक अलग-अलग स्तर पर रकम का इस्तेमाल किया गया।
मामले में एसटीएफ की गिरफ्त में आए रियाल चौधरी समेत चार आरोपियों से पूछताछ के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
25 से 30 हजार रुपए में तैयार होता था पूरा दस्तावेजी नेटवर्क
जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, एक बांग्लादेशी नागरिक के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के नाम पर करीब 10 से 15 हजार रुपए लिए जाते थे।
इसके बाद पुलिस सत्यापन और सरकारी कार्यालयों से आवश्यक मुहर लगवाने के लिए करीब 5 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च किए जाने की बात सामने आई है।
इसके अलावा दलालों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का कमीशन भी इसमें शामिल था। इस तरह एक व्यक्ति पर कुल खर्च 25 से 30 हजार रुपए तक पहुंचने की बात जांच में सामने आई है।
एसटीएफ को यह भी पता चला है कि ग्वालियर के डबरा क्षेत्र में एक ही पते पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस बिंदु की भी जांच की जा रही है।
पांच जिलों में दस्तावेज तैयार कराने का नेटवर्क
एसटीएफ की जांच में अब तक ग्वालियर, भोपाल, पांढुर्ना, छिंदवाड़ा और बैतूल का कनेक्शन सामने आया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन जिलों में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उनके सत्यापन की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच में 100 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट की जानकारी सामने आने की बात भी कही गई है। इनके दस्तावेज, पते और सत्यापन प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
रियाल चौधरी पर नेटवर्क चलाने का आरोप
एसटीएफ के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार रियाल चौधरी खुद बांग्लादेशी नागरिक है और उस पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने तथा फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पहचान हासिल करने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, वह पहले असम में रहा और बाद में मध्यप्रदेश में सक्रिय हुआ। उस पर अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को भारत लाने, उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और पासपोर्ट बनवाने में मदद करने का आरोप है।
एसटीएफ अब यह भी जांच कर रही है कि रियाल का नेटवर्क मध्यप्रदेश के अलावा किन राज्यों या देशों तक फैला हुआ था।
सरकारी सत्यापन प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
मामले की जांच अब केवल दलालों तक सीमित नहीं है। एसटीएफ की नजर उन सरकारी प्रक्रियाओं पर भी है, जिनके जरिए इन दस्तावेजों का सत्यापन हुआ।
जांच एजेंसी के अनुसार नगर निगम, नगर पालिका, राजस्व विभाग, पंचायत स्तर के पदाधिकारियों और पुलिस सत्यापन से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
वर्ष 2021 और 2022-23 के दौरान संबंधित पदों पर रहे करीब 15 पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में होने की बात सामने आई है। हालांकि, इनमें से किसी की संलिप्तता अभी जांच से साबित नहीं हुई है।
भोपाल एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक, मामले में दस्तावेजों की जांच के साथ नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जा रही है और सबूत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों को भारत लाकर पढ़ाने की भी योजना?
जांच में रियाल से जुड़े एक अन्य कथित प्लान की जानकारी भी सामने आई है। एसटीएफ के मुताबिक, बांग्लादेश से बच्चों को भोपाल लाकर उनकी पढ़ाई कराने की योजना बनाई जा रही थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन बच्चों के लिए एक मठ के पीछे करीब 40 बच्चों की क्षमता वाला हॉस्टल तैयार कराया जा रहा था। बच्चों को आगे थाईलैंड, म्यांमार, जापान और कंबोडिया भेजने की योजना के एंगल की भी जांच की जा रही है।
इसके अलावा रियाल द्वारा स्थानीय लोगों से मदद और विभिन्न कार्यों के नाम पर 5 हजार से 1 लाख रुपए तक चंदा/डोनेशन लिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इस मामले में विदेशी फंडिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है।
चार बार बनवाया पासपोर्ट
जांच के दौरान रियाल के बारे में यह भी जानकारी सामने आई है कि उसने पासपोर्ट गुम होने का हवाला देकर अलग-अलग समय में चार बार पासपोर्ट बनवाए थे। एसटीएफ इन पासपोर्टों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग पासपोर्ट में कौन-कौन सी पहचान और पते दर्ज किए गए थे और इनके सत्यापन में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।
रियाल के साथ रहने वाले दो लोगों से पूछताछ
एसटीएफ ने भोपाल में रियाल के साथ रहने वाले सुभाष और दस्तावेज तैयार करने वाले कैफे संचालक विजय को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
मठ की जांच के दौरान राजस्थान के दो भंते भी मिले थे। उनसे भी पूछताछ की गई है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों का रियाल और कथित दस्तावेज नेटवर्क से किस स्तर तक संपर्क था।
100 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट की जांच
एसटीएफ अब तक सामने आए संदिग्ध दस्तावेजों और पासपोर्ट की जांच कर रही है। 100 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट जांच के दायरे में होने की जानकारी सामने आई है।
जांच में दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों, उनके सत्यापन, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पते और पासपोर्ट आवेदन की पूरी प्रक्रिया को जोड़ा जा रहा है। इसके आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
जांच में सामने आए प्रमुख आंकड़े
5 जिले : ग्वालियर, भोपाल, पांढुर्ना, छिंदवाड़ा और बैतूल
70 बांग्लादेशी नागरिक : फर्जी दस्तावेज/पासपोर्ट से जुड़े होने की जांच
17.50 लाख रुपए : करीब 70 लोगों के दस्तावेज और पासपोर्ट पर खर्च होने की जानकारी
25-30 हजार रुपए: एक व्यक्ति पर कथित तौर पर पूरा दस्तावेजी सेट तैयार कराने का खर्च
17 पासपोर्ट : डबरा में एक ही पते से बनने की जानकारी
100+ पासपोर्ट : एसटीएफ की जांच के दायरे में संदिग्ध पासपोर्ट
15 पुलिस अधिकारी : 2021 और 2022-23 में पदस्थ अधिकारियों की भूमिका की जांच
फिलहाल एसटीएफ दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और सरकारी प्रक्रिया में किस स्तर तक लापरवाही या कथित मिलीभगत हुई।
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