इस विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन पर बढ़ा विवाद: जमीअत और एनएसयूआई ने खोला मोर्चा; तेज हुई सियासत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा पारित नाम परिवर्तन प्रस्ताव के विरोध में अब विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और छात्र संगठन खुलकर सामने आने लगे हैं। जमीअत उलमा, एनएसयूआई और मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच ने इस प्रस्ताव को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और भोपाल की सांस्कृतिक विरासत के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि यह केवल किसी विश्वविद्यालय के नाम का मामला नहीं है, बल्कि देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले एक महान स्वतंत्रता सेनानी की ऐतिहासिक पहचान और योगदान से जुड़ा विषय है। उनका आरोप है कि नाम परिवर्तन के माध्यम से इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
जमीअत उलमा जिला भोपाल के अध्यक्ष हाफिज इस्माईल बैग ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली केवल भोपाल ही नहीं बल्कि पूरे देश के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1915 में अफगानिस्तान में गठित भारत की पहली निर्वासित सरकार में मौलाना बरकतउल्ला ने प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे गदर आंदोलन से भी जुड़े रहे और विदेशों में रहकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते रहे।
बैग ने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम बदलना भोपाल की गंगा-जमुनी तहजीब और साझा सांस्कृतिक विरासत पर भी आघात है। उनका कहना है कि एक स्वतंत्रता सेनानी के नाम को हटाना समाज में अनावश्यक विभाजन की भावना पैदा कर सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि नाम परिवर्तन का प्रस्ताव तत्काल निरस्त किया जाए और विश्वविद्यालय का मूल नाम बरकरार रखा जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय आज शिक्षकों की कमी, शोध कार्यों में गिरावट और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
इधर, एनएसयूआई ने भी इस प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में सामने आ रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों से ध्यान हटाने के लिए यह पूरा मुद्दा खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में फर्जी कॉलेजों को संबद्धता देने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं, लेकिन उन मामलों की जांच और कार्रवाई के बजाय नाम परिवर्तन का मुद्दा उछाला जा रहा है।
गुरुवार को एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के सामने मौलाना बरकतउल्ला भोपाली का चित्र रखकर विरोध प्रदर्शन किया और यज्ञ आयोजित किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
रवि परमार ने कहा कि एक स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना उनके योगदान का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय राजनीतिक और वैचारिक कारणों से प्रेरित प्रतीत होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रस्ताव पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो एनएसयूआई प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और छात्र समुदाय को साथ लेकर सड़कों पर उतरेगी।
इस विवाद में अब मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच भी शामिल हो गया है। मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली देश की आजादी के उन महान सेनानियों में शामिल थे, जिन्होंने विदेशों में रहकर भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। ऐसे व्यक्तित्व के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना उनके योगदान को कमतर आंकने जैसा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि कार्य परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव को तत्काल अस्वीकार किया जाए। उनका कहना है कि सरकार को नए संस्थानों की स्थापना पर ध्यान देना चाहिए, न कि वर्षों पुरानी ऐतिहासिक पहचान वाले संस्थानों के नाम बदलने पर।
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक संस्थान के नाम में बदलाव से पहले व्यापक जनचर्चा और सार्वजनिक सहमति आवश्यक होनी चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक विवादों से दूर रखते हुए उनकी ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
अब इस पूरे विवाद पर सबकी निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। एक ओर नाम परिवर्तन के पक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोध करने वाले संगठन इसे इतिहास, विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक एवं सामाजिक रूप ले सकता है।
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