विवाद: हाईकोर्ट ने इतने कॉलेजों की परीक्षा और रिजल्ट पर लगाई रोक; सिर्फ इतने योग्य कॉलेजों के छात्र देंगे एग्जाम
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेज विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए अपने 19 जून के आदेश में संशोधन किया है। कोर्ट ने ग्वालियर रीजन के 56 नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों की परीक्षा और परिणाम पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब केवल 189 मान्यता प्राप्त (सूटेबल) नर्सिंग कॉलेजों के छात्र ही परीक्षा में शामिल हो सकेंगे और उनके ही परिणाम घोषित किए जाएंगे।
सरकार ने बताई आदेश में तथ्यात्मक त्रुटि
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 19 जून के आदेश में तथ्यात्मक त्रुटि रह गई थी। आदेश में 245 कॉलेजों को योग्य मान लिया गया था, जबकि शुरुआत से निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले कॉलेजों की संख्या 189 ही थी। सरकार ने दलील दी कि शेष 56 कॉलेज प्रारंभिक जांच में डेफिशिएंट यानी आवश्यक सुविधाओं की कमी वाले पाए गए थे।
56 कॉलेज पहले अयोग्य घोषित किए गए थे
सरकार के अनुसार, इन 56 कॉलेजों को पहले निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया था। बाद में एक हाई लेवल कमेटी ने दोबारा निरीक्षण कर इन्हें योग्य मानने की सिफारिश की थी, लेकिन इस संबंध में अंतिम निर्णय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।
राज्य सरकार ने कोर्ट से कहा कि यदि आदेश में संशोधन नहीं किया जाता, तो इन कॉलेजों के छात्र भी परीक्षा में शामिल होकर परिणाम प्राप्त कर लेते, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी।
कोर्ट ने सरकार की दलील मानी
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल 189 योग्य नर्सिंग कॉलेजों के छात्र ही परीक्षा देंगे और उन्हीं का रिजल्ट जारी किया जाएगा। वहीं, 56 कॉलेजों के छात्रों की परीक्षा और परिणाम अगली सुनवाई तक स्थगित रहेंगे।
हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर
इस फैसले का असर ग्वालियर रीजन के उन हजारों छात्रों पर पड़ेगा, जो इन 56 कॉलेजों में नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। फिलहाल उन्हें कोर्ट के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।
जुलाई में होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की है। तब तक 56 कॉलेजों के छात्रों की परीक्षा और परिणाम पर रोक जारी रहेगी।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, बुनियादी सुविधाओं और निरीक्षण प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कई संस्थानों पर आवश्यक मानकों का पालन किए बिना संचालन करने के आरोप लगते रहे हैं।
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