चिंता से मुक्त हुए चिंतामणि: कांग्रेस में पैराशूट लैंडिंग; योग्य दावेदार देखते रह गए
KHULASA FIRST
संवाददाता

नए नेता प्रतिपक्ष की तैनाती के जरिए कांग्रेस ने फिर बताया-हम नहीं सुधरेंगे
कांग्रेस ने चिंटू चौकसे को नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के पद से मुक्त किया, एक साथ दो पद पर थे तैनात
महिला पार्षद सोनिला मिमरोट को दी नेता प्रतिपक्ष की कमान, नियुक्ति होते ही विरोध हुआ तेज
ठगी सी रह गई तीन बार की पार्षद विनीतिका यादव, पहली बार ही जीतकर सोनिला बन गईं नेता
न कोई पर्यवेक्षक, न पार्षदों से हुई कोई रायशुमारी, भोपाल से महज एक लेटर आया और हो गया बड़ा फेरबदल
चिंटू चौकसे अब सिर्फ शहर कांग्रेस अध्यक्ष, डेढ़-दो साल से एक साथ दो पद पर थे काबिज, पार्टी में विरोध था
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अभी आठ-दस दिन भी नहीं बीते जब आपके इस प्रिय पक्का इंदौरी अखबार खुलासा फर्स्ट ने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस से पूछा था-कब सुधरेगी कांग्रेस? जवाब तब तो नहीं दिया, कांग्रेस ने इंदौर जैसे प्रदेश के सबसे बड़े शहर में नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष पद पर फेरबदल कर दिया कि हम नहीं सुधरेंगे।
तब मसला राज्य का राज्यसभा चुनाव था। तब अंटागाफिल कांग्रेस की नाक के नीचे से भाजपा कांग्रेस की तयशुदा जीत को झपटकर ले गई। कांग्रेस हाथ मलती रह गई, दांत पीसती रह गई। अब मसला प्रदेश के सबसे बड़े इंदौर नगर निगम का है।
यहां तो भाजपा सामने थी ही नहीं। लिहाजा पार्टी ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। अब इंदौर के पार्षद, पदाधिकारी, कार्यकर्ता बिलबिला रहे हैं। पार्टी के एक बड़े वर्ग में निगम में नए नेता प्रतिपक्ष की आमद को पैराशूट लैडिंग मुकर्रर कर दिया है।
विरोध एकदम तेज हो गया। सामूहिक इस्तीफे की धमकी व तैयारियां शुरू हो गई हैं। इंदौर के इस फैसले पर पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी व अध्यक्ष जीतू पटवारी पर एक बार फिर मनमानी के आरोप राज्यभर में गूंजने लगे हैं। दोनों नेताओं के इस निर्णय को पार्टी गलियारों में नियम-कायदे के विरुद्ध ‘न तारीख, न सुनवाई, फैसला फटाफट’ करार दिया गया है।
कां ग्रेस की इंदौरी सियासत सोमवार रात 9 बजे एकाएक गर्म हो गई। राजधानी भोपाल से आए एक लेटर ने शहर कांग्रेस को चौंका दिया। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि चिंतामणि चौकसे यानी चिंटू चौकसे को नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाया जाता है और उनकी जगह सोनिला मिमरोट को नया नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता है।
पत्र से साफ हो गया कि चिंतामणि एक साथ दो-दो पद संभालने की ‘चिंता’ से मुक्त कर दिए गए हैं। वे निगम में प्रतिपक्ष के साथ-साथ पार्टी की शहर इकाई के अध्यक्ष की कुर्सी पर भी विराजमान थे। चौकसे के एक साथ दो-दो पद पर तैनाती से कांग्रेस में अंदरूनी कलह तो यूं भी पसरी हुई थी।
उन्हें एक पद से हटाने पर यूं तो औसत कांग्रेस को खुश होना था, लेकिन वो कांग्रेस ही क्या…जो अपने फैसले से अपने कैडर को खुश कर दे? लिहाजा चौकसे की विदाई भी कांग्रेस में रोष का कारण बन गई।
नतीजतन विरोध में पार्टी के सचिव राजेश मेवाड़ा ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे में लिखा कि कांग्रेस संगठन द्वारा नेता प्रतिपक्ष के पद पर सोनिला मिमरोट की नियुक्ति तथा तीन बार के पार्षद विनीत (दीपू यादव) जी की लगातार उपेक्षा, अनदेखी के इस निर्णय से मेरी भावनाएं आहत हुई हैं और मैं स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा हूं।
अतः मैं विरोध स्वरूप अपने सभी दायित्वों एवं पार्टी के प्राथमिक शहर सचिव पद से इस्तीफा देता हूं। बताया जा रहा है कि विरोध में ब्लॉक क्र. 3 के सभी पदाधिकारी और वार्ड क्र. 10 के सभी पदाधिकारी अपना त्याग पत्र देकर विरोध करेंगे।
योगेंद्र मौर्य व विधानसभा 1 के सभी पदादिकारी 17 वार्ड अध्यक्ष, वार्ड प्रभारी, महिला प्रभारी, 5 ब्लॉक अध्यक्ष और शहर कांग्रेस के 7 पदाधिकारी सामूहिक इस्तीफा देंगे। पटवारी व चौधरी के पुतला दहन की धमकी भी दी गई है।
...फिर ठगा सा रह गया ‘भल्लू भिया’ का परिवार... नेता प्रतिपक्ष के पद पर फेरबदल तो पार्टी हलकों में तय माना जा रहा था, क्योंकि अब निगम के कार्यकाल में चंद महीने ही शेष रह गए हैं। ऐसे में चिंटू चौकसे को शहर कांग्रेस का मुखिया बनाए रखना, प्रदेश कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से ज्यादा मुफीद था।
लिहाजा ये माना जा रहा था कि कमान किसी वरिष्ठ पार्षद के हाथ में दी जाएगी। महिला नेता में विनीतिका दीपू यादव का दावा सबसे ज्यादा मजबूत था। स्व रामलाल यादव ‘भल्लू भिया’ की राजनीतिक विरासत को बेटे दीपू व बहू विनीतिका ही आगे बढ़ा रहे हैं।
दीपू शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद के भी स्वाभाविक दावेदार थे। तब भी नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद प्रदेश कांग्रेस ने अपने पसंदीदा नेता चौकसे को एक साथ दो पदों की कमान दे दी। दीपू यादव व कांग्रेस की यादव लॉबी तब भी मनमसोसकर रह गई।
अब ये ही काम नेता प्रतिपक्ष पर दोहरा दिया गया। इस बार फिर यादव परिवार कांग्रेस की गुटीय राजनीति का शिकार हो गया और तीन बार की पार्षद विनीतिका को परे रखकर पहली बार पार्षद बनी सोनिला को कमान दे दी गई।
इस फैसले ने कांग्रेस में गुस्सा बढ़ा दिया है। ये गुस्सा रात से ही सोशल मीडिया पर बिना किसी लागलपेट के जबरदस्त रूप से मुखर भी है। नतीजतन सामूहिक इस्तीफे की धमकी व तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसकी शुरुआत वार्ड 10 से होना तय माना जा रहा है।
कांग्रेस में उठा सवाल-क्या कमलनाथ से बड़े हो गए पटवारी-चौधरी?
नए नेता प्रतिपक्ष में बदलाव के मामले में प्रदेश कांग्रेस ने जो नीति अपनाई, गुस्सा इस बात पर ज्यादा है। कांग्रेसजनों के मुताबिक इस मामले में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी व प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने तयशुदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
निगम में नेता प्रतिपक्ष जैसे पद पर बदलाव के लिए न कोई पर्यवेक्षक, नेता भेजा गया, न पार्षदों से कोई रायशुमारी हुई। न अध्यक्ष ने, न प्रभारी ने इस मामले में पार्षदों व पार्टी के स्थानीय बड़े नेताओं से कोई बात की। न किसी को विश्वास में लिया।
पार्टी नेताओं का तो साफ कहना है कि इस तरह की नियुक्ति का प्रदेश अध्यक्ष को पार्टी संविधान के तहत अधिकार है भी नहीं। पार्टी नेता कमलनाथ के समय को याद दिलाते हैं कि तब पर्यवेक्षक आए थे और एक होटल में पार्षदों से रूबरू बात कर नेता प्रतिपक्ष पर फैसला लिया गया था। अब सवाल ये है कि क्या पटवारी व चौधरी कमलनाथ से भी बड़े नेता हो गए..?
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