जान जोखिम में डाल स्कूल जा रहे बच्चे: मुख्यमंत्री के गृह जिले के गांव ऊंचाहेड़ा को आजादी के बाद से सड़क का इंतजार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नागदा।
मुख्यमंत्री के गृह जिले की खाचरौद तहसील का अंतिम गांव ऊंचाहेड़ा मूलभूत सड़क सुविधा से वंचित है। तहसील मुख्यालय से लगभग 15 किमी दूर गांव के रहवासी सालों से ऊंचाहेड़ा से बांगरोद रेलवे स्टेशन तक पक्की सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन आजादी के बाद से अब तक यह सपना पूरा नहीं हो सका। बरसात में स्कूली बच्चों से भरी बसें, किसान, मजदूर और ग्रामीण कच्चे तथा फिसलन भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
लगभग 3 किमी लंबा मार्ग केवल ऊंचाहेड़ा ही नहीं, बल्कि सीमलावदा खुर्द और बांगरोद सहित तीन गांवों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। यह सड़क रतलाम-खाचरौद मार्ग से संपर्क स्थापित करने के साथ ग्रामीणों को सीधे बांगरोद, सीमलावदा खुर्द और धमोत्तर क्षेत्र से जोड़ती है।
रतलाम मंडी में उपज बेचने जाने वाले किसान, रोजगार के लिए शहर जाने वाले श्रमिक, रेलवे कर्मचारी, स्कूलों में पढ़ाने के लिए बाहर से आने वाले शिक्षकों, बांगरोद स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड में कार्यरत कर्मचारी, खाटू श्याम जी मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु तथा अध्ययन के लिए बांगरोद और रतलाम जाने वाले छात्र इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
बड़े दावे, लेकिन धरातल पर तस्वीर अलग... ग्रामीण धर्मेंद्र भोयन ने बताया विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर तस्वीर अलग है। इस मार्ग के निर्माण से ऊंचाहेड़ा, सीमलावदा खुर्द और बांगरोद के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने चेतावनी दी दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए तो ग्रामीण जनपद पंचायत कार्यालय पर धरना देंगे।
सड़क के लिए संघर्ष करना पड़ रहा.... ग्रामीण मंगल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में यदि ग्रामीणों को आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है तो यह जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के लिए चिंतन का विषय है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और शासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
पंचायत सचिव खुशहाल सिंह गोहिल ने बताया जनसहयोग और पंचायत की ओर से कुछ स्थानों पर रेत डलवाकर अस्थायी राहत देने का प्रयास किया है। पंचायत ने भी राशि उपलब्ध कराई है, लेकिन स्थायी समाधान पक्की सड़क ही है।
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