पलभर में प्रलय: धरती हिली, पहाड़ टूटे, नेपाल तबाह
KHULASA FIRST
संवाददाता

केदारनाथ धाम से भी आई बड़ी प्रलयंकारी आपदा, 175 मौतें, 663 लापता
139 भारतीय भी लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं पर टूट पड़ी नेपाली आपदा, बढ़ सकती है भारतीय हताहतों की संख्या
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा पर 26 अगस्त 2026 को आई भीषण अचानक बाढ़ और मलबे के बहाव ने एक महात्रासदी का रूप ले लिया है। इस आपदा में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 750 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य विदेशी पर्यटक शामिल हैं।
कैलाश मानसरोवर जाने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं के अब तक लापता होने की खबर है। भारत सबसे पहला मददगार बना। अब दुनियाभर से नेपाल की तरफ मदद की बाढ़ आ गई है। बावजूद इसके पूरे नेपाल में शोक पसरा हुआ है।
सबकुछ बहा ले जाने वाली आपदा कैसे आई ?
बुधवार, 26 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 8:30 बजे, तिब्बत सीमा से सटे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक पानी का एक प्रलयंकारी सैलाब उठा।
पानी और मलबे की दीवार इतनी विशाल थी कि नदी के सामान्य स्तर से 270 फीट (80 मीटर) ऊंचाई तक बसे गांव, सड़कें, गाड़ियां और सीमा चौकियां, जिसमे चीन का ग्यीरोंग पोर्ट भी पलक झपकते ही बह गए।
हजारों को हताहत करने वाली आपदा क्यों आई?
शुरुआती खबरों में इसे भूकंप का असर माना जा रहा था, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि तबाही का मुख्य कारण हिमालयी क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर का ढहना था, लेकिन गुरुवार सुबह नेपाल के इस हादसे की तकनीकी रिपोर्ट आ गई, जिसमें तिब्बत की तरफ वाले हिस्से में सुबह 8 बजकर 34 मिनट पर आए भूकंप को जिम्मेदार बताया गया है।
ये भूकंप 4.4 की तीव्रता वाला था। इससे ग्लेशियर और चट्टानें खिसक गईं। पहाड़ों पर करीब 2,000 फीट चौड़ा ग्लेशियर का हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिरा। इस विशाल मलबे और बर्फ ने एक नदी का रास्ता रोक दिया।
यहां झील जैसी बन गई। जब मलबे के पीछे भारी मात्रा में पानी जमा हो गया, तो वह अस्थायी बांध अचानक टूट गया। इसके बाद मलबे और पानी का एक महासैलाब बेहद तेज गति से नीचे की घाटियों में आ गया।
शायद प्रलय भी ऐसा नहीं होगा। न किसी हॉलीवुड-बॉलीवुड ने ऐसे प्रलयंकारी आपदा को फिल्माने का दृश्य अपने जेहन में लाया होगा। ऐसा भयावह मंजर कि कल्पना करना मुश्किल कि कुदरत का ऐसा रुद्रावतार भी होता है? 2013 में भारत के केदारनाथ में मंडराई मौत भी इस मंजर के आगे कमतर नजर आई।
नेपाल में जो कल आपदा आई, उसने पूरी दुनिया को सदमें में ला दिया। इस छोटे से पहाड़ी देश में पहाड़ों से ऐसी सुनामी उतरी कि पूरा देश पलभर में तबाह हो गया। ऐसी भयानक बाढ़ आई कि हजारों अब तक लापता हैं। पानी की लहरें 30 से 50 फीट तक ऊंची उठी और ऊंचाई तक बसे गांव, कस्बे, शहर भी मलबे में दब गए।
निचले इलाकों का तो नामोनिशान ही नहीं बचा। तिब्बत व चीन वाले हिस्से से आई इस तबाही की तीव्रता भूकंप जैसी न केवल महसूस हुई, बल्कि दर्ज भी हुई। 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी जब पहाड़ों से चट्टान, पत्थर, मलबा, मिट्टी व हजारों पेड़ों के साथ बहता हुआ जब नेपाल में उतरा तो जिंदगी बचाने का किसी को वक्त ही नहीं मिला।
जो वीडियो, रील व विजुअल नेपाल की इस आपदा के आ रहे हैं, उन्हें देख कलेजा मुंह पर आ रहा है। रुलाई फूट रही है। जान बचाते, भागते सैकड़ों लोगों को सैलाब में समाते आंखें अब देख नहीं पा रही हैं।
इस आपदा में मौत का सरकारी आंकड़ा भले ही अभी 200 के आसपास हो, लेकिन आपदा की भयावहता साफ बता रही है कि हजारों लोग असमय काल कवलित हो गए। अब सब तरफ से नेपाल की मदद के लिए हाथ बड़े हैं। भारत सबसे पहला मददगार बन नेपाल की धरती पर पहुंच गया हैं। तलाश अब उन जिंदगियों की शुरू हुई हैं, जो लापता के आंकड़े में दर्ज हैं।
2 करोड़ घन मीटर अतिरिक्त पानी, भूकंप जैसी तीव्रता...ग्लेशियर गिरने की घटना इतनी भयानक थी कि इससे धरती में 5.2 तीव्रता के भूकंप जितना कंपन रिकॉर्ड हुआ। एक साथ नदियों में 2 करोड़ घन मीटर अतिरिक्त पानी आ गया।
पानी 30 से 50 फीट तक ऊंचा उठा। वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण हिमालय के ग्लेशियर कमजोर और अस्थिर हो रहे हैं, जिससे ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। नेपाल में अब तक 157 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं और तिब्बत के हिस्से में भी भारी हताहतों की खबर है।
तिब्बत में भी 558 लोग लापता है, जिसमें अधिकांश पर्यटक हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता लोगों में 139 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो तिब्बत में कैलाश मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर जा रहे थे। इसके अलावा अमेरिका के 47, ब्रिटेन के 33, ऑस्ट्रेलिया के 34 और कनाडा के 24 पर्यटक भी लापता हैं।
13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स तबाह, 19 बड़े पुल टूटे, सड़कें बर्बाद...प्रलयंकारी आपदा ने नेपाल के इन्फ्रास्ट्रक्चर को एक तरह से तबाह कर दिया। ग्यीरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। भोटे कोशी नदी पर बनी कई महत्वपूर्ण लगभग 13 पनबिजली परियोजनाएं यानी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और 19 पुल बह गए हैं।
अब सब तरफ राहत व बचाव युद्धस्तर पर चल रहा है। नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल युद्ध स्तर पर हेलीकॉप्टरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। प्रभावित इलाकों में संचार और रास्ते पूरी तरह ठप हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर हरसंभव मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजने का आश्वासन दिया है। भारतीय वायुसेना के विमान रेस्क्यू टीमों और मेडिकल सप्लाई के साथ सबसे पहले नेपाल पहुंचे।
अलर्ट: खतरा अभी टला नही...मौसम वैज्ञानिकों ने नदियों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की है, क्योंकि पहाड़ों में हलचल के चलते दूसरे ‘जलप्रलय' या बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है।
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