राम मंदिर में चढ़ावा सामग्री में कथित हेरफेर का मामला: देशभर में मंदिरों के दान प्रबंधन पर उठे सवाल; पारदर्शिता को लेकर बहस तेज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, लखनऊ।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान सामग्री में कथित हेरफेर का मामला सामने आने के बाद देशभर में मंदिरों में मिलने वाले दान के प्रबंधन और उसकी पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। हर वर्ष देश के बड़े मंदिरों में श्रद्धालु अरबों रुपये नकद, सोना, चांदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं दान करते हैं। ऐसे में इनकी सुरक्षा, लेखा-जोखा और उपयोग की व्यवस्था पर लोगों की नजरें टिक गई हैं।
जानकारों का कहना है कि श्रद्धा के साथ मंदिरों में दान की मात्रा लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता भी बढ़ गई है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
देश के प्रमुख मंदिरों में हर साल करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है। तिरुपति बालाजी मंदिर में अनुमानित 3,500 से 5,000 करोड़ रुपये, वैष्णो देवी में 500 से 800 करोड़ रुपये, शिरडी साईं बाबा मंदिर में 600 से 800 करोड़ रुपये, सिद्धिविनायक मंदिर में 150 से 250 करोड़ रुपये और काशी विश्वनाथ मंदिर में 100 से 200 करोड़ रुपये तक का वार्षिक दान प्राप्त होने का अनुमान है।
इन मंदिरों में दान की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी, सीलबंद दानपात्र, डिजिटल रिकॉर्डिंग, बैंकिंग व्यवस्था और नियमित ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। कई मंदिरों में दान की गिनती कंप्यूटरीकृत प्रणाली के माध्यम से की जाती है, जबकि बहुमूल्य धातुओं और आभूषणों का अलग से रिकॉर्ड रखा जाता है।
इस बीच राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रही एसआईटी को कुछ महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की नियमित बैठकों में नकद दान और आय का विवरण तो प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य दान सामग्री का विस्तृत ब्योरा हमेशा एजेंडे का हिस्सा नहीं होता था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि वर्षों में प्राप्त बहुमूल्य दान सामग्री का रिकॉर्ड किस प्रकार रखा गया और उसकी निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
जांच के दौरान एसआईटी को दान से संबंधित कई रसीदें और अभिलेख मिले हैं, जिनमें श्रद्धालुओं द्वारा सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं चढ़ाने का उल्लेख है। हालांकि कुछ वस्तुओं के भंडारण और अंतिम स्थिति से जुड़े रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं मिल पाए हैं, जिसके चलते जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहले ही बता चुका है कि मंदिर को दान में लगभग 13 क्विंटल चांदी और 20 किलो सोना प्राप्त हुआ है। ट्रस्ट ने सोने-चांदी की गुणवत्ता और मात्रा की जांच के लिए बड़ी मात्रा में चांदी भारत सरकार की टकसाल को परीक्षण और गलाने के लिए भेजी थी।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अब देशभर में यह मांग उठने लगी है कि मंदिरों में प्राप्त होने वाले दान और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन के लिए अधिक पारदर्शी और आधुनिक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो सके। वहीं, एसआईटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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