टेलीकॉम प्रोजेक्ट के नाम पर कारोबारी से 12.68 लाख रुपए की हुई धोखाधड़ी: डिजिटल रिकॉर्ड से हुई मामले की पुष्टि
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
टेलीकॉम टावर व इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में मुनाफा कमाने का लालच देकर एक स्थानीय कारोबारी पीयूष अरोड़ा के साथ 12 लाख 68 हजार 600 रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
खुद को इस व्यवसाय का विशेषज्ञ बताने वाले जयराज बंगेरा ने पीड़ित को भरोसे में लेकर निवेश के नाम पर किस्तों में बड़ी राशि का भुगतान ले लिया।
दिसंबर 2023 से अगस्त 2024 के बीच आरोपी ने साइट लायजनिंग, मटेरियल खरीद, लेबर चार्ज और ट्रांसपोर्टेशन के खर्चों के नाम पर पीड़ित से यह राशि ली।
इसमें पीड़ित ने अपने एचडीएफसी बैंक खाते से 9,18,600 रुपए का सीधा ऑनलाइन भुगतान किया, जबकि उनके सहयोगी फराज कमर ने 3,50,000 रुपए का आरटीजीएस ट्रांसफर किया।
उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से इस पूरे लेन-देन और धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा हुआ है। जून 2025 में हुई बातचीत में पीड़ित पीयूष अरोड़ा ने आरोपी को अपनी आर्थिक मजबूरी बताते हुए कहा कि भाई करवा दो, मैं आगे जवाब नहीं दे पा रहा हूं। इस पर आरोपी जयराज बंगेरा ने उसे यह कहकर टाल दिया कि वह खुद काम में लगा हुआ है।
आरोपी के बैंक खातों को फ्रीज किया जाए
शिकायतकर्ता ने अपने पास मौजूद बैंक ट्रांसफर रसीदें, आरटीजीएस रिकॉर्ड, डिजिटल कम्युनिकेशन हिस्ट्री और अन्य सबूत पुलिस को सौंप दिए हैं। पीड़ित ने मांग की है कि आरोपी के बैंक खातों को फ्रीज किया जाए और कानून के अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करते हुए ठगी गई राशि ब्याज सहित वापस दिलाई जाए।
पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
बार-बार आश्वासन देता रहा
मामला तब और अधिक गंभीर हो गया जब पीड़ित ने आरोपी से गुहार लगाते हुए लिखा कि उसके घर में सभी को इस लेन-देन के बारे में पता चल चुका है और उस पर भारी दबाव है। इसके बावजूद आरोपी ने उसे फिर से टालमटोल भरे आश्वासन दिए।
जून 2025 के अंत में आरोपी ने एक बार फिर झूठ का सहारा लेते हुए कहा कि उसे प्रॉपर्टी वाले से बात करने के लिए 4-5 दिन का समय और चाहिए। आरोपी जयराज बंगेरा ने न तो निवेश की गई राशि वापस की और न ही फंड का कोई हिसाब-किताब दिया।
इसके बाद आरोपी ने पीड़ित को सभी संचार माध्यमों से ब्लॉक कर दिया और पूरी तरह से गायब हो गया। पीड़ित ने अब पुलिस उप आयुक्त क्राइम ब्रांच इंदौर को औपचारिक शिकायत सौंपकर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धन के दुरुपयोग की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का निवेदन किया है।
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