इस अहम विधेयक पर फिलहाल ब्रेक: मानसून सत्र में पेश होने की संभावना कम; समिति का कार्यकाल बढ़ा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश में लंबे समय से चर्चा में चल रहे समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर फिलहाल इंतजार और बढ़ सकता है। सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है। वहीं, विधानसभा का मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई तक प्रस्तावित है। ऐसे में मौजूदा सत्र में यूसीसी विधेयक पेश होने की संभावना काफी कम मानी जा रही है।
क्यों बढ़ाया गया समिति का कार्यकाल?
विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने 30 जून को अधिसूचना जारी कर बताया कि समिति के सदस्य सचिव ने कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। मसौदा तैयार करने की प्रगति को देखते हुए सरकार ने समिति का कार्यकाल 26 जुलाई तक बढ़ाने का फैसला लिया। समिति के गठन से जुड़े अन्य सभी प्रावधान पहले की तरह यथावत रहेंगे।
गुजरात मॉडल पर आधारित है ड्राॅफ्ट
यूसीसी के प्रस्तावित मसौदे का बड़ा हिस्सा गुजरात के मॉडल पर आधारित है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। उद्देश्य यह है कि पारिवारिक मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू की जा सके।
मुख्यमंत्री के बयान से बढ़ी थीं उम्मीदें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले संकेत दिए थे कि यूसीसी विधेयक जुलाई के मानसून सत्र में लाया जा सकता है। 2 जुलाई को मुख्यमंत्री के समक्ष ड्राफ्ट का प्रेजेंटेशन भी किया गया था। इसके बाद माना जा रहा था कि सरकार जल्द विधेयक पेश कर सकती है, लेकिन समिति का कार्यकाल बढ़ने के बाद इस संभावना को झटका लगा है।
क्या फिर भी आ सकता है विधेयक?
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कार्यकाल बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि विधेयक पूरी तरह टल गया है। यदि समिति तय समय से पहले मसौदा अंतिम रूप दे देती है और सरकार आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर लेती है, तो सत्र के दौरान विधेयक लाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में इसकी संभावना सीमित मानी जा रही है।
मानसून सत्र का एजेंडा
20 से 24 जुलाई तक चलने वाले विधानसभा सत्र में सरकार कई अहम विधेयक और प्रस्ताव ला सकती है। इनमें पहला अनुपूरक बजट, स्वामित्व योजना से जुड़े संशोधन, सिंहस्थ-2028 के लिए मेला अधिनियम में बदलाव, एकीकृत श्रम कानून तथा कोचिंग रेगुलेशन विधेयक शामिल हो सकते हैं। विपक्ष भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
यूसीसी क्या है?
यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और संपत्ति के बंटवारे जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है। वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी लागू होने पर इन मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।
प्रस्तावित ड्राॅफ्ट की प्रमुख बातें
धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी यूसीसी के दायरे में शामिल होंगे, जबकि पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों का पालन करने वाले आदिवासियों को इससे बाहर रखने का प्रस्ताव है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार विवाह की अनुमति होगी, लेकिन विवाह से जुड़े कानूनी अधिकार और दायित्व सभी के लिए समान होंगे। प्रत्येक विवाह का 60 दिनों के भीतर पंजीयन अनिवार्य होगा।
पहले हो चुके विवाह और तलाक का भी सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। भरण-पोषण, गुजारा भत्ता और बच्चों की अभिरक्षा के लिए समान नियम लागू होंगे। बिना वसीयत मृत्यु होने पर संपत्ति का बंटवारा एक समान उत्तराधिकार कानून के तहत होगा।
वसीयत बनाने, संशोधित करने और निरस्त करने की स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया तय होगी। आवश्यकता पड़ने पर अदालत संपत्ति की सुरक्षा के लिए कस्टोडियन नियुक्त कर सकेगी। विवाह, तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। झूठी जानकारी देने या रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान होगा।
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