राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में बड़ा कदम: इतने कर्मचारी हटाए गए; सीसीटीवी निगरानी बढ़ी, एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, अयोध्या।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों के बीच राम जन्मभूमि परिसर में सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। सोमवार को चढ़ावे की गणना से जुड़े 40 कर्मचारियों को उनके कार्य से हटा दिया गया। उनकी जगह नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है। साथ ही गणना स्थल पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
मामला अब प्रशासनिक, राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसे मुख्यमंत्री को सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है।
चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों को बदला गया
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और नकदी की गणना का कार्य करने वाले लगभग 40 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से उस जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। हालांकि उन्हें सेवा से नहीं हटाया गया, बल्कि अन्य विभागों और कार्यों में समायोजित किया गया है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि जांच पूरी होने तक चढ़ावा गणना प्रक्रिया में बदलाव से निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहेगी।
सीसीटीवी निगरानी हुई और मजबूत
मंदिर परिसर के उस हिस्से में जहां चढ़ावे की गणना की जाती है, वहां पहले केवल एक सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था। अब तीन अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं। इसके बाद कुल कैमरों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अतिरिक्त कैमरों से गणना प्रक्रिया की हर गतिविधि रिकॉर्ड होगी, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या संदेह की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध रहेंगे।
एसआईटी की जांच तेज, मुख्यमंत्री को सौंप सकती है रिपोर्ट
कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) लगातार पूछताछ और दस्तावेजों की समीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जांच दल अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकता है। बताया गया है कि जांच दल रविवार शाम मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा था, लेकिन विधानसभा के मानसून सत्र से संबंधित बैठकों में व्यस्तता के कारण मुलाकात नहीं हो सकी थी।
ट्रस्ट पदाधिकारियों से पूछताछ
जांच के दौरान कई प्रमुख व्यक्तियों से पूछताछ की गई है। इनमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के बाद इन सभी को अगले आदेश तक अयोध्या नहीं छोड़ने की मौखिक चेतावनी दी गई थी। हालांकि जानकारी मिली है कि गोपाल राव अयोध्या से अपने गृह राज्य कर्नाटक चले गए हैं। इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ट्रस्ट भंग करने की मांग
मामले ने धार्मिक संगठनों के बीच भी बहस छेड़ दी है। धर्म सेना के अध्यक्ष संतोष दुबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि चढ़ावे में अनियमितताओं के आरोपों की पुष्टि होती है तो ट्रस्ट की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन पांडे ने दावा किया कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जानकारी "स्वयं प्रभु श्रीराम ने अखिलेश यादव को कराई थी।" पवन पांडेय ने इससे पहले भी चढ़ावे में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उनके अनुसार मंदिर से लगभग 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की राशि गायब हो सकती है।
आरोपों से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब पवन पांडेय ने सार्वजनिक रूप से चढ़ावे में कथित चोरी का आरोप लगाया। बाद में अखिलेश यादव ने भी मामले में सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई। दूसरी ओर, चंपत राय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ट्रस्ट के संज्ञान में ऐसी कोई पुष्टि नहीं आई है और सभी वित्तीय प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जाती हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मांगी रिपोर्ट
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेता डाॅ रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली।
जांच रिपोर्ट पर टिकी देशभर की नजर
राम मंदिर देश की आस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी आरोप को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। फिलहाल आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।अब सभी की निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्या वास्तव में चढ़ावे में कोई वित्तीय अनियमितता हुई है या यह मामला केवल आरोपों तक सीमित है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
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