वनकर्मियों को बड़ी राहत: ड्यूटी में गोली चलाने पर अब सीधे एफआईआर नहीं; पहले होगी मजिस्ट्रियल जांच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ने वनकर्मियों को बड़ी कानूनी राहत देते हुए नई अधिसूचना जारी की है। अब वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान यदि किसी वनकर्मी को हथियार का इस्तेमाल करना पड़ता है, तो उसके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज नहीं होगी। पहले कार्यपालिक दंडाधिकारी (एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) से पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यह तय होगा कि हथियार का इस्तेमाल ड्यूटी के दौरान आवश्यक और परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं।
यदि जांच में यह साबित नहीं होता कि हथियार का इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण, अनावश्यक या अनुचित था, तो संबंधित वनकर्मी के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मजिस्ट्रियल जांच के बाद ही होगी पुलिस कार्रवाई
नई व्यवस्था के तहत ड्यूटी के दौरान गोली चलाने की हर घटना की जांच संबंधित क्षेत्र के कार्यपालिक दंडाधिकारी करेंगे। जांच रिपोर्ट में यदि वनकर्मी की गलती सामने आती है और राज्य सरकार उसे स्वीकार करती है, तभी पुलिस एफआईआर दर्ज करने या गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई कर सकेगी।
इन अधिकारियों को मिलेगा संरक्षण
नई अधिसूचना का लाभ वन विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलेगा। इसमें वनरक्षक, वनपाल, उप वन क्षेत्रपाल, वन क्षेत्रपाल, सहायक वन संरक्षक, उप वनमंडल अधिकारी, वनमंडल अधिकारी, मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक सहित वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अन्य अधिकारी शामिल हैं।
सरकार ने क्यों बदले नियम?
सरकार का कहना है कि जंगलों में अवैध कटाई, वन माफिया, शिकारियों और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वनकर्मियों को कई बार जानलेवा परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे हालात में उन्हें अपनी सुरक्षा और वन संपदा की रक्षा के लिए हथियार का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। ईमानदारी से ड्यूटी निभाने वाले कर्मचारियों को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बचाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।
लटेरी गोलीकांड के बाद तेज हुई थी बहस
वनकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई का मुद्दा वर्ष 2022 के विदिशा के लटेरी गोलीकांड के बाद प्रमुखता से सामने आया था। 9 अगस्त 2022 को लकड़ी तस्करी रोकने गई वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच विवाद के दौरान गोली चलने से आदिवासी युवक चैन सिंह की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद डिप्टी रेंजर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
न्यायिक जांच आयोग भी बना था
इस घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने न्यायिक जांच आयोग गठित किया था, जिसे यह जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी कि बल प्रयोग उचित था या नहीं और यदि नहीं, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
सुप्रीम कोर्ट और बीएनएसएस के अनुरूप फैसला
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के प्रावधानों के अनुरूप जारी की गई है। इसका उद्देश्य वन और वन्यजीव संरक्षण के दौरान कर्तव्य निभाने वाले कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा देना है, जबकि किसी भी दुरुपयोग की स्थिति में जांच के बाद कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
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