प्रतिष्ठित स्कूल में फूड प्वाइजनिंग का बड़ा मामला: इतने बच्चे बीमार; दो दिन तक दबा रहा घटनाक्रम, किचन सील, खाद्य सामग्री के नमूने जब्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में 150 से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बच्चों को स्कूल में भोजन ग्रहण करने के बाद उल्टी, दस्त, गले में संक्रमण, घबराहट और पेट संबंधी समस्याएं होने लगीं। मामला शनिवार से शुरू हुआ, लेकिन इसकी जानकारी व्यापक स्तर पर सोमवार को सामने आई, जब अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और सोशल मीडिया पर शिकायतें साझा कीं।
वॉट्सएप ग्रुप से खुली परतें
जानकारी के मुताबिक, 20 जून को स्कूल में भोजन करने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआत में अभिभावकों को यह स्पष्ट नहीं था कि समस्या स्कूल के भोजन से हुई है या किसी अन्य कारण से। लेकिन जैसे-जैसे बच्चों में एक जैसे लक्षण सामने आने लगे, अभिभावकों ने स्कूल के निजी वॉट्सएप ग्रुप पर जानकारी साझा करनी शुरू की।
कुछ ही घंटों में कई परिवारों ने बताया कि उनके बच्चों को भी समान स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। इसके बाद चिंता बढ़ी और अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन को ई-मेल के माध्यम से शिकायतें भेजना शुरू कर दिया।
रविवार को भी आती रहीं शिकायतें
रविवार को स्कूल बंद होने के बावजूद बच्चों के बीमार होने की शिकायतों का सिलसिला जारी रहा। सूत्रों के अनुसार सोमवार तक स्कूल प्रबंधन को लगभग 35 औपचारिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी थीं। कुछ बच्चे सोमवार को स्कूल पहुंचे, लेकिन अस्वस्थ महसूस करने पर उन्हें वापस घर भेजना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि शिशुकुंज स्कूल शहर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शामिल है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योगपतियों, चिकित्सकों, इंजीनियरों और अन्य उच्च प्रोफाइल परिवारों के बच्चे अध्ययन करते हैं।
अभिभावकों के विरोध के बाद हरकत में आया प्रशासन
सोमवार दोपहर बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल परिसर पहुंच गए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कई अभिभावकों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और शिक्षा विभाग को भी शिकायतें भेजीं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की संयुक्त टीम स्कूल पहुंची। अधिकारियों ने लगभग चार घंटे तक स्कूल परिसर में जांच की और भोजन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं का निरीक्षण किया।
23 खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे
जांच टीम ने स्कूल के किचन, मेस और खाद्य सामग्री भंडारण क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान पनीर, दूध, आइसक्रीम, दाल, कोफ्ते, चावल, रोटी, मसाले तथा पेयजल सहित कुल 23 नमूने एकत्रित कर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चों के बीमार पड़ने के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
जांच में मिली एक्सपायर्ड सामग्री
निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को किचन में 10 पैकेट एक्सपायर्ड मसाले तथा दो पैकेट एक्सपायर्ड नमकीन मिले। इसे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मानते हुए प्रशासन ने स्कूल के किचन को आगामी आदेश तक सील कर दिया। साथ ही संबंधित प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
चौथी कक्षा तक के बच्चों पर ज्यादा असर
सूत्रों के अनुसार बीमार बच्चों में अधिकांश चौथी कक्षा या उससे कम आयु वर्ग के हैं। इनकी उम्र लगभग 10 से 11 वर्ष बताई जा रही है। अभिभावकों के वॉट्सएप समूह में साझा की गई सूची में 64 बच्चों के नाम और स्कॉलर नंबर तक दर्ज किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र के बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। यदि भोजन में किसी प्रकार का संक्रमण या दूषण हो तो उसका प्रभाव सबसे पहले इसी आयु वर्ग में दिखाई देता है।
डेयरी उत्पादों पर केंद्रित हुई जांच
जांच अधिकारियों का मानना है कि केवल एक्सपायर्ड मसाले या नमकीन इतने बड़े स्तर पर बच्चों के बीमार होने का एकमात्र कारण नहीं हो सकते। इसी कारण जांच का मुख्य फोकस अब डेयरी उत्पादों पर किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में यदि फ्रीजर या कोल्ड स्टोरेज का तापमान निर्धारित स्तर पर न रखा जाए तो दूध, पनीर और आइसक्रीम जैसे उत्पाद जल्दी खराब हो सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से फूड प्वाइजनिंग, उल्टी-दस्त और पेट के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं।
स्कूल प्रबंधन ने जांच रिपोर्ट का इंतजार करने को कहा
स्कूल की को-ऑर्डिनेटर रिचा तिवारी ने कहा कि स्कूल में प्रतिदिन तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों सहित लगभग 3800 लोग भोजन ग्रहण करते हैं। उन्होंने दावा किया कि संस्थान में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता के सभी मानकों का पालन किया जाता है।
उनके अनुसार स्कूल में आरओ का पानी उपयोग किया जाता है तथा पूरे परिसर में सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने का वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
प्रशासन ने जारी की हेल्पलाइन
घटना के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने नागरिकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि स्कूल, हॉस्टल, मेस, कैंटीन या अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में गंदगी, मिलावट या खाद्य सुरक्षा संबंधी अनियमितता दिखाई देने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। इसके लिए प्रशासन ने कलेक्टर हेल्पलाइन 0731-181 जारी की है।
प्रशासनिक जांच से तय होगी जिम्मेदारी
शहर के सबसे चर्चित शैक्षणिक संस्थानों में से एक में सामने आए इस मामले ने स्कूलों में संचालित भोजन व्यवस्थाओं की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें प्रयोगशाला रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
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