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भोजशाला मामले में हाईकोर्ट करेगा साइट विजिट: इस दिन से शुरू होगी अंतिम सुनवाई; आखिर क्या कहा कोर्ट ने

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 मार्च 2026, 2:55 pm
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भोजशाला मामले में हाईकोर्ट करेगा साइट विजिट

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मामले को बेहतर ढंग से समझने के लिए न्यायालय की बेंच स्वयं भोजशाला परिसर का निरीक्षण करेगी। इसके बाद 2 अप्रैल से मामले की अंतिम सुनवाई शुरू की जाएगी।

जस्टिस शुक्ला और अवस्थी की बेंच में सुनवाई
मामले की सुनवाई जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट में लंबी बहस चली। अदालत ने तय किया कि अगली सुनवाई में पहले याचिकाकर्ताओं को सुना जाएगा, उसके बाद प्रतिवादियों और जरूरत पड़ने पर इंटरविनर पक्ष को भी सुना जाएगा।

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि कई लोग अनावश्यक रूप से इंटरविनर बनकर सामने आ रहे हैं, जिससे मामले की सुनवाई में देरी हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि सु्प्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्द सुनवाई के निर्देश दिए हैं, इसलिए प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं किया जाएगा।

कई पक्षकार और अधिवक्ता रहे मौजूद
मामले में काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह सहित अन्य याचिकाकर्ता, मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री पक्षकार हैं।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा
सुनवाई के दौरान एएसआई की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन उपस्थित रहे, जबकि राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन भी अदालत में मौजूद रहीं। हिंदू फ्रंट की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी उपस्थित थे, जबकि अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हुए।

एएसआई रिपोर्ट पर मांगी गई थीं आपत्तियां
इससे पहले 23 फरवरी को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव देने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और उसकी प्रतियां सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई प्रक्रिया
इस मामले में 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच को तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। इसके बाद 18 फरवरी को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए इंदौर बेंच को सौंप दिया था।

करीब 100 दिन चला एएसआई का सर्वे
हाईकोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने 22 मार्च 2024 से भोजशाला परिसर और उसके आसपास 50 मीटर क्षेत्र में वैज्ञानिक सर्वे किया था। यह सर्वे लगभग 98 से 100 दिनों तक चला, जिसमें सीमित उत्खनन, संरचनात्मक जांच और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया गया।

रिपोर्ट में मिले कई ऐतिहासिक साक्ष्य
एएसआई की रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के कई ऐतिहासिक प्रमाण मिलने की बात कही गई है। परिसर में संस्कृत, प्राकृत, नागरी, अरबी और फारसी भाषाओं के शिलालेख मिले हैं।

56 अरबी-फारसी शिलालेख भी पाए गए
रिपोर्ट के अनुसार यहां 56 अरबी-फारसी शिलालेख भी पाए गए हैं, जिनमें धार्मिक दुआएं और वाक्य लिखे हैं। वहीं संस्कृत और प्राकृत के अभिलेखों में पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख भी सामने आए हैं। कुछ पत्थरों पर पुरानी लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किए जाने के संकेत भी मिले हैं।

क्या है भोजशाला विवाद
धार शहर में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। दोनों समुदाय यहां धार्मिक अधिकारों का दावा करते रहे हैं, जिसके चलते मामला अदालत में विचाराधीन है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थल मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक और शैक्षणिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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