पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों को एक बार फिर झटका: पुलिस मुख्यालय ने दिया ऐसा आदेश; पहले भी कई बार हो चुका है ऐसा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर से डीएसपी पद पर पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों को एक बार फिर झटका लगा है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने कार्यवाहक उच्च पद प्रभार (ऑफिशिएटिंग प्रमोशन) की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित कर दी है।
इस निर्णय से 95 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद का कार्यवाहक प्रभार मिलने की संभावना फिलहाल समाप्त हो गई है। साथ ही विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) के 92 सब इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर पद का दिया गया कार्यवाहक प्रभार भी वापस लिया जा सकता है।
जीएडी के नए निर्देशों के बाद बदला फैसला
जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में कार्यवाहक उच्च पद प्रभार की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया था। इसके तहत पात्र अधिकारियों को नियमित पदोन्नति तक उच्च पद का प्रभार दिए जाने की तैयारी थी। हालांकि, 30 जून 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी नए निर्देशों के बाद पीएचक्यू ने अपना निर्णय वापस लेते हुए पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
जीएडी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की सभी पदोन्नतियां मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार ही की जाएंगी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय महाधिवक्ता की विधिक राय के आधार पर लिया गया है।
पहले भी कई बार रुकी और शुरू हुई प्रक्रिया
पुलिस विभाग में कार्यवाहक उच्च पद प्रभार की व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों से लगातार असमंजस की स्थिति में रही है। वर्ष 2021 में जारी निर्देशों के आधार पर अधिकारियों को अस्थायी रूप से उच्च पदों का प्रभार दिया जाता रहा। बाद में पदोन्नति नियमों में बदलाव और न्यायालयीन प्रक्रियाओं के चलते यह व्यवस्था रोक दी गई थी।
हाल ही में इसे फिर से लागू करने की तैयारी की गई थी, लेकिन जीएडी के नए आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने एक बार फिर सभी इकाइयों को कार्यवाहक प्रभार से जुड़ी कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
95 इंस्पेक्टरों की पदोन्नति फिर टली
पुलिस मुख्यालय ने पहले 95 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद का कार्यवाहक प्रभार देने का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा था। नए निर्देशों के बाद यह प्रस्ताव प्रभावहीन हो गया है। अब इन अधिकारियों को नियमित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना होगा।
नियमित प्रक्रिया से होगी पदोन्नति
अब गृह विभाग पदोन्नति की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करेगा। इसके तहत सबसे पहले संबंधित अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) मंगाई जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) को भेजा जाएगा।
आयोग की सहमति मिलने के बाद विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित होगी, जिसमें पात्र अधिकारियों की पदोन्नति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया समय लेने वाली है, जिससे पदोन्नति में और विलंब हो सकता है।
एसएएफ के 92 अधिकारियों पर भी असर
पुलिस मुख्यालय के नए आदेश का असर विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) पर भी पड़ा है। एसएएफ के महानिरीक्षक द्वारा 1 जुलाई को जारी आदेश के तहत 92 सब इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर पद का कार्यवाहक प्रभार दिया गया था। यह आदेश अब वापस लिया जा सकता है, क्योंकि वह पीएचक्यू के पूर्व निर्देशों के आधार पर जारी हुआ था।
अधिकारियों में बढ़ी निराशा
लगातार बदलते निर्णयों के कारण पुलिस विभाग के उन अधिकारियों में असमंजस और निराशा का माहौल है, जो लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कार्यवाहक पदोन्नति व्यवस्था पर बार-बार रोक लगने से कई अधिकारियों के कैरियर पर भी असर पड़ रहा है।
फिलहाल पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि आगे की सभी पदोन्नति प्रक्रियाएं सामान्य प्रशासन विभाग के नए निर्देशों और मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के अनुसार ही संचालित की जाएंगी। अब विभागीय अधिकारियों की निगाहें गृह विभाग, एमपीपीएससी और विभागीय पदोन्नति समिति की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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