इतने करोड़ के इंजेक्शन के इंतजार में जिंदगी से जंग लड़ रही मासूम: हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य सरकार से मांगा है जवाब, इस दिन होनी है अगली सुनवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सिर्फ साढ़े तीन साल की उम्र में अनिका शर्मा जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA Type-2) जैसी दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से पीड़ित यह मासूम पिछले कई महीनों से एक ऐसे इंजेक्शन का इंतजार कर रही है, जिसकी कीमत करीब 9.5 करोड़ रुपए है। परिवार आर्थिक रूप से इस भारी भरकम इलाज का बोझ उठाने में असमर्थ है और मदद की उम्मीद में सरकार, समाज और न्यायालय के दरवाजे खटखटा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने दोनों सरकारों को स्पष्ट और विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की गई है।
कोर्ट ने पूछा- आखिर बच्ची की जान बचाने के लिए क्या कर रही हैं सरकारें?
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जानने की कोशिश की कि एक गंभीर बीमारी से जूझ रही बच्ची की मदद के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि यह केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला है।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कुशल गोयल और केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अनुज भार्गव उपस्थित हुए। हालांकि जब राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें अब तक शासन से कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं, तो कोर्ट ने इस पर असंतोष जताया।
अदालत ने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में भी सरकारों से पूछा गया था कि मानवता के आधार पर वे बच्ची के इलाज में कितनी सहायता कर सकती हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया।
एम्स की अनुपस्थिति पर भी उठे सवाल
मामले का एक चिंताजनक पहलू यह भी रहा कि लगातार दूसरी सुनवाई में भी एम्स (AIIMS) की ओर से कोई प्रतिनिधि या अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने पहले ही एम्स को नोटिस जारी कर मामले में पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद एम्स की ओर से कोई जवाब नहीं आने पर अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जताई।
हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रहा खतरा
अनिका की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने अदालत को बताया कि बच्ची की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। SMA टाइप-2 एक ऐसी बीमारी है जिसमें धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने पर स्थिति जानलेवा हो सकती है।
वकीलों ने अदालत को बताया कि इलाज में देरी का मतलब बच्ची की सेहत पर स्थायी और गंभीर असर पड़ना है। इसलिए मामले में तत्काल हस्तक्षेप और सहायता आवश्यक है।
डॉलर बढ़ा तो बढ़ गई इलाज की कीमत
परिजनों के मुताबिक जब इलाज की प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब आवश्यक दवा और उपचार की लागत करीब 9 करोड़ रुपए थी। लेकिन डॉलर के लगातार मजबूत होने से अब यह राशि बढ़कर लगभग 9.5 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।
परिवार का कहना है कि समाज और दानदाताओं की मदद से बड़ी राशि जुटाई जा चुकी है, लेकिन अभी भी लगभग 2 करोड़ रुपए की कमी बनी हुई है। इसी कारण इलाज शुरू होने में देरी हो रही है।
लिक्विड डाइट पर जी रही है अनिका
डॉक्टरों के अनुसार SMA के इलाज में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन निर्धारित वजन सीमा के भीतर सबसे प्रभावी माना जाता है। इसी वजह से अनिका को विशेष निगरानी में रखा गया है और उसका वजन नियंत्रित रखने के लिए लिक्विड डाइट दी जा रही है। परिवार का हर दिन इस चिंता में गुजर रहा है कि कहीं इलाज मिलने से पहले समय हाथ से न निकल जाए।
मदद के वादे और अधूरी उम्मीदें
अनिका के मामले ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और दानदाताओं ने मदद के आश्वासन दिए, लेकिन परिवार का कहना है कि कई घोषणाएं अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी हैं।
इसी बीच हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट संकेत दिया है कि यह मामला केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसमें मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
30 जून पर टिकी निगाहें
अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 30 जून को होगी। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों से स्पष्ट जवाब मांगा है कि दुर्लभ बीमारी से जूझ रही इस बच्ची की मदद के लिए वे क्या कदम उठाने को तैयार हैं।
उधर, अनिका का परिवार, सामाजिक संगठन और हजारों शुभचिंतक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद अदालत की सख्ती के बाद कोई ऐसा रास्ता निकले, जिससे इस मासूम को समय रहते जीवनदान मिल सके।
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