गुर्गे को बचाने की कोशिश या केस भटकाने का खेल: आज कोर्ट में गुटखा माफिया और टैक्स चोर वाधवानी की ‘नई चाल’ पर सुनवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गुटखा कारोबार, फर्जी अखबारी सर्कुलेशन और करोड़ों की कथित मनी लांड्रिंग का खेल करने वाला टैक्स चोर किशोर वाधवानी आज एक बार फिर कोर्ट में अपने सबसे अहम कानूनी दांव के साथ खड़ा होगा। विशेष कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस बार मामला सिर्फ आरोपों का नहीं, बल्कि पूरे केस की दिशा बदलने की कोशिश का बनता नजर आ रहा है।
पिछली सुनवाई में आरोपी वाधवानी ने एक ऐसा आवेदन पेश किया, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। उसने अपने ही नेटवर्क से जुड़े आरोपी पंकज मजेपुरिया को बेगुनाह बताते हुए कोर्ट से उसके खिलाफ दर्ज आरोप खत्म करने की मांग की थी।
अब इस आवेदन पर आज बहस होनी है, जो केस की आगे की दिशा तय कर सकती है। आज कोर्ट में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या आरोपी पक्ष अपने ही सहयोगी को बचाने में सफल होता है या नहीं।
मुलजिम वाधवानी के आवेदन में दावा किया गया है कि पंकज मजेपुरिया को गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया और उसके खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं है। एजेंसियों के मुताबिक पंकज मजेपुरिया पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा रहा है और वित्तीय लेनदेन व सर्कुलेशन से जुड़े मामलों में उसकी भूमिका की जांच की जा चुकी है। अब कोर्ट में आज इन दोनों पक्षों के बीच सीधी कानूनी टक्कर देखने को मिलेगी।
आरोप तय होने से पहले दांव, रणनीति या मजबूरी?
मामला इस समय उस स्टेज पर है, जहां कोर्ट में आरोप तय होने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में इस तरह का आवेदन देना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक इस चरण पर नए आवेदन लाना, सह-आरोपियों को बचाने की कोशिश करना और नए मुद्दे खड़े करना अक्सर सुनवाई को लंबा खींचने और केस को जटिल बनाने की रणनीति होती है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट इस कदम को किस नजर से देखती है।
फर्जी विज्ञापन, कागजों पर बनाई करोड़ों की कमाई
जांच में यह भी सामने आया कि कई विज्ञापन ऐसे दिखाए गए, जो वास्तव में कभी प्रकाशित ही नहीं हुए। इन फर्जी विज्ञापनों के नाम पर बिल तैयार किए गए और करोड़ों रुपए की आय कागजों में दिखाई गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम कालेधन को वैध दिखाने के लिए खड़ा किया गया।
11.66 करोड़ की मनी लांड्रिंग का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच करीब 11.66 करोड़ रुपए की मनी लांड्रिंग की गई। इस दौरान अखबार की करीब 2.80 करोड़ प्रतियों की बिक्री दिखाते हुए प्रति कॉपी दो रुपए के हिसाब से आय दर्शाई गई। यह पूरा खेल कागजों पर एक वैध कारोबार दिखाने के लिए किया गया बताया जा रहा है।
2002 करोड़ का टैक्स नोटिस
मामला तब और गंभीर हो गया, जब सेंट्रल जीएसटी और एक्साइज कमिश्नरेट ने करीब 2002 करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड का नोटिस जारी किया। इसे प्रदेश की सबसे बड़ी टैक्स कार्रवाई में गिना जा रहा है। इसी के बाद यह पूरा मामला बड़े आर्थिक अपराध के रूप में सामने आया।
अखबार की आड़ में कागजों पर खड़ी ‘हकीकत’
जांच एजेंसियों के अनुसार वाधवानी समूह ने अपने अखबार ‘दबंग दुनिया’ को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल किया, जिसे कागजों में कुछ और और जमीन पर कुछ और दिखाया गया। आरोप है कि इस अखबार का वास्तविक सर्कुलेशन बेहद कम था, लेकिन दस्तावेजों में इसे कई गुना बढ़ाकर दिखाया गया। जहां असल में 5 से 8 हजार प्रतियां बिकने की बात सामने आई, वहीं रिकॉर्ड में 60 हजार से 1 लाख प्रतियां तक दर्शाई गईं। यही अंतर जांच का सबसे बड़ा आधार बना।
हाई कोर्ट में चुनौती, लेकिन जांच जारी
टैक्स चोर वाधवानी ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। हालांकि हाई कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से इनकार करते हुए एजेंसियों को जांच जारी रखने की अनुमति दे दी है। यानी कानूनी लड़ाई अब दो स्तरों पर चल रही है- कोर्ट और जांच एजेंसियां। आज होने वाली सुनवाई इस केस में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
अगर कोर्ट आवेदन को खारिज करती है, तो आरोपी पक्ष को झटका लगेगा और अगर स्वीकार करती है, तो केस की दिशा बदल जाएगी। यानी आज का दिन इस पूरे मामले के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है। यह मामला अब सिर्फ आरोपों और जांच तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि कोर्ट में रणनीति और सच्चाई के बीच सीधी लड़ाई बन गया है।
एक तरफ जांच एजेंसियां दस्तावेजों और सबूतों के जरिये पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष कानूनी दांव-पेंच के जरिये अपने बचाव की पूरी कोशिश कर रहा है।
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