पांच साल पुराने हत्याकांड के सभी आरोपी बरी: कोर्ट ने कहा- गंभीर संदेह भी सजा का आधार नहीं; अभियोजन नहीं जोड़ सका सबूतों की कड़ी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खुड़ैल थाना क्षेत्र के करीब पांच साल पुराने लव उर्फ लवकुश राठौर हत्याकांड में जिला कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों का सामना कर रहे सभी पांच आरोपियों को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को केवल आशंका या गंभीर संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन को आरोप संदेह से परे साबित करना जरूरी है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी और विश्वसनीय कड़ी स्थापित नहीं कर सका। कई महत्वपूर्ण गवाह भी अपने पूर्व बयानों से मुकर गए और उन्होंने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया।
प्रेम विवाह से नाराज होकर हत्या करने का था आरोप
अभियोजन के मुताबिक घटना 3 से 5 फरवरी 2021 के बीच की थी। दावा किया गया था कि प्रेम विवाह से नाराज होकर आरोपियों ने लव उर्फ लवकुश राठौर की हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव को जंगल में ले जाकर जला दिया गया।
बाद में डीएनए जांच के जरिए शव की पहचान लवकुश के रूप में की गई। पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों को मामले से जोड़ते हुए हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप लगाए थे।
कोर्ट में नहीं जुड़ सकी परिस्थितिजन्य सबूतों की कड़ी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन जिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को अपराध से जोड़ रहा था, उनकी पूरी कड़ी स्थापित नहीं हो सकी।
कई महत्वपूर्ण गवाह अपने पुराने बयानों से पलट गए। इसके अलावा कथित प्रेम विवाह को हत्या की ठोस वजह साबित करने के लिए भी कोई ऐसा विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका, जिससे आरोपियों की भूमिका संदेह से परे साबित होती।
2024 में गिरफ्तारी के बाद भी नहीं मिला कोई नया ठोस तथ्य
कोर्ट ने पुलिस की जांच और आरोपियों से हुई कथित बरामदगी पर भी गौर किया। आरोपियों की वर्ष 2024 में गिरफ्तारी के बाद उनके कथित मेमोरेंडम के आधार पर ऐसा कोई नया तथ्य सामने नहीं आया, जो उन्हें सीधे हत्या से जोड़ता हो।
अभियोजन ने जिन वस्तुओं की बरामदगी दिखाई, उनमें से संबंधित वस्तुएं पुलिस वर्ष 2021 में ही घटनास्थल से जब्त कर चुकी थी। ऐसे में अदालत ने माना कि इन बरामदगियों से अभियोजन के मामले को कोई विशेष मजबूती नहीं मिली।
कोर्ट बोला- दो निष्कर्ष संभव हों तो आरोपी के पक्ष वाला माना जाएगा
कोर्ट ने 3 जुलाई को फैसला सुनाते हुए आपराधिक न्याय के महत्वपूर्ण सिद्धांत का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि आरोपों को संदेह से परे साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होती है।
यदि उपलब्ध साक्ष्यों से दो संभावित निष्कर्ष निकलते हैं, तो आरोपी के पक्ष में जाने वाले निष्कर्ष को स्वीकार किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि संदेह कितना भी गंभीर क्यों न हो, वह अपने आप में दोषसिद्धि और सजा का आधार नहीं बन सकता।
पांचों आरोपी हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप से बरी
अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाने के आधार पर कोर्ट ने अर्जुन वास्केल, रमेश वास्केल, दिनेश वास्केल, मुकेश वास्केल और महेश गोयल को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
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