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इस देश पर लगातार छठी रात एयरस्ट्राइक: भारत के निवेश वाले पोर्ट पर भी हमला; कंट्रोल टावर को बनाया निशाना

KHULASA FIRST

संवाददाता

17 जुलाई 2026, 10:57 am
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इस देश पर लगातार छठी रात एयरस्ट्राइक

खुलासा फर्स्ट, तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी।
अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों की मदद से ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

हमलों के दौरान भारत के रणनीतिक निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर भी मिसाइल हमला हुआ। ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, पोर्ट के मैरिटाइम कंट्रोल टावर को निशाना बनाया गया। पिछले एक सप्ताह में इस कंट्रोल टावर पर यह तीसरा हमला बताया जा रहा है।

CENTCOM के अनुसार, इस अभियान में तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स हब और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

पिछले 24 घंटे के अपडेट

1. ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी
ईरानी सांसद बेहनाम सईदी ने कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया, तो अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने इसे "कत्लेआम" की चेतावनी बताते हुए कड़ा जवाब देने की बात कही।

2. बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर संकट के संकेत
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि यदि अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे को निशाना बनाता है, तो बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की तैयारी रखें। इससे वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।

3. होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटी
समुद्री डेटा कंपनी केप्लर के अनुसार, बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट से केवल 9 जहाज गुजरे, जबकि मंगलवार को यह संख्या 13 थी। इससे क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिम का संकेत मिल रहा है।

4. भारत ने भारतीय नाविकों की तैनाती रोकी
भारत सरकार ने एहतियातन होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं।

5. कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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