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उम्र इतनी और हरकत ऐसी: कोर्ट ने 78 बरस के बुजुर्ग को कैसी सजा दी; बालिका के साथ क्या करता था

KHULASA FIRST

संवाददाता

04 जून 2026, 11:42 am
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उम्र इतनी और हरकत ऐसी

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
12 वर्षीय बालिका का पीछा करने, छेड़छाड़ करने और अशोभनीय इशारे करने के मामले में पॉक्सो स्पेशल कोर्ट इंदौर ने 78 वर्षीय आरोपी को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर 30 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश रमा जयंत मित्तल ने 30 मई को फैसला सुनाया, जिसका आदेश 3 जून को जारी किया गया।

सामाजिक संस्था के जरिए सामने आया मामला
घटना 30 अक्टूबर 2023 को उजागर हुई, जब इंदौर की एक सामाजिक संस्था की प्रतिनिधि पीड़िता के घर पहुंची और उसकी मां को बेटी के साथ अनुचित व्यवहार की जानकारी दी। संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो देखने के बाद मां ने बेटी से बातचीत की। तब बालिका ने आरोपी की हरकतों का खुलासा किया।

पीड़िता ने बताया कि पड़ोस में रहने वाला आरोपी प्रभाकर बापट (78) स्कूल आते-जाते उसका पीछा करता था। वह रास्ते में रोककर बातचीत की कोशिश करता और बस स्टॉप तक साथ जाता था। कई बार वह उसके बेहद करीब आने का प्रयास करता, जिससे वह असहज और भयभीत महसूस करती थी।

पैसे देकर बहलाने का प्रयास
बालिका के अनुसार आरोपी ने एक दिन बस स्टॉप तक उसके साथ जाकर उसे 10 रुपए देकर बहलाने की कोशिश की। इसके अलावा वह लगातार उसके पीछे-पीछे आता रहता था। पीड़िता ने बताया कि आरोपी की हरकतों से वह डरी हुई थी, लेकिन शुरुआत में उसने परिवार को कुछ नहीं बताया। अक्टूबर 2023 में आरोपी ने उसके घर के बाहर आकर आपत्तिजनक इशारे भी किए। 27 अक्टूबर को बस स्टॉप के पास भी उसने अनुचित व्यवहार किया, जिसका बालिका ने विरोध किया।

शिकायत के बाद दर्ज हुआ प्रकरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता की मां ने थाना परदेशीपुरा में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354-घ, 341, पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया।

जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया। प्रत्यक्ष एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्र किए गए और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।

नौ गवाहों की गवाही से दोष सिद्ध
प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। कोर्ट ने पाया कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी की दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय हैं।

कोर्ट का सख्त संदेश
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 11(4)/12 और 9(एल)/10, भादंवि की धारा 354 तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं में दोषी करार दिया। कोर्ट ने अधिकतम पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए 30 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक वर्षा पाठक ने पैरवी की।

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