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होटलों के बाद अब 64 होस्टलों को नोटिस: रहवासी क्षेत्रों में नियम विरुद्ध संचालन पर निगम ने कसा शिकंजा

KHULASA FIRST

संवाददाता

17 अप्रैल 2026, 1:35 pm
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होटलों के बाद अब 64 होस्टलों को नोटिस

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खुलासा फर्स्ट ने 2022 को ही महालक्ष्मी नगर के रहवासी क्षेत्र में होटल और होस्टल संचालित होने का प्रमुखता से खुलासा किया था। चार साल बाद अब जाकर नगर निगम ने महालक्ष्मी नगर समेत अन्य कॉलोनियों में 16 से ज्यादा होटलों को सील करने की कार्रवाई की है। वहीं निगम द्वारा नियम विरुद्ध चल रहे 64 से ज्यादा होस्टलों को नोटिस दिए गए हैं। यह मामला विधानसभा में विधायक महेंद्र हार्डिया ने भी उठाया था।

उल्लेखनीय है खुलासा फर्स्ट ने लगातार खबरें प्रकाशित कर खुलासा किया था कि अनेक रहवासी क्षेत्रों में नियम विरुद्ध संचालित हो रही होटलों में अनैतिक गतिविधियां भी चल रही हैं। बाद में यह मामला विधायक महेंद्र हार्डिया ने भी विधानसभा में उठाते हुए पूछा था कि आखिर रहवासी क्षेत्रों में होटलें व होस्टल किसकी अनुमति से चल रहे हैं।

निगम की ओर से इसके जवाब में बताया गया कि इन्हें निगम की अनुमति नहीं है। इसके बाद 15 अप्रैल को भवन अधिकारी टीना सिसोदिया ने महालक्ष्मी नगर, वीणा नगर, चिकित्सक नगर, स्कीम-94 के विभिन्न सेक्टरों में 16 से ज्यादा होटलों को सील कर दिया।

भवन निरीक्षक सचिन गेहलोत व भवन अनुज्ञा, राजस्व तथा रिमूवल विभाग के अधिकारी की उपस्थिति में जिन होटलों को सील किया गया उनमें मुख्य रूप से होटल ग्रांड गिरधर, ऋषि इम्पेरियल, ईजी स्टे, कृष्णा पैलेस, गौरव, यूनिटी, ग्लोरी, कंचन, उत्सव, होटल केयर, पैरेडाइज, क्लासिक आदि शामिल हैं।

इनमें दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता था। सिसोदिया ने बताया इसके अलावा विभिन्न कॉलोनियों में चल रहे 64 ऐसे भवनों को भी नोटिस जारी किए, जिनमें होस्टल संचालित हो रहे हैं। संतोषजनक पुष्टि न होने पर इन्हें भी सील किया जाएगा।

उल्लेखनीय है पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकारों को आदेश दिया है कि रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को रोका जाए। सभी नगरीय निकाय सर्वे कर 15 मई तक हलफनामा दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट ने चैन्नई में ऐसे मामलों पर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया था। सुनवाई में कोर्ट ने पूरे देश को शामिल कर लिया है।

धड़ल्ले से हो रहा अवैध निर्माण
होटलों और होस्टलों पर कार्रवाई की गई, वहां अवैध निर्माण भी धड़ल्ले से हो रहे हैं। ये अवैध निर्माण नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड और आईडीए की जमीन पर हो रहे हैं। अवैध निर्माण तो मुख्य मार्गों पर हो रहे हैं, जहां से रोजाना आम नागरिकों के साथ अधिकारी भी निकलते हैं, लेकिन वे देखकर भी अनदेखा कर जाते हैं।

कई मामलों में होस्टलों में चल रही अवैध और अनैतिक गतिविधियों को लेकर आसपास के रहवासियों ने निगम को शिकायतें भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब उम्मीद है कि इन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई होगी।

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