जिंदगी की जंग लड़ रही साढ़े तीन साल की बालिका: घोषणा के बाद वादे से मुकर गए नेता और दानदाता; अब तो फोन तक नहीं उठाते
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
साढ़े तीन वर्षीय अनिका शर्मा जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। उसे बचाने के लिए करीब 9 करोड़ रुपए कीमत के एक इंजेक्शन की जरूरत है, लेकिन इलाज के लिए धन जुटाने की लड़ाई अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि वादों और हकीकत के बीच की कहानी भी बन गई है। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने मदद का भरोसा दिया, मंचों से घोषणाएं कीं, चेक सौंपे, लेकिन समय बीतने के साथ कई वादे अधूरे रह गए। कुछ मामलों में तो चेक बाउंस होने और फोन तक नहीं उठाने के आरोप सामने आए हैं।
दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है अनिका
अनिका शर्मा को स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) टाइप-2 नामक दुर्लभ बीमारी है। यह एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं। इस बीमारी के इलाज के लिए दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में शामिल जोलजेंस्मा (Zolgensma) इंजेक्शन की जरूरत होती है, जिसकी कीमत लगभग 9 करोड़ रुपए है।
पिछले आठ महीनों से अनिका के माता-पिता सरिता और प्रवीण शर्मा अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए समाज, संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। अब तक करीब 7 करोड़ 65 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं, लेकिन लक्ष्य अभी भी दूर है।
वादे बड़े, मदद छोटी
अनिका के पिता का कहना है कि यदि कई जनप्रतिनिधि और नेता अपनी घोषित मदद पूरी कर देते, तो अब तक इलाज की राशि लगभग पूरी हो चुकी होती। लेकिन कई लोगों ने घोषणा तो की, पर राशि नहीं पहुंची। परिवार का दावा है कि कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मदद का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में संपर्क करना बंद कर दिया। कई बार फोन किए गए, संदेश भेजे गए, लेकिन जवाब नहीं मिला।
किसने कितनी मदद की, कौन पीछे हटा
परिवार के अनुसार मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तत्काल 5 लाख रुपए की सहायता दी। विधायक मनोज पटेल ने 5.51 लाख रुपए, विधायक उषा ठाकुर ने ढाई लाख रुपए, विधायक रमेश मेंदोला ने एक लाख रुपए तथा अन्य कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी सहायता राशि प्रदान की। वहीं कुछ नेताओं के बारे में परिवार का आरोप है कि उन्होंने मदद का आश्वासन दिया लेकिन राशि नहीं पहुंची। कुछ ने भविष्य में देने की बात कहकर मामला टाल दिया।
बाउंस हुआ चेक, बढ़ी मुश्किल
मामले का सबसे चर्चित पहलू एक पार्षद पुत्र द्वारा दिया गया चेक बताया जा रहा है। परिवार का आरोप है कि 51 हजार रुपए का चेक दिया गया था, लेकिन वह बैंक में बाउंस हो गया। इसके बाद कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। परिवार का कहना है कि आर्थिक मदद के लिए बार-बार लोगों के सामने हाथ फैलाना उनके लिए बेहद पीड़ादायक अनुभव है, लेकिन बेटी की जिंदगी बचाने के लिए उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
हाईकोर्ट ने पूछा- क्या यह सरकार की लाड़ली नहीं?
मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। एक सुनवाई के दौरान अदालत में यह तर्क रखा गया कि सरकार विभिन्न सामाजिक योजनाओं पर बड़ी राशि खर्च करती है और यदि सामूहिक स्तर पर मामूली योगदान भी हो जाए तो बच्ची का इलाज संभव हो सकता है। इसी दौरान न्यायालय ने शासन पक्ष से सवाल किया था कि क्या यह बच्ची सरकार के लिए "लाड़ली" नहीं है? यह टिप्पणी व्यापक चर्चा का विषय बनी थी।
समय के खिलाफ दौड़
अनिका के मामले में सबसे बड़ी चुनौती समय है। चिकित्सकों के अनुसार यह इंजेक्शन बच्चे के वजन एक निश्चित सीमा से कम होने पर अधिक प्रभावी होता है। इसी कारण परिवार बच्ची के खान-पान पर विशेष नियंत्रण रख रहा है। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने जल्द इलाज शुरू करने की सलाह दी है। देरी होने पर बीमारी का प्रभाव बढ़ सकता है।
शहर बना उम्मीद का सहारा
हालांकि कई वादों के अधूरे रहने से परिवार निराश है, लेकिन इंदौर के हजारों लोगों, सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों ने अनिका की मदद के लिए आगे आकर उम्मीद की एक नई मिसाल भी पेश की है।
अब परिवार की निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और उन लोगों पर टिकी हैं जिन्होंने मदद का भरोसा दिया था। अनिका की जिंदगी की यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भी परीक्षा बन गई है।
भावुक सवाल
अनिका के पिता प्रवीण शर्मा कहते हैं कि हम किसी से एहसान नहीं मांग रहे, सिर्फ अपनी बेटी की जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जिन लोगों ने मदद का वादा किया था, अगर वे अपना वादा निभा दें तो शायद हमारी बेटी को नया जीवन मिल सकता है। फिलहाल इंदौर की यह नन्ही बच्ची करोड़ों रुपए के इंजेक्शन और समाज की संवेदनाओं के भरोसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है।
संबंधित समाचार

भाजपा पार्षद के घर पुलिस की दबिश:बाथरूम से मिली बड़ी मात्रा में अवैध शराब; देवर और साथी गिरफ्तार, पति फरार

फिर लड़कों से आगे बेटियां:महिला स्पर्धाओं में 10 गोल्ड; पुरुषों में 8, हॉकी ने दिलाया ओलिंपिक टिकट

चकमा देकर हथकड़ी समेत भागने के चक्कर में आरोपी के हाथ और पैर टूटे:पुलिसकर्मियों पर स्कॉर्पियो चढ़ाने वाले की करतूत

अनजान लिंक पर क्लिक करना पड़ा भारी:लगा लाखों रुपए का चूना; मोबाइल पर गेम खेल रहे थे बच्चे

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा- 2029 तक मध्य प्रदेश को नशामुक्त करेंगे:नक्सली खत्म, अब बारी है नशे की: अमित शाह

16 हजार का लोन:बदनामी से डरकर गंवाए 3.07 लाख

टीईटी के विरोध में जुटे शिक्षक:बोले-किसी भी हाल में परीक्षा नहीं देंगे; ‘सांसद-विधायक पेंशन ले रहे तो हम क्यों नहीं?’

MP में सार्वजनिक परिवहन का होगा बड़ा विस्तार:2031 तक इतनी बसों का लक्ष्य; मुख्यमंत्री का बड़ा अपडेट

जीतू पटवारी कांग्रेस के मेल राखी सावंत:भाजपा नगर अध्यक्ष ने पीसीसी चीफ पर साधा निशाना

अपोलो टावर में 500 किलो का अवैध जंगला बना खतरे की घंटी:निगम अफसरों की साठगांठ से हो रहा अवैध निर्माण, शिकायतों के बाद भी मूकदर्शक

आईडीए की दोहरी नीति पर उठे सवाल:छात्रों की गूंज के लिए 14 लाख वसूले पटाखा कारोबारियों पर करीब 60 लाख बकाया फिर भी जमीन देने की तैयारी

सड़क पर कब्जा व्यवस्था धराशायी:भंवरकुआं पर रेंगती जिंदगियां, जिम्मेदार बेखबर

इस पार्टी ने राज्यसभा के लिए इतने उम्मीदवार किए घोषित:इनके नाम किए घोषित

दिग्गज फिल्ममेकर का निधन:95 साल की उम्र में ली अंतिम सांस;कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि

हथकड़ी में नवीन ओझा की निकली सारी हेकड़ी:रिमांड अवधि में आरोपी को उसके घर लेकर पहुंची पुलिस

बहादुर कैप्टन ने इस देश के पीएम को सुनाई खौफनाक आपबीती:को-पायलट के खतरनाक इरादे बताए

MP में आयुष्मान मरीजों के इलाज पर संकट:इस दिन से प्रदेश में बंद होगा उपचार; 1000 एंबुलेंस से दिल्ली कूच की तैयारी

उठाए सवाल इस एप और नेट की डिजिटल प्रविष्टियां उपलब्ध नहीं:लाखों मतदाताओं के नाम हटाने पर आरटीआई में चुनाव कार्यालयों ने कहा

ACP पर महिला पत्रकार से छेड़छाड़ का आरोप:CJP ने थाने के बाहर जताया विरोध; पुलिस को दिया अल्टीमेटम

दूसरे पर झूठी एफआईआर दर्ज करवाने वाली रूपाली जैन अब जाएगी सलाखों के पीछे:आ गया खुद का नंबर
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!