2 पाकिस्तानी सिंधी 4 दिन के रिमांड पर: अपने ही समाज पर विवादित टिप्पणी करने वाले
KHULASA FIRST
संवाददाता

सोशल मीडिया और वाट्सएप ग्रुप्स में प्रसारित कर रहे थे आपत्तिजनक संदेश, अब खंगालेंगे मोबाइल व डिजिटल नेटवर्क
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत से विस्थापित होकर भारत में बसे सिंधी समाज के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और भ्रामक टिप्पणियां प्रसारित करने के मामले में क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार 2 पाकिस्तानी सिंधी आरोपियों को कोर्ट ने 4 दिन के रिमांड पर सौंपा है। अब क्राइम ब्रांच आरोपियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल नेटवर्क की गहन जांच करेगी।
क्राइम ब्रांच के अनुसार मामले की शुरुआत सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों और पंचायतों की शिकायत से हुई थी। समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग लगातार सोशल मीडिया और वाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से ऐसे संदेश प्रसारित कर रहे हैं, जिनसे समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विवाद की स्थिति बनने लगी है।
लालचंद छाबड़ा, पीएल राजा मांधवानी, धनेश मटाई, लालचंद टी. वाधवानी, दीपचंद चावला, भगवानदास कटारिया और नानक डावानी सहित अन्य समाजजन शामिल थे। उन्होंने क्राइम ब्रांच को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी।
वाट्सएप ग्रुप पर समाज को लेकर भ्रामक जानकारी
पुलिस जांच में पता चला कि विभिन्न वाट्सएप ग्रुपों में ऐसे संदेश और वॉइस नोट प्रसारित किए जा रहे थे, जिनमें पाकिस्तान के सिंध प्रांत से विस्थापित होकर भारत आए सिंधी समुदाय, विशेष रूप से जैकबाबाद, लाड़काना और साहीती क्षेत्र से जुड़े लोगों के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन संदेशों के जरिये समाज विशेष के खिलाफ भ्रामक जानकारी फैलाने का प्रयास किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर क्राइम ब्रांच ने राजकुमार छाबड़िया और शंकर चेलानी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया था। सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि विवादित संदेश कितने वाट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए गए। साथ ही क्या इसमें और भी लोग शामिल हैं।
आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, वॉइस नोट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
जांच का फोकस इस बात पर भी रहेगा कि संदेशों को प्रसारित करने के पीछे उद्देश्य क्या था और क्या इसके जरिये किसी समुदाय विशेष के खिलाफ वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया था। यदि अन्य लोगों की लिप्तता पाई गई तो उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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