रामनवमी दंगा केस में 11 आरोपी बरी: गवाह पलटे; शिनाख्त नहीं हुई, 4 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार जाएगी हाईकोर्ट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, खरगोन।
वर्ष 2022 में रामनवमी जुलूस के दौरान भाटवाड़ी क्षेत्र में हुई हिंसा, आगजनी और पथराव के बहुचर्चित मामले में जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब चार साल (1568 दिन) लंबी सुनवाई के बाद 11 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और घटना में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
यह मामला 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी जुलूस के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। उस समय शहर में हालात इतने बिगड़ गए थे कि 26 दिनों तक कर्फ्यू लागू करना पड़ा था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने भीड़ के साथ मिलकर पथराव, आगजनी, पेट्रोल बम फेंकने, मकानों और वाहनों में तोड़फोड़ तथा विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल किया था।
गवाहों के पलटने से कमजोर पड़ा केस
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 प्रत्यक्षदर्शी गवाह पेश किए, लेकिन इनमें से 8 प्रमुख चश्मदीद गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए। कई गवाह अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं कर सके, जबकि कुछ ने साफ कहा कि दंगाइयों के चेहरे कपड़ों से ढंके हुए थे, जिससे उनकी पहचान संभव नहीं थी।
मुख्य गवाह आकाश जैन और दिनेश जैन ने भी स्वीकार किया कि हमलावरों के चेहरे ढंके थे। वहीं एक गवाह ने दावा किया कि उसने घटना को 500 से 600 मीटर की दूरी से देखा था, जिसे अदालत ने अविश्वसनीय माना।
शिनाख्त परेड नहीं कराना भी बना बड़ा कारण
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने जांच के दौरान किसी भी आरोपी की शिनाख्त परेड नहीं कराई। ऐसे में अदालत में पहली बार की गई पहचान को भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। इसके अलावा एफआईआर में केवल 6 आरोपियों के नाम थे, जबकि बाद में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया। अभियोजन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि बाकी पांच नाम किस आधार पर जोड़े गए।
कोर्ट ने क्या कहा?
चतुर्थ अपर सत्र न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि घटना में आगजनी और नुकसान होना साक्ष्यों से साबित होता है, लेकिन किसी विशेष आरोपी की भूमिका प्रमाणित नहीं हो सकी। केवल संदेह या सामान्य बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए सभी 11 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है।
बचाव पक्ष और सरकार की प्रतिक्रिया
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि निर्दोष लोगों को गलत तरीके से आरोपी बनाया गया था, जो अदालत में साबित नहीं हो सका। वहीं शासकीय अधिवक्ता युवराज गुजराथी ने कहा कि अदालत के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है और राज्य सरकार इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देगी।
2022 में दर्ज हुआ था मामला
पुलिस ने इस मामले में इबादत अली, सादिक, अब्दुल्ला समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। हालांकि लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
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