रील में चाकू लहराया: 151 में जेल गया; बाहर आया तो कर दिया कत्ल
KHULASA FIRST
संवाददाता

हंसराज के पुराने अपराधों की फाइल खुली तो पुलिसिंग पर सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर चाकू लहराते हुए रील बनाने वाला हंसराज पुलिस की नजर में आया था। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की और उसे जेल भेज दिया। वह जेल से बाहर आया और कुछ ही समय बाद हीरानगर में तेज सिंह पर चाकू से हमला हो गया। इलाज के दौरान तेज सिंह की मौत हो गई।
अब यह घटनाक्रम पुलिसिंग की उस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, जिसमें संभावित खतरे का संकेत मिलने के बावजूद अपराधी पर आगे कितनी निगरानी रखी गई, इसका जवाब तलाशना जरूरी है।
तेज सिंह हत्याकांड में हंसराज सहित चार आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद अब हंसराज का पुराना रिकॉर्ड भी जांच में आ गया है। पुलिस को यह देखना होगा कि सोशल मीडिया पर हथियार लहराने की घटना के बाद उस पर सिर्फ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हुई या उसकी आपराधिक गतिविधियों और भविष्य के खतरे का भी आकलन किया गया था। वहीं सबसे बड़ा सवाल है कि पुलिस छोटे-मोटे अपराधियों का हाथ-पैर तोड़ जुलूस निकाल देती है तो इन जैसे दरिंदों के साथ यह काम क्यों नहीं किया।
चाकू की रील को क्या सिर्फ शो ऑफ मान लिया गया?... सोशल मीडिया पर हथियार लहराना आज अपराधियों के बीच दबदबा दिखाने का एक तरीका बन गया है। हंसराज के मामले में भी पुलिस ने रील सामने आने के बाद कार्रवाई की थी।
सवाल यह नहीं कि कार्रवाई हुई या नहीं, सवाल यह है कि क्या कार्रवाई इतनी प्रभावी थी कि उसके बाद वह दोबारा अपराध करने की स्थिति में नहीं पहुंचता? अगर कोई व्यक्ति हथियार के साथ अपनी तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक करता है और पुलिस उसे पकड़ती है तो उसके पुराने रिकॉर्ड, साथियों, हथियारों के स्रोत और संभावित आपराधिक गतिविधियों की भी पड़ताल जरूरी हो जाती है। यही वह कड़ी है जिस पर अब तेज सिंह की मौत के बाद सवाल उठ रहे हैं।
आठ महीने में पांचवीं हत्या पुलिस के सामने खड़ी हुई चुनौती
अपराधियों से निपटने का रास्ता कानून के बाहर जाकर हिंसा नहीं, बल्कि कानून के भीतर ऐसी सख्त और प्रभावी कार्रवाई है जिससे बार-बार अपराध करने वालों पर वास्तविक नियंत्रण रहे। सवाल यह है कि क्या ऐसे मामलों में केवल 151 की कार्रवाई और कुछ समय की जेल पर्याप्त है?
हीरानगर में आठ महीने में पांचवीं हत्या के बीच पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ तेज सिंह के हत्यारों को सजा तक पहुंचाने की नहीं है। चुनौती यह भी है कि जिस अपराधी के हाथ में चाकू पहले ही पुलिस देख चुकी थी उसके हाथ दोबारा चाकू तक कैसे पहुंचे?
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