सिटी बस हादसे ने खोली व्यवस्था की पोल: प्रशासन की लापरवाही से लेकर ट्रैफिक पुलिस की भूमिका पर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के सबसे व्यस्त और ऐतिहासिक इलाकों में शामिल राजवाड़ा पर रविवार को हुए सिटी बस हादसे ने एक बार फिर यहां की ट्रैफिक व्यवस्था, अतिक्रमण और सार्वजनिक परिवहन के संचालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चार लोग बस की चपेट में आए
हादसे में चार लोग बस की चपेट में आए, जिनमें एक की मौत हो गई और तीन घायल हुए।हादसे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि राजवाड़ा जैसे बेहद भीड़भाड़ वाले इलाके में बड़े वाहनों के संचालन और यातायात प्रबंधन को लेकर पर्याप्त सावधानी बरती जा रही थी या नहीं।
हादसे से पहले भी उठते रहे हैं सवाल
राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्र में ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण और वाहनों की आवाजाही को लेकर समय-समय पर नागरिकों, मीडिया और राजनीतिक दलों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संकरी सड़कों और लगातार बढ़ती भीड़ के बीच बड़े वाहनों की आवाजाही से जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में हादसे के बाद पुराने सवाल एक बार फिर सामने आ गए हैं कि क्या इस इलाके की ट्रैफिक व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जरूरत है?
चार बड़ी चुनौतियां, जिन पर ध्यान जरूरी
1. बड़े वाहनों की आवाजाही
राजवाड़ा क्षेत्र में बड़े सिटी बसों के संचालन को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। भीड़भाड़ के समय इन वाहनों की आवाजाही से ट्रैफिक दबाव बढ़ने की बात कही जाती है।
2. अतिक्रमण और अव्यवस्थित बाजार
राजवाड़ा के आसपास ठेले, अस्थायी दुकानें और अन्य अतिक्रमण के कारण सड़क और पैदल चलने की जगह प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इससे पैदल यात्रियों और वाहनों दोनों के लिए जगह कम पड़ती है।
3. ई-रिक्शा और ऑटो की अनियमित पार्किंग
स्थानीय लोगों के मुताबिक कई जगह ई-रिक्शा और ऑटो सड़क किनारे या बीच रास्ते में खड़े होकर सवारियां भरते हैं। रॉन्ग साइड से आवाजाही जैसी शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
4. ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौती
राजवाड़ा जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद यातायात को व्यवस्थित रखने की चुनौती बनी रहती है। हादसे के बाद अब पुलिस व्यवस्था और निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम पर भी उठ रहे सवाल
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी स्थानीय स्तर पर आरोप लगते रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि कार्रवाई लगातार और प्रभावी तरीके से नहीं होने के कारण अवैध कब्जे दोबारा बढ़ जाते हैं।
वहीं, नगर निगम के रिमूवल अमले पर हफ्ता वसूली और अवैध कब्जों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसे आरोप सामने आते हैं तो प्रशासन को उनकी जांच कर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
सिर्फ चालान नहीं, ट्रैफिक सुधार भी जरूरी
हादसे के बाद यातायात पुलिस की भूमिका को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैफिक व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ नियम तोड़ने वालों के चालान करना नहीं, बल्कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षित और सुचारु यातायात सुनिश्चित करना भी है।
राजवाड़ा में रॉन्ग साइड वाहन, अनियमित पार्किंग, अतिक्रमण और पैदल यात्रियों की भीड़ जैसी समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई जा रही है।
अब सवाल- हादसे के बाद क्या बदलेगा?
रविवार की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन राजवाड़ा की मौजूदा यातायात व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करेगा।
क्या बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए नए नियम बनाए जाएंगे? क्या अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर लगातार कार्रवाई होगी? क्या ई-रिक्शा और ऑटो के लिए निर्धारित व्यवस्था लागू होगी? और सबसे अहम क्या हादसे की जिम्मेदारी तय कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
राजवाड़ा सिर्फ इंदौर का प्रमुख बाजार नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान भी है। ऐसे में यहां सुरक्षा, यातायात और पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देना प्रशासन के सामने अब एक बड़ी चुनौती है।
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