देखिए वीडियो: शराब कांड में इतनी मौतों से हड़कंप; कई रसूखदार जांच के घेरे में, कलेक्टर की जवाबदेही पर भी उठे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, सागर।
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में कथित जहरीली और मिलावटी शराब से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 14 तक पहुंच गया है।
कई लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। घटना के बाद पुलिस-प्रशासन से लेकर आबकारी विभाग तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मामले में 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर की जानकारी सामने आई है। जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से शराब की सप्लाई और नकली रैपर-QR कोड के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। प्रशासन ने कुछ शराब दुकानों को सील कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
14 मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल- आखिर प्रशासन को भनक क्यों नहीं लगी?
एक साथ कई गांवों में शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ना और देखते ही देखते मौतों का आंकड़ा बढ़ना जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सवाल यह है कि अवैध और संदिग्ध शराब का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था तो प्रशासन और आबकारी विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
सामने आई रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि घटना से कुछ दिन पहले शराब ठेकेदारों की ओर से अधिकारियों को जहरीली शराब के खतरे को लेकर चेतावनी दी गई थी।
अगर यह दावा जांच में सही साबित होता है तो प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।
कलेक्टर की भूमिका और जवाबदेही पर उठे सवाल
घटना के बाद कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी अनुराग सुजानिया समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और अस्पताल में मरीजों का हाल जाना। लेकिन अब सवाल सिर्फ घटना के बाद अधिकारियों के मौके पर पहुंचने का नहीं, बल्कि घटना से पहले अवैध शराब के नेटवर्क पर निगरानी कितनी प्रभावी थी, इसका है।
जिले में शराब की अवैध बिक्री और संदिग्ध सप्लाई पर प्रभावी नियंत्रण की जिम्मेदारी प्रशासनिक व्यवस्था की होती है।
ऐसे में इतनी बड़ी त्रासदी के बाद कलेक्टर के नेतृत्व वाली जिला प्रशासनिक व्यवस्था और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की भी जांच जरूरी हो गई है।
अगर जांच में यह सामने आता है कि शिकायतों, चेतावनियों या अवैध शराब की गतिविधियों की जानकारी के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।
ललितपुर कनेक्शन से खुला शराब सप्लाई का नेटवर्क
शुरुआती जांच में सागर के बंडा क्षेत्र में पहुंची शराब का कनेक्शन उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़ता बताया जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, नकली शराब में इस्तेमाल किए गए बोतल के रैपर और QR कोड भी फर्जी पाए गए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कई शराब दुकानों को सील किया है।
मामले में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब सागर तक कैसे पहुंची, स्थानीय स्तर पर इसकी सप्लाई किसने की और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
CM मोहन यादव ने कहा- किसी दोषी को नहीं बख्शेंगे
सागर शराब कांड पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रभारी मंत्री और अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं और कहा है कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है।
सरकार की ओर से अब जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं।
विपक्ष ने सरकार पर लगाया संरक्षण देने का आरोप
घटना को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने आरोप लगाया कि अवैध शराब का कारोबार सरकार के संरक्षण में चल रहा है और इसी का नतीजा बंडा क्षेत्र में हुई मौतें हैं। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह पहले से सागर में अवैध शराब की बिक्री को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने अवैध शराब के नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की।
घर-घर स्क्रीनिंग की तैयारी, बढ़ सकती है मृतकों की संख्या
हादसे के बाद प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय की गई हैं। शराब पीने वाले लोगों की स्क्रीनिंग कराने की अपील की जा रही है, ताकि समय रहते संदिग्ध मरीजों की पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 14 लोगों की जान जाने से पहले अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जांच के साथ-साथ यह भी तय करना होगा कि अगर किसी स्तर पर प्रशासनिक या विभागीय लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
कलेक्टर से लेकर आबकारी और पुलिस तंत्र तक की भूमिका जांच के दायरे में आना इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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