माफिया के पहियों तले कुचलती वर्दी: 14 साल में सात जानें गईं; पत्थर और रेत के अवैध कारोबार से लेकर शराब तस्करी तक, हर घटना के बाद उठते हैं सुरक्षा के सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश में अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले सरकारी अमले के लिए वर्दी और सरकारी जिम्मेदारी कई बार जानलेवा साबित हुई है। अवैध पत्थर खनन हो या रेत का परिवहन, या फिर शराब की तस्करी, इन कारोबारों में लगे भारी वाहनों से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की जान जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
कार्रवाई रोकने के लिए वाहनों का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बीच अब देवास जिले के खातेगांव में थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने एक बार फिर पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
करीब 14 वर्षों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो अलग-अलग जिलों में सात ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें अवैध कारोबार से जुड़े वाहनों की चपेट में आकर पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने जान गंवाई।
इन घटनाओं में सबसे चर्चित मामला 2012 में आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह की मौत का था। इसके बाद भी ऐसी घटनाओं का सिलसिला नहीं रुका। अब इस सूची में खातेगांव टीआई दिलीप पुरी का नाम जुड़ गया है।
मुरैना से देवास तक, तारीखें बदलीं लेकिन घटनाओं की तस्वीर नहीं
2012 : आईपीएस नरेंद्र कुमार सिंह की मौत से दहल गया था प्रदेश
मुरैना जिले के बानमोर में 8 मार्च 2012 को तत्कालीन एसडीओपी नरेंद्र कुमार सिंह अवैध पत्थरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने पहुंचे थे। कार्रवाई के दौरान वाहन चालक ने ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट दी और नरेंद्र कुमार उसके नीचे दब गए। इस घटना में उनकी मौत हो गई थी। एक युवा आईपीएस अधिकारी की मौत ने अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई और अधिकारियों की सुरक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था।
2015 : आरक्षक धर्मेंद्र चौहान की गई जान
मुरैना के नूराबाद थाना क्षेत्र में 5 अप्रैल 2015 को अवैध रेत परिवहन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान आरक्षक धर्मेंद्र चौहान डंपर की चपेट में आ गए। वाहन रोकने की कोशिश के दौरान उन्हें कुचल दिया गया। इस घटना के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी।
मार्च 2016 : ग्वालियर में वनरक्षक नरेंद्र शर्मा की मौत
अवैध रेत परिवहन पर अंकुश लगाने की कोशिश में वन विभाग को भी अपने कर्मचारी की जान गंवानी पड़ी। मार्च 2016 में ग्वालियर क्षेत्र में वनरक्षक नरेंद्र शर्मा ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने पहुंचे थे। इसी दौरान वाहन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। वन विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे।
सितंबर 2018 : डिप्टी रेंजर सुबेदार सिंह कुशवाह को कुचला
मुरैना के चंबल क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन रोकने की जिम्मेदारी निभा रहे डिप्टी रेंजर सुबेदार सिंह कुशवाह की 7 सितंबर 2018 को जान चली गई। वे वन विभाग की चेक पोस्ट पर तैनात थे। इसी दौरान रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उन्हें कुचल दिया। चंबल में अवैध रेत कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले वन अमले की सुरक्षा का मुद्दा फिर चर्चा में आया।
नवंबर 2023 : शहडोल में पटवारी प्रसन्न सिंह बघेल की मौत
शहडोल जिले के गोपालपुर क्षेत्र में 25 नवंबर 2023 को अवैध रेत खनन और परिवहन की कार्रवाई करने पहुंचे पटवारी प्रसन्न सिंह बघेल को ट्रैक्टर ने कुचल दिया। राजस्व विभाग के कर्मचारी की इस तरह मौत ने यह सवाल खड़ा किया कि अवैध खनन रोकने के लिए मैदान में उतरने वाले अधिकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
मई 2024 : एएसआई महेंद्र बागरी को ट्रैक्टर ने रौंदा
शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र में मई 2024 की शुरुआत में अवैध रेत परिवहन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एएसआई महेंद्र बागरी की मौत हो गई। वे रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने पहुंचे थे। इसी दौरान चालक ने वाहन उनके ऊपर चढ़ा दिया। घटना में उनकी जान चली गई और पुलिस विभाग में शोक फैल गया।
नवंबर 2026 : खातेगांव टीआई दिलीप पुरी की मौत
अब देवास जिले के खातेगांव में थाना प्रभारी दिलीप पुरी की जान चली गई। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे उन्हें अवैध शराब तस्करी में लगे ट्रक की सूचना मिली थी। वे पुलिस टीम के साथ इंदौर-बैतूल हाईवे पर पहुंचे। नेमावर पुलिस भी इसी ट्रक का पीछा कर रही थी। पुलिस को ट्रक हाईवे पर डिवाइडर के किनारे खड़ा मिला।
टीआई पुरी ने चालक को नीचे उतरने के लिए कहा, लेकिन उसने ट्रक को डिवाइडर पर चढ़ाकर आगे बढ़ाने की कोशिश की। इसी दौरान ट्रक का पिछला पहिया पुरी के ऊपर से गुजर गया। वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब दो घंटे तक सीपीआर और उपचार के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
डॉक्टरों के अनुसार, उनके शरीर से काफी खून बह चुका था। शरीर के कई अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे और कई फ्रैक्चर भी थे। डॉक्टरों की टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
हर घटना के बाद जांच और कार्रवाई, लेकिन सुरक्षा का सवाल बरकरार
इन घटनाओं में एक गंभीर समानता दिखाई देती है। अवैध कारोबार में लगे वाहनों को रोकने के लिए जब सरकारी अमला मौके पर पहुंचता है, तो कई बार वही वाहन जानलेवा साबित होते हैं। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद अवैध खनन तथा परिवहन से जुड़े नेटवर्क की चुनौती बनी हुई है।
इन मामलों में जांच, गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया अलग-अलग रही है। लेकिन घटनाओं की पुनरावृत्ति बताती है कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। अवैध कारोबार पर नियंत्रण के साथ-साथ ऐसे अभियानों में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए भी ठोस व्यवस्था जरूरी है।
नम आंखों से विदाई, नवागत एसपी ने दिया कंधा
टीआई दिलीप पुरी की मौत के बाद पुलिस महकमे में शोक की लहर है। पोस्टमॉर्टम के बाद उनकी पार्थिव देह को तिरंगे में लपेटकर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। नवागत एसपी आदित्य मिश्रा सहित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों ने पार्थिव देह को कंधा दिया। नम आंखों से अपने साथी को विदाई देने के बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव के लिए रवाना किया गया।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर दुख जताते हुए स्पेशल डीजी उपेंद्र जैन को तत्काल घटनास्थल रवाना किया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही दिलीप पुरी की पत्नी को एसआई पद पर अनुकंपा नियुक्ति और परिवार को एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
सरकार की ओर से सहायता और जांच के निर्देश तत्काल राहत जरूर हैं, लेकिन प्रदेश के सामने बड़ा सवाल इससे कहीं आगे का है। क्या अवैध खनन और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों तथा अन्य सरकारी कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा मिल पा रही है? क्या ऐसे अवैध कारोबारों में लगे वाहनों और उनके पीछे काम कर रहे नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण हो पा रहा है?
आईपीएस नरेंद्र कुमार से लेकर टीआई दिलीप पुरी तक की घटनाएं बताती हैं कि यह समस्या किसी एक जिले या एक विभाग तक सीमित नहीं है। अब जरूरत केवल दोषियों को सजा दिलाने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसमें कानून लागू कराने के लिए मैदान में उतरने वाले अधिकारी और कर्मचारी सुरक्षित भी रहें।
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