करोड़ों की बंदरबांट: नगर निगम में योजना के नाम पर निकाय निधि से
KHULASA FIRST
संवाददाता

पिछले दरवाजे से नियुक्तियों की तैयारी
भिक्षुक पुनर्वास केंद्र में गड़बड़ियों के बाद अब चहेतों को उपकृत करने का आरोप
महापौर परिषद में प्रस्ताव भेजकर नियम-14 की कार्रवाई और लोकायुक्त जांच से बचने की कोशिश
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर पालिक निगम में भिक्षुक पुनर्वास केंद्र में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद अब दीनदयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को नियम विरुद्ध खर्च करने का मामला सामने आया है।
केंद्र और राज्य शासन स्तर पर इस योजना एवं कर्मचारियों का मूल अनुबंध 30 सितंबर 2024 को ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन द्वारा पांच नगर मिशन प्रबंधकों को 68 हजार रुपए तक और पांच सामुदायिक संगठकों को 25 हजार रुपए प्रतिमाह का भुगतान निकाय निधि से किया जा रहा है।
अब अपनी जवाबदेही से बचने और पिछले दरवाजे से की गई नियुक्तियों को वैधता दिलाने के लिए इस पूरे मामले को महापौर परिषद की संक्षेपिका में शामिल कर राजनीतिक स्वीकृति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
शून्य नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के बावजूद जनता के धन से भुगतान
उपलब्ध शासकीय अभिलेखों के अनुसार इन कर्मचारियों का चयन, मानदेय, सेवा शर्तें और कार्य विवरण संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल द्वारा निर्धारित किए गए थे।
जब 30 सितंबर 2024 को राज्य स्तर से अनुबंध समाप्त हो गया, तो निगम का इनसे कोई विधिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध शेष नहीं रहा। इसके बावजूद नगर निगम ने किस विधिक अधिकार, किस स्वीकृत पद और किस नियम के तहत इन्हें अपना कर्मचारी मानकर भुगतान जारी रखा?
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों और संविदा नियमों की खुली अवहेलना
सामान्य प्रशासन विभाग ने 11 मई 2026 को परिपत्र क्रमांक 1/9/0007/2026-GAD-3-01 जारी कर संविदा एवं आकस्मिक पदों को 'समाप्ति के लिए निर्धारित पद' घोषित किया है तथा अधिकारिता-विहीन नियोजन करने वाले दोषी अधिकारियों पर सिविल सेवा आचरण नियम-14 के तहत सेवा समाप्ति अथवा दीर्घ शास्ति की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही संविदा नियम 2021 का भी उल्लंघन किया जा रहा है। 'मध्य प्रदेश नगर पालिका संविदा सेवा नियम, 2021' की अनुसूची में 'नगर मिशन प्रबंधक' का कोई पद स्वीकृत ही नहीं है।
इसमें केवल सामुदायिक प्रबंधक का पद है, जिसकी अधिकतम मानदेय सीमा 40 हजार रुपए है। इसके विपरीत, बिना किसी विज्ञापन या चयन समिति के इन कर्मचारियों को 55 हजार से 68 हजार रुपए तक का भुगतान किया जा रहा है।
महापौर परिषद के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाने की मांग
पांच नगर मिशन प्रबंधकों और पांच सामुदायिक संगठकों की सेवा निरंतरता तथा पिछले दरवाजे से नियुक्ति से संबंधित महापौर परिषद की संक्षेपिका को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है।
साथ ही योजना समाप्त होने के बाद 30 सितंबर 2024 से निकाय निधि से मिशन के खाते में स्थानांतरित किए गए 25 लाख रुपए सहित अब तक वितरित सभी मानदेय की स्वतंत्र वित्तीय जांच कराकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से राशि की वसूली करने की मांग की गई है।
इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के नियम-14 के तहत कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। 11 मई 2026 के आदेश की अवहेलना कर अधिकारिता-विहीन तरीके से टिप्पणी पत्र चलाने और भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारियों पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत दीर्घ शास्ति अधिरोपित करने की मांग उठाई गई है।
भिक्षुक केंद्र और राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से जुड़े दोनों मामलों की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और लोकायुक्त से निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने तथा जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है।
मांग है कि करदाताओं की गाढ़ी कमाई चहेतों पर खर्च करने के बजाय निगम के जमीनी स्तर पर कार्यरत विनियमित कर्मचारियों को नियमानुसार उनका अधिकार दिया जाए।
टिप्पणी पत्र से 25 लाख रुपए के संदिग्ध आहरण और महापौर परिषद का ढाल की तरह इस्तेमाल
नगर निगम के टिप्पणी पत्र (पृष्ठ 28, 29 और 36) के अनुसार, अधिकारियों ने निकाय निधि से 25 लाख रुपए की राशि राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के बैंक खाते, भारतीय स्टेट बैंक खाता क्रमांक 33682769532 में स्थानांतरित कर वेतन आहरण की स्वीकृति दी।
लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में शिकायतें दर्ज होने के बाद व्यक्तिगत जवाबदेही और नियम-14 के तहत कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों ने संक्षेपिका तैयार कर निर्णय की जिम्मेदारी महापौर परिषद पर डाल दी है, ताकि भविष्य की जांच में इसे राजनीतिक निर्णय बताया जा सके।
अपात्रों को लग्जरी गाड़ियां और डीजल, विनियमित कर्मचारियों के लिए धन का रोना
एक ओर जहां सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद 20 से 25 वर्षों से कार्यरत सफाई, जलकार्य और विद्युत विभाग के विनियमित कर्मचारियों को धन की कमी बताकर समान वेतन से वंचित रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर योजना समाप्त होने के बाद भी इन संविदा कर्मचारियों पर लाखों रुपए वेतन के रूप में खर्च किए जा रहे हैं।
इतना ही नहीं, अपात्र होने के बावजूद निगम द्वारा उन्हें गाड़ियां, चालक और हर महीने 95 लीटर तक डीजल उपलब्ध कराया जाता रहा।
10 कर्मचारियों को एक साथ महापौर परिषद के माध्यम से सेवा निरंतरता देंगे
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में विचाराधीन प्रकरण क्रमांक डब्ल्यू.पी. 17997/2026 में संचालनालय के पत्र के संबंध में केवल तीन नगर मिशन प्रबंधकों कृष्णा बनाईत, दीप्ति रावत और प्रभा भास्कर को अंतरिम स्थगन मिला है।
शेष दो नगर मिशन प्रबंधकों निखिल कुलमी और राजवीर धाकड़ तथा सभी पांच सामुदायिक संगठकों नितिन जायसवाल, प्रशांत रैकवार, सौरभ गोयल, विष्णु मालवीय और शीला डांगी को कोई न्यायिक राहत नहीं मिली है। इसके बावजूद सभी 10 कर्मचारियों को एक साथ महापौर परिषद के माध्यम से सेवा निरंतरता देने की तैयारी की जा रही है।
भिक्षुक केंद्र के बाद फिर विभाग पर उठे गंभीर सवाल
उल्लेखनीय है कि भिक्षुक प्रबंधन एवं पुनर्वास केंद्र में पूर्व में भी गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं, जिनकी आंच संबंधित विभागीय नेतृत्व और व्यवस्था तक पहुंची थी।
उसी विभाग में अब राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के नाम पर पिछले दरवाजे से नियुक्तियों और निकाय निधि से कथित अवैध वेतन वितरण का मामला सामने आया है। इससे प्रशासनिक जवाबदेही और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष को भी नहीं दी जानकारी
नेता प्रतिपक्ष सोनिला मीमरोट ने भी इस मामले को लेकर नगर निगम आयुक्त से जानकारी मांगी थी, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से उन्हें अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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