टेंडर प्रक्रिया खत्म एसोसिएशन के हाथों में व्यवस्था: पटाखा की प्रति दुकान से 30 हजार रुपए की वसूली
KHULASA FIRST
संवाददाता

पिछले साल 25 हजार रुपए थे निर्धारित, इस बार 5 हजार रुपए बढ़े
खुलासा फर्स्ट की पड़ताल पर एसडीएम ने भी की पुष्टि, निजी व्यवस्था में सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पटाखा कारोबार में लाइसेंस आवंटन से लेकर दुकान निर्माण और शुल्क वसूली तक उठ रहे सवालों के बीच अब दशहरा मैदान के पटाखा बाजार की निर्माण व्यवस्था भी विवादों में आ गई है।
खुलासा फर्स्ट द्वारा लगातार पटाखा कारोबार में सामने आ रही अनियमितताओं का खुलासा किया जा रहा है। पहले दशहरा मैदान में दुकान निर्माण के नाम पर कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का मामला उठाया गया था।
अब सामने आया है कि इस वर्ष दुकानों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाने के बजाय पूरी व्यवस्था व्यापारियों की एसोसिएशन को सौंप दी गई है। व्यापारियों का आरोप है कि प्रत्येक दुकान के निर्माण के नाम पर 30 हजार रुपए लिए जा रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 25 हजार रुपए थी।
एसडीएम राऊ लोकेंद्र सिंह सरल ने भी पुष्टि की है कि इस बार पटाखा दुकानों का निर्माण व्यापारियों की एसोसिएशन के माध्यम से कराया जा रहा है। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में दुकान निर्माण के टेंडर आपराधिक और दबंग प्रवृत्ति के लोगों द्वारा लिए जाने तथा व्यापारियों से मनमानी वसूली की शिकायतें मिली थीं।
इन्हीं शिकायतों के चलते इस बार निर्माण की जिम्मेदारी व्यापारियों के संगठन को दी गई है। लेकिन इस व्यवस्था ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि जब दुकान निर्माण, राशि वसूली और व्यवस्थाओं का संचालन निजी संगठन के माध्यम से हो रहा है तो इसकी निगरानी और जवाबदेही किसकी होगी?
निर्माण की लागत कितनी है, 30 हजार रुपए किस आधार पर तय किए गए और वसूली का हिसाब कहां दर्ज हो रहा है, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
टेंडर प्रक्रिया में न्यूनतम दर 10 हजार, अब 30 हजार की वसूली का आरोप... पिछले वर्ष एसडीएम कार्यालय राऊ द्वारा दशहरा मैदान में अस्थायी पटाखा दुकानों के निर्माण के लिए बाकायदा निविदा आमंत्रित की गई थी।
जारी विज्ञप्ति में प्रत्येक दुकान का आकार 8×8 फीट यानी 64 वर्गफीट निर्धारित किया गया था। दो दुकानों के बीच लगभग 10 फीट की दूरी अनिवार्य रखी गई थी। प्रति दुकान लगाने के लिए न्यूनतम आधार मूल्य 10 हजार रुपए तय किया गया था।
निविदा में टेंडर प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति के लिए रेडक्रॉस सोसायटी के नाम 50 हजार रुपए की सिक्योरिटी राशि जमा करना भी अनिवार्य था। इसके अलावा टेंडरधारी को नजूल भूमि का लीज रेंट और नगर निगम का स्वच्छता शुल्क जमा करना था। दुकान निर्माण के साथ बिजली और पार्किंग की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी टेंडरधारी की थी।
लेकिन इस वर्ष टेंडर प्रक्रिया अपनाने के बजाय एसोसिएशन के माध्यम से निर्माण कराया जा रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि प्रति दुकान 30 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि पिछले वर्ष निर्धारित निविदा प्रक्रिया को इस बार क्यों बदल दिया गया? क्या निर्माण लागत और वसूली की राशि का कोई आधिकारिक निर्धारण किया गया है?
गुंडे-बदमाशों से मुक्ति के नाम पर वसूली बढ़ने का आरोप.... कुछ व्यापारियों का कहना है कि पिछले वर्षों में दुकान निर्माण के नाम पर कथित तौर पर दबंग तत्वों द्वारा प्रति दुकान 25 हजार रुपए वसूले जाते थे।
इस बार व्यवस्था एसोसिएशन को सौंपने के बावजूद राशि घटने के बजाय 5 हजार रुपए बढ़कर 30 हजार रुपए हो गई है। व्यापारियों का सवाल है कि यदि प्रशासन ने पुरानी व्यवस्था में कथित मनमानी वसूली की शिकायतों के कारण बदलाव किया था तो नई व्यवस्था में निर्धारित शुल्क और उसकी निगरानी का सार्वजनिक रिकॉर्ड क्यों नहीं है? इस राशि की रसीद दी जा रही है या नहीं, निर्माण पर वास्तविक खर्च कितना है और बची हुई राशि का हिसाब कौन रखेगा, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
150 दुकानों के निर्माण की तैयारी, तीन कलेक्टर नियुक्त... एसडीएम लोकेंद्र सिंह सरल के अनुसार, इस बार पटाखा बाजार के लिए तीन कलेक्टर नियुक्त किए गए हैं। प्रतिवर्ष लगभग 150 दुकानों का निर्माण किया जाता है।
दुकानों के आवंटन में सबसे पहले लाइसेंस रिन्यू कराने वाले पुराने लाइसेंसधारियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद दुकानें शेष रहने पर नए आवेदनकर्ताओं को अवसर दिया जाएगा।
हालांकि, दुकान आवंटन की प्रक्रिया के साथ निर्माण शुल्क की पारदर्शिता भी जरूरी है। प्रशासन को यह बताना चाहिए कि एसोसिएशन ने दुकानों के निर्माण के लिए कितनी राशि खर्च की और व्यापारियों से वसूली गई रकम का हिसाब किस स्तर पर जांचा जाएगा।
थोक बाजार के 41 लाइसेंस रिन्यूअल पर भी उठे थे सवाल... पटाखा कारोबार में अनियमितताओं का मामला केवल दशहरा मैदान तक सीमित नहीं है। पिपल्यापाला रीजनल पार्क के थोक पटाखा बाजार के करीब 41 लाइसेंस रिन्यू किए जाने के बाद भी लाइसेंस वितरण की पारदर्शिता पर सवाल उठे थे।
सितंबर में प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल, संभागायुक्त और कलेक्टर को शिकायत देकर आरोप लगाया गया था कि कुछ लाइसेंसधारी स्वयं कारोबार करने के बजाय अपनी दुकानें या लाइसेंस दूसरे लोगों को सालाना तीन से पांच लाख रुपए तक किराये पर देते हैं। एक ही परिवार के सदस्यों को थोक और खेरची लाइसेंस मिलने तथा नए व्यापारियों को अवसर नहीं मिलने की शिकायत भी की गई थी।
शिकायत में पिछले सात वर्षों के लाइसेंस आवंटन, गुमास्ता, जीएसटी, टैक्स रिटर्न और आयकर दस्तावेजों की जांच की मांग की गई थी। लेकिन शिकायत पर जांच और कार्रवाई की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई: कलेक्टर शिवम वर्मा
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन का प्रथम दायित्व विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराना है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिले में कई पटाखा बाजारों की एसोसिएशन ने स्वयं बाजार निर्माण करने की अनुमति मांगी थी, जिनमें कुछ स्थानों पर अनुमति प्रदान की गई है। यदि किसी व्यापारी द्वारा बाजार में दुकान निर्माण के नाम पर अवैध वसूली की शिकायत की जाती है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बीच प्रशासन की जवाबदेही
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पटाखों की बिक्री, भंडारण और लाइसेंस व्यवस्था में विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। अग्नि सुरक्षा, लाइसेंसधारियों का भौतिक सत्यापन और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन को सौंपी गई है।
ऐसे में सवाल केवल दुकानों के निर्माण का नहीं, बल्कि पूरे पटाखा बाजार की व्यवस्था का है। जब निर्माण और शुल्क वसूली निजी हाथों में है तो प्रशासन यह कैसे सुनिश्चित करेगा कि दुकानों के बीच निर्धारित दूरी, अग्नि सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था, पार्किंग और अन्य अनिवार्य शर्तों का पालन हो रहा है?
अब प्रशासन से इन सवालों के जवाब जरूरी हैं
1. दशहरा मैदान की दुकानों के निर्माण के लिए इस वर्ष टेंडर प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
2. प्रति दुकान 30 हजार रुपए निर्धारित करने का आधार क्या है?
3. व्यापारियों से वसूली गई राशि की रसीद और खर्च का हिसाब सार्वजनिक होगा या नहीं?
4. सितंबर में थोक लाइसेंसों को लेकर की गई शिकायत पर अब तक क्या जांच हुई?
5. मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत विस्फोटक अधिनियम और अग्नि सुरक्षा के नियमों की निगरानी कौन करेगा?
खुलासा फर्स्ट द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच अब जिला प्रशासन की जवाबदेही तय होना जरूरी है। पटाखा बाजार में लाइसेंस से लेकर दुकान निर्माण तक हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित होगी या व्यवस्था बदलने के बावजूद व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता रहेगा?
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