400 केवी सब स्टेशन पर करोड़ों की चोरी: मिलीभगत की आशंका
KHULASA FIRST
संवाददाता

20 दिन बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खंडवा रोड पर तेजाजी नगर चौराहे के नजदीक असरावद में स्थित मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के 400 केवी सब स्टेशन पर करोड़ों रुपए की कॉपर चोरी का सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। सब स्टेशन पर खराब पड़े रिएक्टर को खोलकर उसमें से कॉपर के तार और रॉड चोरी की गई है।
सामान इतना भारी है कि उसे कुछ लोग उठाकर नहीं ले जा सकते, इसके लिए लोडिंग वाहन का इस्तेमाल किया गया होगा, जिससे कंपनी के ही अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में कंपनी की ओर से सिक्योरिटी कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ तेजाजी नगर थाने में लापरवाही की शिकायत की गई है।
पुलिस ने मामले में तीन सिक्योरिटी गार्ड को थाने बुलाकर पूछताछ कर छोड़ दिया। घटना के कई दिन बाद तक कंपनी के अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने का प्रयास किया जाना और मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करवाना इशारा कर रहा है कि करोड़ों रुपए कीमत के सामान चोरी में कही न कही कंपनी के ही बड़े अधिकारियों की मिलीभगत है।
सब स्टेशन पर हुई चोरी की जानकारी लगने के बाद 10 अप्रैल को सब स्टेशन के सहायक अभियंता ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए नियुक्त आउटसोर्स एजेंसी गामा गार्ड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड भोपाल को पत्र लिखकर चोरी की जानकारी देते हुए पुलिस कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
यहां कमाल की बात ये है कि इंदौर में चोरी की सूचना का पत्र 10 अप्रैल को जारी होता है और भोपाल स्थित कार्यालय द्वारा 10 अप्रैल को ही पुलिस थाना तेजाजी नगर इंदौर को बंद रिएक्टर की करीबन हजारों किलो कॉपर कॉइल चोरी होने की सूचना देने के बाद पूरे 20 दिन बीतने के बाद भी आज दिनांक तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
आश्चर्य है कि बिजली के भारी उपकरण, जिसमें कॉपर कॉइल और कॉपर रॉड शामिल हैं। इनकों कोई व्यक्ति जेब या बैग में रखकर नहीं ले जा सकता। इतने बड़े सामान को ले जाने के लिए बड़े वाहन की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में किसी मिलीभगत एवं आंतरिक षडयंत्र से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
वही कंपनी के आला अधिकारी सुरक्षा गार्ड के ठेकेदार पर ठीकरा फोड़कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। आज की तारीख में स्क्रैप तांबा भी करीब 1000 रुपए किलो है। वह तांबा किसे बेचा गया, यह भी जांच का विषय है। लेकिन केंद्र के अधिकारी मामले में एफआईआर दर्ज करवाने में बिल्कुल भी तैयार नहीं जो रहे, इस वजह से केंद्र के अधिकारियों पर चोरी में मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
जिम्मेदारों का रवैया शक के घेरे में
जब इस मामले में सब स्टेशन के अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो अधिकारी जानकारी देने के बजाय अपने आपको बचाते नजर आएं। कंपनी के करोड़ों रुपए के सामान की चोरी के मामले में सब स्टेशन की एक्जीक्यूटिव इंजीनियर नूतन कारपेंटर शर्मा से जानकारी मांगी गई तो वह पहले तो मिलने को ही तैयार नहीं हुईं, लेकिन जब वह अपने केबिन से कहीं जाने के लिए निकलीं, तब उनसे इस बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो वह सीधे मुंह बात करने को ही तैयार नहीं हुईं। उनका कहना था कि आप मुझसे समय लेकर यहां नहीं आए, पहले मुझे कॉल करना इसके बाद मैं देखूंगी।
20 साल से टिकी हैं एक ही स्थान पर
कार्यपालन यंत्री शर्मा की इसी केंद्र में 2006 से सहायक यंत्री के रूप में नियुक्ति हुई थी। तब से वह एक ही कार्यालय, एक ही स्थान और एक ही शहर में पदस्थ हैं। यही नहीं बिना ट्रांसफर किए 2019 में उनका प्रमोशन कर उन्हें कार्यपालन यंत्री यानी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर भी बना दिया, जबकि मध्यप्रदेश शासन के तबादला नीति के नियमानुसार कोई भी अधिकारी को तीन वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर पदस्थ नहीं रखा जाता है, लेकिन कंपनी प्रशासन ने इनके मामले में पता नहीं क्यों आंखें मूंद रखी हैं और कंपनी प्रबंधन क्यों इन पर इतना मेहरबान है, इस पर कई सवाल खड़े होते हैं।
सब स्टेशन पर चोरी की शिकायत मिली
सब स्टेशन पर हुई चोरी की शिकायत प्राप्त हुई है। चोरी किया गया सामान काफी बड़ा और वजनी है, जिसे कुछ लोग उठाकर नहीं ले जा सकते। इस वारदात में अंदर के लोगों की मिलीभगत की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। केंद्र से कुछ और जानकारी हासिल होना बाकी है, मामले की जांच की जा रही है। देवेंद्र मरकाम, टीआई, तेजाजी नगर थाना
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