अध्यक्ष के ‘मैं जिम्मेदार’ वाले दावे के महज 24 घंटे में ही ढह गई जर्जर गैलरी: भोलाराम मार्ग पर जलभराव से प्रतियोगी छात्र हो रहे परेशान; इलाके में गंदगी और जलभराव से रहवासी त्रस्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

निर्माण कार्यों में घोर लापरवाही, बिल्डर पर एक लाख का जुर्माना
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के नेहरू नगर में 50 साल पुरानी बहुमंजिला बिल्डिंग नंबर 13/14 की जर्जर गैलरी कल ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई। हादसे के वक्त वहां से गुजर रही एक मासूम बच्ची की जान महज चंद सेकंड के फासले से बच गई।
ठीक 24 घंटे पहले मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन ने इसी जगह का दौरा किया था। इस घटना ने प्रशासन की संवेदनहीनता और हाउसिंग बोर्ड के खोखले दावों का सच उजागर कर दिया है।
शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया
हादसे की पटकथा ठीक एक दिन पहले लिखी गई थी। 25 जून को हाउसिंग बोर्ड के शिविर में रहवासी पूजा तायड़े ने अपनी जान जोखिम में डालकर इस जर्जर इमारत की शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष जैन ने शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करने के बजाय पूजा तायड़े को शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। जब रहवासी अपनी मांग पर अडिग रहीं, तो अध्यक्ष ओम जैन ने मामले के निपटारे के लिए 15 से 20 दिन का समय मांग लिया।
जिम्मेदारी का वादा
अध्यक्ष ओम जैन ने भरी सभा में सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी कि यदि कोई भी जनहानि होती है या किसी की जान जाती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी हाउसिंग बोर्ड और स्वयं मेरी अध्यक्ष की होगी। अध्यक्ष के इस दावे के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि नेहरू नगर की उसी जर्जर बिल्डिंग की गैलरी ढह गई, जिसका निरीक्षण उन्होंने स्वयं किया था।
इस बिल्डिंग में सचिन घनश्याम चौधरी का परिवार निवास करता है, जिनके सिर पर मौत का साया मंडरा रहा था। यह खौफनाक मंजर उन तमाम कागजी दावों की पोल खोल रहा है, जो प्रशासन ने शहर की पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर किए थे।
कलेक्टोरेट से लेकर हाउसिंग बोर्ड के दफ्तरों तक चक्कर काट चुकी पूजा तायड़े की चेतावनी को नजरअंदाज करना अब प्रशासन के लिए बड़ा सवाल बन गया है। 20 दिन की मोहलत मांगने वाले अध्यक्ष का यह दावा अब न केवल उनके प्रशासनिक कौशल पर सवाल उठा रहा है, बल्कि नैतिक रूप से भी उन्हें कठघरे में खड़ा कर रहा है।
ऐसी कई इमारतें जो सिर्फ कागजों में ही सुरक्षित: नेहरू नगर की यह जर्जर बिल्डिंग महज एक उदाहरण है। इंदौर में ऐसी कई इमारतें हैं जो हाउसिंग बोर्ड की फाइलों में तो सुरक्षित हैं, लेकिन हकीकत में वे किसी बड़ी आपदा को न्योता दे रही हैं।
अध्यक्ष के उस बयान ने, जिसमें उन्होंने ‘पूरी जिम्मेदारी’ लेने की बात कही थी, अब सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को बल दे दिया है। सवाल यह है कि क्या हाउसिंग बोर्ड अब भी जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति करेगा, या फिर इन जानलेवा इमारतों को तुरंत खाली करवाकर रहवासियों के लिए कोई ठोस व्यवस्था करेगा?
चुनावी वादे बनाम जमीनी हकीकत
शहर के वार्ड क्रमांक 29 के अंतर्गत आने वाले विजय नगर क्षेत्र में सड़कें, गंदगी और जलभराव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि चुनाव के दौरान किए गए विकास के वादे आज भी धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं।
विजय नगर (स्कीम नंबर-54) के रहवासी जितेंद्र वर्मा, करण शर्मा और सक्षम नजान आदि ने आरोप लगाया कि क्षेत्र की सड़कें जगह-जगह से उखड़ चुकी हैं और गड्ढों के कारण आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
रहवासियों का कहना है कि इस संबंध में कई बार पार्षद पूजा पाटीदार और निगम महापौर पुष्यमित्र भार्गव से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हुआ। रहवासियों का यह भी आरोप है कि सड़कों पर फैली गंदगी और सफाई व्यवस्था की अनदेखी के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
आवागमन बाधित
ओमेक्स सिटी-1, मायाखेड़ी कांकड़ निवासी जपेश ननेरिया ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के कई स्थानों पर सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, जिससे आवागमन बाधित हो रहा है। उनका कहना है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से जलभराव और गंदगी की समस्या लगातार बढ़ रही है।
कई बार निगम अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। लसूड़िया मोरी निवासी गोपाल सूर्यवंशी ने बताया कि मर्सिडीज शोरूम वाली गली, मंगल कंपाउंड रोड पर बारिश का पानी जमा होने से पानी घरों, कार्यालयों और गोदामों तक पहुंच रहा है।
जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। साथ ही, लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों और संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो बारिश के मौसम में हालात और गंभीर हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर वार्ड पार्षद पूजा पाटीदार, नगर निगम प्रशासन अथवा महापौर पुष्यमित्र भार्गव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भावी अधिकारी बन्ने की राह में रोड़ा बनी बदहाल सड़कें
देशभर में स्वच्छता के लिए ख्याति पाने वाले इंदौर शहर के कई क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ऐसी ही एक परेशानी भोलाराम मार्ग स्थित शिवमपुरी कॉलोनी में सामने आई, जहां जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी सड़कों पर भर गया।
तीन वर्ष से इस कॉलोनी में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे शुभम कुमार का कहना है हर साल बारिश में सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं। निकासी नहीं होने से लंबे समय तक सड़कों पर बारिश का पानी जमा रहता है, जिससे गंदगी फैलती है और मच्छरों के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
यह केवल शुभम नहीं, बल्कि उन हजारों प्रतियोगी छात्रों की भी परेशानी है, जो प्रदेश के विभिन्न जिलों से इंदौर आकर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। जलभराव के कारण कोचिंग संस्थानों और पुस्तकालयों तक पहुंचने में कठिनाई होती है, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
निगम पर उठे सवाल
छात्रों का कहना है कि जिस शहर को लगातार स्वच्छता में देश का अग्रणी शहर बताया जाता है, वहां शैक्षणिक क्षेत्र में ऐसी बदहाली प्रशासन की एवं निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते जल निकासी और सड़क सुधार कार्य नहीं किया गया, तो बारिश के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाएंगे।
ड्रेनेज लाइन डालने के लिए निगम ने खोद दी सड़क
विद्या पैलेस कॉलोनी में गेट से लेकर अशोक नगर तक का पूरा मार्ग ड्रेनेज लाइन डालने के नाम पर खोद दिया गया है, जिससे स्थानीय रहवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मानसून की शुरुआत हो चुकी है और कॉलोनी पहले से ही जलभराव एवं पेयजल समस्याओं से जूझ रही है।
रहवासियों का कहना है कि सड़क की खुदाई के बाद मार्ग पूरी तरह से अव्यवस्थित हो गया है। बारिश के दौरान कीचड़ और जलभराव के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होगी। लोगों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि बारिश के मौसम में वे अपने वाहन घरों से कैसे निकाल पाएंगे।
स्कूल बसें कैसे प्रवेश करेंगी
क्षेत्र के अभिभावकों ने भी चिंता जताई है कि स्कूल बसें कॉलोनी के भीतर कैसे प्रवेश करेंगी और बच्चों का सुरक्षित आवागमन कैसे सुनिश्चित होगा। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि संबंधित विभाग ने सड़क खोदने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था या समयबद्ध कार्ययोजना पर कोई ध्यान नहीं दिया।
कार्य को शीघ्र पूरा करें
रहवासियों ने नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि कार्य को शीघ्र पूरा कर सड़क को पूर्व स्थिति में लाया जाए तथा बारिश के मौसम में नागरिकों को होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर हो रहा निर्माण
शहर के महालक्ष्मी नगर इलाके में निर्माण कार्य के दौरान बरती गई घोर लापरवाही ने आमजन की सुरक्षा को संकट में डाल दिया है। सार्थक सिंगापुर टाउनशिप के पास चल रहे निर्माण कार्य की वजह से अचानक सड़क और फुटपाथ का एक बड़ा हिस्सा धंस गया।
जमीन धंसने से वहां से गुजर रही नगर निगम की नर्मदा पेयजल पाइप लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पानी का तेज रिसाव शुरू हो गया। इस घटना के बाद से क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है और सड़क धंसने से यहां कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय रहवासियों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। क्षेत्रीय निवासी रीना मकवाना का कहना है कि बिल्डर ने मौके पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए हैं और न ही वहां बैरिकेडिंग लगाई गई है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जान का खतरा पैदा हो गया है।
रहवासियों ने प्रशासन से तत्काल सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पाइपलाइन की मरम्मत करने की मांग की है। महालक्ष्मी रहवासी संघ के अध्यक्ष ब्रजेश पचौरी ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि पिछले साल भी इसी बिल्डर के कारण ऐसी ही स्थिति बनी थी।
पिछले वर्ष बेसमेंट की खुदाई के दौरान जमीन धंसने से पास स्थित रेस कोर्स अपार्टमेंट की बाउंड्रीवॉल गिर गई थी। रहवासियों का आरोप है कि बीते वर्ष महापौर पुष्यमित्र भार्गव के निर्देशों के बावजूद निगम के भवन अधिकारी वैभव देवलासै और भवन निरीक्षक सचिन गहलोत ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते बिल्डर के हौसले बुलंद हैं और वह दोबारा लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम प्रशासन हरकत में आया है। आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर झोन क्रमांक 22 के वार्ड क्रमांक 36 में चल रहे मेसर्स परिमा डेवलपर्स के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण में पाया गया कि बिल्डर ने फाउंडेशन का कार्य करते समय सुरक्षा के किसी भी निर्धारित मानक का पालन नहीं किया, जिसकी परिणति सड़क धंसने और सरकारी पाइपलाइन के फूटने के रूप में हुई। नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मेसर्स परिमा डेवलपर्स पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
निगम की इस कार्रवाई के दौरान भवन अधिकारी वैभव देवलासे और भवन निरीक्षक सचिन गहलोत सहित निगम का अमला मौके पर उपस्थित रहा। आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि शहर में निर्माण कार्य करने वाली सभी एजेंसियां और डेवलपर्स सुरक्षा मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निगम की सार्वजनिक संपत्तियों या आधारभूत सुविधाओं को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाई गई, तो दोषियों के विरुद्ध इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ केवल चालान ही नहीं, बल्कि दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल धंसी हुई सड़क को सुधारने और पाइपलाइन को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन इलाके के लोग अभी भी भविष्य को लेकर आशंकित हैं।
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