10 और 20 रुपए के प्लास्टिक नोटों को मंजूरी: वित्त मंत्री बोलीं- ट्रायल में दोनों के 100-100 करोड़ नोट छपेंगे; 30 साल तक चलेंगे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर यानी प्लास्टिक बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। ट्रायल के तहत 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा था।
सरकार की मंजूरी के बाद अब दोनों मूल्यवर्ग के नोटों का परीक्षण किया जाएगा। ट्रायल सफल रहने पर इन्हें नियमित रूप से चलन में लाया जा सकता है।
RBI के मुताबिक, पॉलीमर नोटों को मौजूदा कागजी नोटों के साथ ही जारी किया जाएगा। यानी नए प्लास्टिक नोट आने के बाद पुराने कागजी नोट तुरंत बंद नहीं होंगे।
क्या पुराने 10 और 20 रुपए के कागजी नोट बंद होंगे?
नहीं...पॉलीमर नोट आने के बावजूद मौजूदा कागजी नोट चलते रहेंगे। सरकार और RBI ने स्पष्ट किया है कि दोनों तरह के नोट कुछ समय तक बाजार में साथ-साथ चलेंगे। को-एग्जिस्टेंस: पॉलीमर और पेपर दोनों तरह के नोट चलन में रहेंगे।
चरणबद्ध बदलाव: पॉलीमर नोटों को धीरे-धीरे अलग-अलग चरणों में सर्कुलेशन में शामिल किया जाएगा।कागजी नोट भी वैध: नए नोट पूरी तरह स्थापित होने तक मौजूदा कागजी नोट सर्कुलेशन में बने रहेंगे।
भारत में पहली बार कब आया था पॉलीमर नोट का प्रस्ताव?
भारत में पॉलीमर नोट लाने का प्रयास पहली बार 2012 में किया गया था। इसका उद्देश्य नोटों की उम्र बढ़ाना था, लेकिन तकनीकी कारणों से उस समय यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
हाल के महीनों में एक बार फिर पॉलीमर नोटों को लेकर चर्चा तेज हुई। मई-जून में RBI की रिपोर्ट और मीडिया रिपोर्ट्स में नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर करेंसी पर विचार की जानकारी सामने आई थी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी जून में बताया था कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसके फायदे-नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है।
दुनिया के किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट?
दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलीमर बैंकनोट इस्तेमाल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे देश प्रमुख हैं। इन देशों में पॉलीमर नोटों के इस्तेमाल का अनुभव भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पॉलीमर नोट क्या होते हैं?
पॉलीमर बैंकनोट कागज के बजाय एक खास प्रकार के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सब्सट्रेट पर बनाए जाते हैं। ये सामान्य नोटों की तरह हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर आसानी से खराब नहीं होते।
पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत इनकी लंबी उम्र और टिकाऊपन है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देशों में पॉलीमर करेंसी नोट 30 साल या उससे अधिक समय तक इस्तेमाल किए गए हैं।
पॉलीमर नोट लाने की प्रमुख वजहें
1. ज्यादा लंबी उम्र
पॉलीमर नोट पानी, धूल और गंदगी के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी होते हैं। कागजी नोटों की तुलना में इनके फटने और खराब होने की संभावना कम रहती है।
2. नकली नोटों पर रोक
पॉलीमर शीट में एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं। इससे नकली नोट तैयार करना ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
3. छपाई के खर्च में कमी
कागजी नोट जल्दी खराब होने के कारण उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। लंबे समय तक चलने वाले पॉलीमर नोटों से रिप्लेसमेंट की जरूरत कम हो सकती है।
FY25 में RBI ने कागजी बैंक नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए थे। पॉलीमर नोट लंबे समय तक चलते हैं तो भविष्य में बार-बार नोट छापने और बदलने की लागत कम होने की उम्मीद है।
खास बात
10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोट अभी ट्रायल चरण में होंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट अचानक बंद हो जाएंगे। फिलहाल सरकार की योजना दोनों तरह की करेंसी को साथ चलाने की है।
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