भाजपा की नैया, केवट खिवैया: भाजपा ने खेला बड़ा दांव; तीसरी सीट पर महेश केवट को उतारा
KHULASA FIRST
संवाददाता

तीन दिन के मंथन-चिंतन के बाद भाजपा ने दायरे से बाहर जाकर तीसरी सीट के लिए भी पेश की दावेदारी
मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष व अति पिछड़ा वर्ग के महेश केवट को बनाया उम्मीदवार, आज भरेंगे नामांकन
मीनाक्षी पर अनमनी कांग्रेस, राज्यसभा की तीसरी सीट पर भाजपा की नजर
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अंक गणित अपने पक्ष में न होने के बावजूद भाजपा ने राज्यसभा की तीसरी सीट पाने की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की नैया चुनाव में उतार दी है। भाजपा की इस नैया के महेश केवट खिवैया बनाए गए हैं।
केवट अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं। वे फिलहाल मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं और मछुआरा, केवट, निषाद व मांझी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस वर्ग के वोटर्स की बहुतायत तो अपने मध्य प्रदेश में नहीं है, अलबत्ता बगल के उत्तर प्रदेश में ये वर्ग सरकार बनाने-बिगाड़ने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
उप्र में आठ महीने बाद ही चुनाव हैं। वहां इस जाति-वर्ग की आबादी सूबे की कुल आबादी का 5 प्रतिशत के लगभग है। लिहाजा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए वैसे ही महेश केवट को खोज निकाला, जैसे रजनीश अग्रवाल को तलाशा।
अन्यथा इस ‘तीसरा कौन’ के लिए प्रदेश के कई दिग्गज लालायित थे। अपने दम पर कांग्रेस में सेंधमारी के दावे भी साथ थे, लेकिन ‘मोटाभाई’ के मस्तिष्क के पिटारे से कौन पार पा पाया है?
अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित उन सभी क्षत्रपों पर तीसरी सीट को जिताने की जिम्मेदारी है, जो बढ़-चढ़कर ये दावे कर रहे थे कि दिल्ली इशारा कर दे तो हम तीसरी सीट भी जीत लेंगे।
रा ज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में आखिरकार भाजपा ने बड़ा दांव खेल ही दिया। विधायकों की संख्या के अनुपात में पार्टी इस सूबे से 2 सीट ही जीत रही है।
बावजूद इसके भाजपा ने तीसरी सीट पर भी दांव खेल दिया। कमलदल ने ये राजनीतिक दुस्साहस कांग्रेस खेमे की प्रतिक्रिया के दम पर किया है।
कांग्रेस की तरफ से मीनाक्षी नटराजन एकमात्र सीट के लिए उम्मीदवार हैं, लेकिन उनकी उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस के क्षत्रपों में नाराजगी के स्वर हैं।
हालांकि ये स्वर मुखर नहीं हैं, लेकिन बड़े नेताओं की भाव-भंगिमा से ये साफ नजर आ रहा है कि सूबे के बड़े नेता कांग्रेस लीडरशिप के इस फैसले से खुश नहीं हैं।
बस, इसी राजी-नाराजगी में भाजपा अपने लिए एक अतिरिक्त सीट की तलाश पूरी कर रही है। लिहाजा पार्टी ने लंबे विचार-विमर्श के बाद महेश केवट को तीसरी सीट के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
केवट आज नामांकन भी दाखिल कर देंगे। उनकी जीत के लिए भाजपा को 8 कांग्रेस विधायकों से क्रॉस वोटिंग करवाना होगी। लिहाजा प्रदेश में उच्च सदन का चुनाव दिलचस्प व रोचक हो गया है। अगर भाजपा कांग्रेस विधायक तोड़ पाई तो प्रदेश की मौजूदा सरकार का कद दिल्ली दरबार में बढ़ना तय है।
राहुल से पंगा लेने की स्थिति में नहीं कांग्रेस के क्षत्रप
कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। राहुल गांधी की पसंद पर नापसंदगी जाहिर कोई नहीं करना चाहता। लिहाजा शुरुआती ऊहापोह के बाद पार्टी नटराजन के पक्ष में मुस्तैदी से खड़ी हो गई है।
तमाम दिग्गज नेताओं ने भी एकजुटता का संदेश दे दिया। बावजूद इसके कांग्रेस की लीडरशिप कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। लिहाजा ये माना जा रहा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को कर्नाटक या तेलगांना में शिफ्ट कर सकती है।
इन दोनों सूबे में कांग्रेस की सरकार है और पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना राज्य की संगठन प्रभारी भी हैं। मीनाक्षी के समर्थन में कर्नाटक व तेलंगाना के प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद व बोम्मा महेश तो भोपाल आ भी गए हैं।
दोनों राज्यों के सीएम ने भी नटराजन के पक्ष में ‘हरसंभव मदद’ का भरोसा दिया है। आज नटराजन अपना नामांकन दाख़िल करने जा रही हैं। कांग्रेस के लिहाज से प्रदेश के राजनीतिक हालात बता रहे हैं कि मीनाक्षी की जीत हो जाएगी।
राहुल गांधी के कारण क्रॉस वोटिंग का जोखिम विधायक नहीं उठाएंगे। कांग्रेस में फिलहाल राहुल ही सब कुछ हैं। न मल्लिकार्जुन, न सोनिया-प्रियंका का अब पार्टी में कोई बड़ा दखल चल रहा है।
ऐसे में राहुल से सीधी नाराजगी लेने के आसार सूबे की कांग्रेस में अब तक नजर नहीं आ रहे हैं। बावजूद इसके भाजपा ने दांव 2016 जैसा खेला है। तब भी भाजपा कोशिश के बावजूद तीसरी सीट जीत नहीं पाई थी।
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