कागजों में सिमटे नियम: सड़क पर हो रही फजीहत
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. बरनवाल क्लिनिक में बिना पार्किंग अनुमति के कमर्शियल संचालन
बिना रसीद 25 हजार रुपए वसूलने का आरोप
पहली मंजिल पर अवैध मेडिकल स्टोर खोलकर मोनोपॉली दवाइयों से मोटी कमाई
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नियमों को ताक पर रखकर कई क्लिनिक संचालित किए जा रहे हैं। शहर के पॉश इलाके स्कीम नंबर 94, उत्तम भोग के सामने, बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा स्थित ईबी 293 भवन में संचालित डॉ. बरनवाल क्लिनिक और न्यूरोवन न्यूरो एवं लकवा केंद्र इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बन चुका है।
यहां न केवल बिना पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था के व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स की अनुमति हासिल कर ली गई, बल्कि प्रथम मंजिल पर अवैध रूप से मेडिकल का संचालन कर मरीजों का चौतरफा शोषण किया जा रहा है। प्रशासनिक अनदेखी और ढुलमुल रवैये के चलते क्लिनिक संचालक बेखौफ होकर स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और ड्रग कंट्रोल प्रशासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमों के अनुसार किसी भी क्लिनिक अथवा स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बिना वैध स्वीकृतियों और निर्धारित मापदंडों के मेडिकल स्टोर संचालित करना पूरी तरह गैरकानूनी है।
इसके बावजूद डॉ. बरनवाल क्लिनिक की पहली मंजिल पर खुलेआम मेडिकल स्टोर संचालित हो रहा है। इस अवैध संचालन के पीछे का मुख्य खेल मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर अत्यधिक मुनाफा कमाना है।
मनमाने दामों पर खरीदना पड़ती हैं दवाएं : क्लिनिक में आने वाले मरीजों को जानबूझकर ऐसी मोनोपाली दवाइयां लिखी जाती हैं, जो पूरे शहर के किसी भी मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध ही नहीं होतीं।
जब परेशान परिजन शहरभर के दवा बाजारों के चक्कर लगाकर हार जाते हैं तो उन्हें विवश होकर क्लिनिक की प्रथम मंजिल पर स्थित उसी अवैध मेडिकल स्टोर से मनमाने और अत्यधिक दामों पर दवाएं खरीदना पड़ती हैं। प्रतिस्पर्धा खत्म कर केवल अपनी जेबें भरने का यह संगठित तंत्र मरीजों के आर्थिक शोषण का केंद्र बन चुका है।
राशि जमा करवाकर नहीं देते रसीद
अवैध मेडिकल संचालन के साथ-साथ यहां वित्तीय अनियमितताओं और गैर-पारदर्शी कार्यप्रणाली का बोलबाला है। बाहर से इलाज कराने इंदौर आ रहे मरीजों को यहां बेबस पाकर भारी-भरकम बिल थमा दिए जाते हैं। इलाज के नाम पर 5 से 7 प्रकार की महंगी जांचें लिखी जाती हैं और उनके एवज में परिजन से काउंटर पर सीधे 25,000 रुपए नकद जमा करवा लिए जाते हैं।
हद तो तब हो जाती है जब जमा राशि का बिल मांगने पर क्लिनिक का स्टाफ साफ इनकार कर देता है। उनका सीधा जवाब होता है कि पैसे जमा करने की कोई अलग से रसीद नहीं दी जाएगी, सीधे जांच रिपोर्ट ही मिलेगी।
बिना किसी रसीद या चालान के हजारों रुपए नकद ऐंठना न केवल टैक्स चोरी और वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों और मरीजों के साथ धोखाधड़ी है। रसीद न होने के कारण ग्रामीण व बाहर से आए पीड़ित कहीं लिखित शिकायत दर्ज कराने से भी हिचकिचाते हैं। इसका जीवंत उदाहरण बाहर से अपने 22 वर्षीय बेटे देवेंद्र धावरी का इलाज कराने आए पिता दिलीप धावरी के मामले में देखने को मिला।
देवेंद्र को क्लिनिक पर लाते ही डॉ. मनोरंजन बरनवाल (एमडी, डीएम न्यूरोलॉजी) और क्लिनिक प्रबंधन द्वारा तुरंत भर्ती करने का भारी दबाव बनाया जाने लगा। इसके साथ ही जांच के नाम पर 25,000 रुपए की मोटी रकम जमा करवा ली गई।
जब दिलीप धावरी ने इस बड़ी रकम का पक्का बिल मांगा तो काउंटर स्टाफ ने स्पष्ट शब्दों में देने से मना कर दिया। इतना ही नहीं, जब वे बेटे की जान बचाने के लिए पर्चे की दवाइयां ढूंढने निकले तो पूरे शहर के मेडिकल स्टोर्स पर एक भी दवा नहीं मिली। अंततः उन्हें प्रथम मंजिल पर बने उसी क्लिनिक के अवैध मेडिकल से मनमाने दामों पर दवाएं खरीदना पड़ीं।
रहवासियों और राहगीरों के लिए सिरदर्द बना क्लिनिक
इलाज के नाम पर चल रही इस मनमानी के अलावा यह क्लिनिक परिसर क्षेत्र के रहवासियों और राहगीरों के लिए रोज का सिरदर्द बन चुका है। बहुमंजिला भवन होने के बावजूद क्लिनिक परिसर में वाहनों के लिए कोई पार्किंग व्यवस्था नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल नगर निगम और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारियों पर उठता है कि उन्होंने बिना बेसमेंट या समर्पित पार्किंग स्थल के इस कॉम्प्लेक्स को व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति आखिर कैसे दे दी?
यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र को खुली चुनौती है कि बिना जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के भी धड़ल्ले से कमर्शियल क्लिनिक चलाया जा रहा है। यहां पार्किंग न होने का खामियाजा रोज आम जनता भुगत रही है।
सुबह से लेकर देर शाम तक क्लिनिक के बाहर मुख्य सड़क पर दो और चार पहिया गाड़ियां अस्त-व्यस्त और बेतरतीब तरीके से खड़ी रहती हैं। सड़क के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जे और पार्किंग के कारण बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहे और स्कीम नंबर 94 के इस व्यस्त मार्ग पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है, जिससे एंबुलेंस और आम वाहन चालकों को निकलने में भारी मशक्कत करना पड़ती है। पीड़ित परिजन, क्षेत्र के व्यापारियों और आम नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, ड्रग इंस्पेक्टर और नगर निगम की संयुक्त टीम बनाकर इस क्लिनिक की अनुमतियों, अवैध मेडिकल और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच की जाए तथा क्लिनिक पर दंडात्मक व सीलिंग की सख्त कार्रवाई की जाए।
संबंधित समाचार

इस प्रकोष्ठ को साढ़े छह साल में हजारों शिकायतें:कोर्ट पहुंचीं सिर्फ इतनी विधानसभा में खुलासा: इतने मामलों में जांच शुरू, इतनी आवेदन फाइल बंद

सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका:जमानत की रद्द; पिछली सुनवाई में दी थी सरेंडर की सलाह

ओंकारेश्वर जाने वाले श्रद्धालु ध्यान दें:सावन में बदली दर्शन और ट्रैफिक व्यवस्था; इतनी दूरी से होंगे बाबा के दर्शन, शहर में लागू होगा यह ट्रैफिक प्लान

मिलने से इनकार पर बौखलाया युवक:लॉ स्टूडेंट के निजी वीडियो किए वायरल; सहेलियों और परिचितों को भेजे, ऐसे शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पहले डबल डेकर ब्रिज की एक लेन का किया लोकार्पण:ब्रिज को आधुनिक तकनीक और अधोसंरचना विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बताया

एमपी में तीन सिस्टम सक्रिय:40 से ज्यादा जिलों में हुई झमाझम बारिश; आज इन जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट

सीएम डॉ. मोहन यादव का सर्वधर्म समाज ने किया स्वागत:यूसीसी पर बोले; आजादी के सपनों को साकार करने वाला कानून

संसद के बाहर NDA और विपक्ष आमने-सामने:NEET मुद्दे पर चौथे दिन भी हंगामा; एक-दूसरे के खिलाफ की जमकर नारेबाजी

इस अफसर की संपत्ति इतने करोड़ तक पहुंची:बैंक खातों में मिले लाखों रुपए; लोकायुक्त जांच जारी, परिवार और फर्मों के खाते फ्रीज

जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी:पत्थरबाजी को लेकर लगाए गंभीर आरोप; पार्टी बोली- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा

पेपर लीक मामलों पर पीएम का बड़ा ऐलान:बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट; राहुल गांधी बोले- युवाओं के भविष्य से सबसे ज्यादा खिलवाड़ सरकार ने किया

वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती से दुष्कर्म:आरोपी गिरफ्तार; मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा

जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन हिंसक:पुलिस-प्रदर्शनकारियों में भिड़ंत; हालात संभालने के लिए आरएएफ ने छोड़े आंसू गैस के गोले, एसीपी घायल

थूकने को लेकर हुए विवाद ने ली थी जान:अब आरोपी को हाईकोर्ट से मिली जमानत

मध्य प्रदेश को मिला नया मुख्य सचिव:वरिष्ठ आईएएस अशोक बर्णवाल संभालेंगे प्रशासन की कमान

छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का साथ:दिग्विजय सिंह-जीतू पटवारी धरने पर बैठे; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज

कार किराये पर लेकर बेचने का खेल या झूठा फंसाने की साजिश:एफआईआर के बाद कारोबारी ने खोले कई राज; दो भाइयों पर 5 वाहन हड़पने के आरोप

अनुराग जैन के बाद अशोक बर्णवाल सबसे आगे:मध्य प्रदेश को जल्द मिल सकता है नया मुख्य सचिव

नाना पटवारी मामले में जांच तेज:छात्र नेता से 6 घंटे पूछताछ; एमडी ड्रग्स और सट्टा कनेक्शन खंगाल रही पुलिस

राहुल गांधी से जुड़े मामले में हाईकोर्ट सख्त:सीबीआई के जवाब पर जताई नाराजगी; जांच की विस्तृत रिपोर्ट तलब
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!